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Teesta Setalvad Case: 92 पूर्व सिविल सेवकों ने जारी किया बयान, तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ टिप्पणियों को वापस ले सुप्रीम कोर्ट 

Wed, 06 Jul 2022 07:21 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 06 Jul 2022 07:21 PM IST
सार

92 पूर्व सिविल सेवकों द्वारा हस्ताक्षरित इस खुले बयान में कहा गया है- मौन का हर दिन अदालत की प्रतिष्ठा को कम कर रहा है। 

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Ex-babus want SC to withdraw "gratuitous observations" in Guj riots case order, seek Setalvad's release
तीस्ता सीतलवाड़ - फोटो : पीटीआई

विस्तार

मशहूर पूर्व सिविल सेवकों के एक समूह ने गुजरात में 2002 के सांप्रदायिक दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को एसआईटी की क्लीन चिट को बरकरार रखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और अन्य के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की निरर्थक टिप्पणियों को वापस लेने की मांग की। एक खुले बयान में इन्होंने शीर्ष अदालत से इस आशय का स्पष्टीकरण जारी करने के लिए भी कहा कि यह उनका इरादा यह नहीं था कि सीतलवाड़ को गिरफ्तार कर लिया जाए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से तीस्ता की बिना शर्त रिहाई का आदेश देने का आग्रह किया।

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92 पूर्व सिविल सेवकों में ये नाम शामिल 
92 पूर्व सिविल सेवकों द्वारा हस्ताक्षरित इस खुले बयान में कहा गया है- मौन का हर दिन अदालत की प्रतिष्ठा को कम करता है और संविधान के मूल सिद्धांत को बनाए रखने के अपने दृढ़ संकल्प पर सवाल उठाता है। राज्य के संदिग्ध कार्यों के खिलाफ जीवन और स्वतंत्रता के मूल अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए। हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जी के पिल्लई, पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह, पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह, पूर्व स्वास्थ्य सचिव के सुजाता राव, पूर्व आईपीएस अधिकारी ए एस दुलत और पूर्व आईएएस अधिकारी अरुणा रॉय शामिल हैं। बयान में कहा गया है कि जकिया अहसान जाफरी बनाम गुजरात राज्य में हाल ही में तीन न्यायाधीशों की बेंच के 24 जून, 2022 के फैसले ने नागरिकों को पूरी तरह से परेशान और निराश कर दिया।
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उन्होंने कहा कि सिर्फ अपील को खारिज किए जाने ने लोगों को हैरान नहीं किया है, बल्कि पीठ ने अपीलकर्ताओं, उनके वकील और समर्थकों के बारे में जो अनावश्यक टिप्पणी की है उससे लोग हैरान हैं। फैसले के पैरा 88 का हवाला देते हुए बयान में कहा गया है कि सबसे आश्चर्यजनक टिप्पणी में सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच दल के अधिकारियों की सराहना की जिन्होंने राज्य का बचाव किया है और एसआईटी के निष्कर्षों को चुनौती देने वाले अपीलकर्ताओं को हतोत्साहित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने 24 जून को 2002 के सांप्रदायिक दंगों में नरेंद्र मोदी और 63 अन्य को एसआईटी की क्लीन चिट को बरकरार रखा था, जिसमें कहा गया था कि गोधरा ट्रेन नरसंहार के बाद की हिंसा पूर्व नियोजित थी ।  

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