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राष्ट्रपति चुनाव: JDU के स्टैंड ने बढ़ाई इस बड़े नेता की तड़प, किनारे लगा दिए गए शरद यादव!
शशिधर पाठक, नई दिल्ली।
Updated Tue, 27 Jun 2017 10:22 PM IST
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नीतीश कुमार, शराद यादव
- फोटो : बिहार कथा
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जद(यू) महासचिव केसी त्यागी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पक्ष में भले ही धार दे दी है, लेकिन पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और राजनीति के धुरंधर शरद यादव की लगातार तड़प बढ़ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अपना स्टैंड बदलने, एनडीए के उम्मीदवार राम नाथ कोविंद को समर्थन देने का फैसला शरद यादव से न तो उगला जा रहा है और न ही निगला। ऐसे में उनके करीबियों को लग रहा है कि शरद यादव अंतररात्मा की आवाज पर कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं।
सूत्र बताते हैं कि नीतीश कुमार द्वारा रामनाथ कोविंद को समर्थन देने के बाद से ही शरद यादव के फोन की घंटी काफी बज रही है। पार्टी के तमाम नेता मुख्यमंत्री के फैसले से खुश नहीं हैं। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी शरद यादव से ही अपनी दुहाई दे रहे हैं। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल भी नीतिश के निर्णय से हैरान हैं। दूसरे शरद जी ही वह शख्स थे जो लगातार जनता दल परिवार के एक होने की वकालत कर रहे थे। वह पिछले कुछ समय से विपक्षी एकता को बनाए रखने की पुरजोर कोशिश भी कर रहे थे।
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समाजवादी नेता स्व. मधु लिमये की याद में दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में भी शरद यादव ने इस पर बल देते हुए राष्ट्रपति चुनाव को अहम बताया था। वहीं नीतीश कुमार ने एक ही झटके में पूरी बाजी पलट दी है। इसे शरद यादव बतकटी के तौर पर देख रहे हैं।
नीतीश के पुराने स्टैंड का समर्थन
जद(यू) और समाजवादी जमात के शरद यादव के करीबी नेताओं के अनुसार नीतीश कुमार ने ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर उनसे राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष का उम्मीदवार खड़ा करने पर जोर दिया था। यह नीतीश कुमार का पुराना स्टैंड था और जद(यू) इसके साथ था। ऐसे में इसकी काफी हद तक संभावना है कि अंतररात्मा की आवाज पर शरद यादव मुख्यमंत्री और पार्टी के शीर्ष नेता नीतीश कुमार के पुराने स्टैंड के साथ बने रहने का मन बना सकते हैं। शरद यादव के इस निर्णय के बाद बिहार ही नहीं केन्द्र की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल वह चाहते हैं नीतीश कुमार अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें।
नीतीश-शरद ने मिलकर बनाई थी जद(यू)
एनडीए की अटल जी की सरकार में नीतीश कुमार और शरद यादव केन्द्रीय मंत्री थे। तब नीतीश कुमार जार्ज फर्नांडीज की समता पार्टी के नेता थे और शरद यादव जनता दल(यू) के। नीतिश कुमार ने शरद यादव के साथ संपर्क बढ़ाना शुरू किया। जब नीतीश यह पहल कर रहे थे तो जार्ज फर्नांडीज को यह अखर रहा था, लेकिन नीतीश की ही चली। समता पार्टी का जद(यू) में विलय हो गया। नीतीश कुमार ने बिहार में राजनीति की कमान संभाल ली और शरद यादव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए। धीरे-धीरे नीतीश कुमार ने गंभीर बीमारी से पीडि़त जार्ज से किनारा कसना शुरू किया और अब माना जा रहा है कि नीतीश कुमार तथा शरद यादव के बीच भी इज्जत बनाये रखने वाला रिश्ता भर रह गया है।
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सूत्र बताते हैं कि नीतीश कुमार द्वारा रामनाथ कोविंद को समर्थन देने के बाद से ही शरद यादव के फोन की घंटी काफी बज रही है। पार्टी के तमाम नेता मुख्यमंत्री के फैसले से खुश नहीं हैं। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी शरद यादव से ही अपनी दुहाई दे रहे हैं। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल भी नीतिश के निर्णय से हैरान हैं। दूसरे शरद जी ही वह शख्स थे जो लगातार जनता दल परिवार के एक होने की वकालत कर रहे थे। वह पिछले कुछ समय से विपक्षी एकता को बनाए रखने की पुरजोर कोशिश भी कर रहे थे।
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नीतीश के पुराने स्टैंड का समर्थन
जद(यू) और समाजवादी जमात के शरद यादव के करीबी नेताओं के अनुसार नीतीश कुमार ने ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर उनसे राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष का उम्मीदवार खड़ा करने पर जोर दिया था। यह नीतीश कुमार का पुराना स्टैंड था और जद(यू) इसके साथ था। ऐसे में इसकी काफी हद तक संभावना है कि अंतररात्मा की आवाज पर शरद यादव मुख्यमंत्री और पार्टी के शीर्ष नेता नीतीश कुमार के पुराने स्टैंड के साथ बने रहने का मन बना सकते हैं। शरद यादव के इस निर्णय के बाद बिहार ही नहीं केन्द्र की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल वह चाहते हैं नीतीश कुमार अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें।
नीतीश-शरद ने मिलकर बनाई थी जद(यू)
एनडीए की अटल जी की सरकार में नीतीश कुमार और शरद यादव केन्द्रीय मंत्री थे। तब नीतीश कुमार जार्ज फर्नांडीज की समता पार्टी के नेता थे और शरद यादव जनता दल(यू) के। नीतिश कुमार ने शरद यादव के साथ संपर्क बढ़ाना शुरू किया। जब नीतीश यह पहल कर रहे थे तो जार्ज फर्नांडीज को यह अखर रहा था, लेकिन नीतीश की ही चली। समता पार्टी का जद(यू) में विलय हो गया। नीतीश कुमार ने बिहार में राजनीति की कमान संभाल ली और शरद यादव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए। धीरे-धीरे नीतीश कुमार ने गंभीर बीमारी से पीडि़त जार्ज से किनारा कसना शुरू किया और अब माना जा रहा है कि नीतीश कुमार तथा शरद यादव के बीच भी इज्जत बनाये रखने वाला रिश्ता भर रह गया है।