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Coal scam: चुनाव लड़ना चाहते हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री, हाईकोर्ट में लगाई सजा पर रोक लगाने की गुहार
Thu, 21 Mar 2024 05:24 PM IST
मिथिलेश नौटियाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मिथिलेश नौटियाल
Updated Thu, 21 Mar 2024 05:24 PM IST
सार
Coal scam: पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे को कोयला घोटाला मामले में तीन साल की सजा सुनाई गई थी। अब उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में सजा पर रोक लगाने की अपील की है। दिलीप रे चुनाव लड़ना चाहते हैं।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे (फाइल फोटो)
- फोटो : Social Media
विस्तार
कोयला घोटाले मामले में दोषी करार दिए गए पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में सजा पर रोक लगाने को लेकर अपील की गई है। दरअसल दिलीप रे चाहते हैं कि वह लोकसभा और ओडिशा विधानसभा चुनाव लड़ें। इस मामले में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने सीबीआई को नेटिस जारी किया है। कोर्ट ने सीबीआई से दिलीप रे के आवेदन पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है।
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याचिका में कही गई ये बातें
पूर्व केंद्रीय मंत्री का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि दिलीप रे आगामी चुनाव लड़ना चाहते हैं। इस वजह से अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि दिलीप रे के खिलाफ कई मामले चल रहे हैं। इन सभी मामलों पर जल्दी फैसला आने की उम्मीदें बहुत कम हैं। याचिका में आगे कहा गया है कि दिलीप रे 71 वर्ष के हो गए हैं। अगर फैसलों में देरी हुई तो अपूरणीय क्षति होने की संभावना भी है।
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क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला साल 1999 में झारखंड के गिरडीह में कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा हुआ है। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने आरोपपत्र में कहा था कि सीटीएल ने कोयला ब्लॉक के लिए मंत्रालय में आवेदन किया था। कोल इंडिया लिमिटेड ने कोयला मंत्रालय को सूचित किया था कि सीटीएल द्वारा जिस जगह पर खनन के लिए आवेदन किया गया है, वहां खतरा है। इसके बाद भी मई 1999 में आवेदन की फाइल तत्कालीन कोयला राज्य मंत्री दिलीप रे के मंत्रालय से कोयला सचिव के पास भेजी गई। नियमों को ताक पर रखकर सीटीएल को कोयला ब्लॉक तो मिल गया, लेकिन खनन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद खनन किया गया।
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इस मामले में 26 अक्टूबर, 2020 को ट्रायल कोर्ट ने रे को तीन साल जेल की सजा सुनाते हुए उन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
ट्रायल कोर्ट ने रे को बेईमानी, विश्वासघात और धोखाधड़ी के अपराधों का दोषी ठहराया था।
इसके बाद मामला हाईकोर्ट में पहुंचा। उच्च न्यायालय ने 27 अक्टूबर, 2020 को रे की दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली अपील पर सीबीआई को नोटिस जारी किया। इसके साथ ही उनकी तीन साल की जेल की सजा को निलंबित कर दिया गया।