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Hindi News ›   India News ›   Exclusive: Election Commission will go to Hyderabad on September 11

तेलंगाना की तैयारियों का जायजा लेने 11 सितंबर को हैदराबाद जाएगी चुनाव आयोग की टीम

Fri, 07 Sep 2018 06:51 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 07 Sep 2018 06:51 PM IST
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Exclusive: Election Commission will go to Hyderabad on September 11

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के विधानसभा भंग करने के फैसले से चुनाव आयोग भी अचरज में है। केसीआर चाहते हैं कि साल के आखिर में चार राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ ही तेलंगाना में भी चुनाव हो जाएं। आयोग का कहना है कि ग्रह-नक्षत्रों की गणना के आधार पर राज्य में चुनाव नहीं कराए जा सकते। हालांकि आयोग मंगलवार को एक टीम हैदराबाद दौरे पर भेजने वाला है।

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तेलंगाना में विधानसभा भंग होने के बाद चुनाव आयोग अधिकारियों का एक दल राज्य में चुनावी हालातों का जायजा लेने के लिए भेज रहा है। शुक्रवार को तेलंगाना को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों की बैठक में यह फैसला लिया गया। आयोग के मुताबिक 11 सितबंर, को वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त उमेश सिन्हा के नेतृत्व में अधिकारियों का दल हैदराबाद रवाना होगा, जो दौरा के बाद चुनावी तैयारियों पर अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगा।    
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मुख्य चुनाव चुनाव आयुक्त ओपी रावत का कहना है कि तेलंगाना में विधानसभा चुनाव कराने का फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए दिशा निर्देशों के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि विधानसभा भंग होने के बाद कार्यवाहक सरकार को छह माह से ज्यादा का वक्त नहीं दिया जा सकता, ताकि सत्ता में बैठी सरकार को इसका फायदा न मिल पाए। वहीं विधानसभा भंग होने के मामले में पहले मौके में ही चुनाव कराने का प्रावधान है।
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मुख्य चुनाव चुनाव के मुताबिक राज्य में चुनाव कराने से पहले हमें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों, कानूनी प्रक्रियाओं और राज्य की जमीनी हकीकत को भी ध्यान में रखना होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल का नेता चुनावी कार्यक्रम की घोषणा नहीं कर सकता। इससे पहले पहले केसीआर ने गुरुवार को अनुमान जताया था कि राज्य में चुनाव नवंबर-दिसंबर में कराए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अचानक विधानसभा भंग होने के ऐलान के बाद उन्होंने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से चुनावी तैयारियों को लेकर रिपोर्ट मांगी है, साथ ही पैंडिंग कार्य जल्द पूरा करने को कहा है, जिसके बाद ऑफिशियल ऑडिट कराया जाएगा और चुनाव आयोग के अधिकारी राज्य का दौरा करेंगे, ताकि चुनावों के लिए समय सीमा तय की जा सके।

वहीं रावत ने कहा कि हम अभी आकलन कर रहे हैं कि क्या तेलंगाना में चुनाव छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश और मिजोरम के साथ कराए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रह-नक्षत्रों की गणना के आधार पर राज्य में चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया जा सकता है। वहीं आयोग के सूत्रों का कहना है कि दूसरे राज्यों के साथ चुनाव कराने के लिए जरूरी संसाधन जुटाने होंगे, साथ ही यह मतदाता सूची को भी अपडेट करना होगा। उन्होंने बताया कि हालांकि कानून में मतदाता सूची को लेकर अल्पकालिक संशोधन का प्रावधान है।

वहीं आयोग के दूसरे सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग के प्राथमिक आंकलन के मुताबिक फरवरी तक चुनावों को नहीं टाला जा सकता। उनका दलील है कि आर्टिकल 174(1) के तहत राज्य विधानसभा के दो सत्रों के बीच छह माह से ज्यादा का वक्त नहीं होना चाहिए। जिसका सीधी-सीधा मतलब है सामान्य हालातों में तेलंगाना चुनाव फरवरी से आगे नहीं टाले जा सकते। उनका कहना है कि बहुत संभावनाएं हैं कि चारों राज्यों के साथ ही तेलंगाना में भी साथ-साथ चुनाव कराए जाए। उनका कहना है कि आयोग के पास ईवीएम और वीवीपैट की कोई कमी नहीं है।


गौरतलब है कि के. चंद्रशेखर राव ने गुरुवार को इस्तीफा देकर राज्यपाल से विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर दी, जिसे राज्यपाल ने मंजूरी भी दे दी है। हालांकि केसीआर की सरकार का कार्यकाल अभी 8 महीने और बाकी था। वहीं इस्तीफे के बाद उन्होंने 105 उम्मीदवारों के नामों का भी ऐलान कर दिया। वहीं अचानक विधानसभा भंग करके राव चाहते हैं कि विरोधियों को चुनावी तैयारी करने का भी मौका न मिले। इसके अलावा प्रदेश में माहौल बनाने के लिए चुनावी दौरा भी शुरू कर रहे हैं।

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