फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Every fifth person in world has cancer deaths will double in poor countries by 2050

दुनिया में हर पांचवे व्यक्ति को कैंसर: इलाज पर पर्याप्त खर्च नहीं, 2050 तक गरीब देशों में दोगुनी होंगी मौतें

Sun, 04 Feb 2024 06:44 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sun, 04 Feb 2024 06:44 AM IST
सार

डब्ल्यूएचओ की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) ने 115 देशों के सर्वे के आधार पर ये नतीजे जारी किए हैं। वर्ष 2022 में कैंसर के करीब दो करोड़ नए मामले सामने आए, जिनमें 97 लाख लोगों की मौत हुई। अकेले भारत में ही 14 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए।

विज्ञापन
Every fifth person in world has cancer deaths will double in poor countries by 2050
cancer - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कैंसर यानी ऐसा रोग, जिसमें हमारे शरीर की सामान्य कोशिकाओं का एक समूह अनियंत्रित और असामान्य ढंग से बढ़ने लगता है। यह गांठ बनाता है। समय पर इलाज न हो, तो गांठ बढ़कर दूसरे स्वस्थ हिस्सों की कार्यप्रणाली को नुकसान पहुंचाने लगती है। बेहतर देखभाल के लिए इस रोग को समझना भी जरूरी है। यही वजह है कि इस वर्ष विश्व कैंसर दिवस की थीम दी गई है...देखभाल में कमी को मिटाना।

विज्ञापन

जानलेवा बीमारी कैंसर को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़े डराने वाले हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार वर्ष 2050 तक गरीब देशों में कैंसर से होने वाली मौतें दोगुनी हो जाएंगी। इस दौरान दुनियाभर में कैंसर के नए रोगियों की संख्या 3.5 करोड़ से अधिक हो जाएगी, जो वर्ष 2022 के मुकाबले 77 फीसदी अधिक होगी।

विज्ञापन

डब्ल्यूएचओ की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) ने 115 देशों के सर्वे के आधार पर ये नतीजे जारी किए हैं। वर्ष 2022 में कैंसर के करीब दो करोड़ नए मामले सामने आए, जिनमें 97 लाख लोगों की मौत हुई। अकेले भारत में ही 14 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें से भी महिलाएं अधिक हैं। रिपोर्ट के अनुसार चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश देश सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) में कैंसर रोगियों पर पर्याप्त खर्च नहीं कर रहे हैं। वह भी तब, जबकि हर पांच में से एक व्यक्ति कैंसर से प्रभावित है। इतना ही नहीं, नौ में से एक पुरुष और 12 में से एक महिला की कैंसर से मृत्यु हो जाती है। आईएआरसी ने कैंसर के लिए तंबाकू, शराब, मोटापे के अलावा जीवनशैली और बिगड़ते पर्यावरण को जिम्मेदार माना है।

विज्ञापन
विज्ञापन


चिंता इसलिए भी...उच्च मानव विकास वाले देशों में ज्यादा मरीज
दुनियाभर में मानव विकास सूचकांक के आधार पर कैंसर की मामलों में भारी असमानताएं देखने को मिली हैं। खासकर स्तन कैंसर में। उच्च मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) वाले देशों में 12 में से एक महिला को स्तन कैंसर होता है और 71 में से एक की इससे मृत्यु हो जाती है। इसके विपरीत कम एचडीआई वाले देशों में 27 में से केवल एक महिला को अपने जीवनकाल में स्तन कैंसर का पता चलता है। इनमें 48 में से सिर्फ एक महिला की मृत्यु होती है। उच्च मानव विकास सूचकांक वाले देशों में कैंसर के मामलों में सबसे बड़ी वृद्धि का अनुमान है। 2022 की तुलना में 2050 में 48 लाख नए मामले सामने आ सकते हैं।

संसाधन कम तो खामियाजा ज्यादा
डॉ. फ्रेडी ब्रे, आईएआरसी में कैंसर निगरानी शाखा के प्रमुख ने कहा कि जिन लोगों के पास कैंसर की बीमारी का सामना करने के लिए सबसे कम संसाधन हैं, उन्हें वैश्विक कैंसर के बोझ का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। डॉ. कैरी एडम्स, प्रमुख, यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल ने कहा कि सरकारों को सुनिश्चित करना चाहिए कि कैंसर की जांच व इलाज सस्ती दरों पर आसानी से उपलब्ध हों। यह राजनीतिक इच्छाशक्ति का मामला भी है। 

नए मामलों में 10 तरह के कैंसर जिम्मेदार
आईएआरसी के ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी में 185 देशाें के 36 तरह के कैंसर रोगियों को शामिल किया गया। अध्ययन के अनुसार नए मामलों और दो तिहाई मौतों के लिए 10 तरह के कैंसर जिम्मेदार हैं। दुनियाभर में कैंसर के सबसे अधिक मामले फेफड़े के हैं। इसके 25 लाख नए केस सामने आए हैं। यह कुल नए मामलों का 12.4% है। महिलाओं में स्तन कैंसर के 23 लाख (11.6%), कोलोरेक्टल (मलाशय से शुरू होने वाला) कैंसर के 19 लाख (9.6%), प्रोस्टेट कैंसर के 15 लाख (7.3%) और पेट के कैंसर के 9.70 लाख मामले (4.9%) हैं।

सर्वाधिक मौतें फेफड़े के कैंसर से
फेफड़े का कैंसर मौत का प्रमुख कारण है। 2022 में इससे 18 लाख मौतें हुईं जो कैंसर से कुल मौतों की 18.7% थीं। कोलोरेक्टल कैंसर से 9 लाख मौतें, लिवर कैंसर से 7.60 लाख मौतें, स्तन कैंसर से 6.70 लाख मौतें और पेट के कैंसर से 6.60 लाख मौतें हुईं। फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू का उपयोग है।

महिलाओं में स्तन कैंसर से अधिक मौतें
महिलाओं में सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर और उससे होने वाली मौत का प्रमुख कारण स्तन कैंसर है। 185 में से 157 देशों में महिलाओं में सर्वाधिक कैंसर इसी के थे। महिलाओं में फेफड़े और कोलोरेक्टल कैंसर के नए मामलों और मौतों की संख्या दोनों के मामले में दूसरे और तीसरे स्थान पर थे।

पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर आम
पुरुषों में प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल(मलाशय) कैंसर दूसरे और तीसरे सबसे आम कैंसर है। वहीं, मौतों के मामले लिवर और कोलोक्टरल कैंसर दूसरे और तीसरे आम कारण हैं। दुनियाभर में सामान्य तौर पर होने वाले कैंसर में सर्वाइकल आठवें स्थान पर है। इसके 6,61,044 मामले सामने आए और 3,48,186 मौत हुई।

कैंसर की जांच कराने से कतराते हैं लोग
भारत में अब भी लोग कैंसर की जांच कराने से कतराते हैं। कैंसर के मरीजों की बढ़ती संख्या से सरकार बेहद चिंतित है। शुरुआती स्तर पर इस बीमारी की पहचान के लिए कई स्तर पर प्रयास हो रहे हैं। नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम इसी का हिस्सा है।

रोग की वजह
शराब व तंबाकू सेवन, समय पर नहीं सोना, सामान्य जीवन शैली न अपनाना, वातावरण प्रदूषण, रसायनों के लगातार संपर्क में रहना, खान-पान में मिलावट और इसकी विकृत आदतें, बढ़ती उम्र, आनुवंशिकता और मोटापा इस रोग की वजहें हो सकते हैं।

ऐसे पहचानें लक्षण
किसी अंग में दर्दरहित गांठ, खांसने या सांस लेने में दिक्कत, निगलने में बाधा महसूस होना, पेट साफ करने की प्रक्रिया में अनियमितता, इस प्रक्रिया में रक्त आना, अचानक वजन कम होना, थकान महसूस होना, भूख में कमी।



देश में हर दिन 2160 मौतें...3905 मामले आ रहे सामने...तीन साल में 23 लाख ने तोड़ा दम
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम की रिपोर्ट के अनुसार भारत में तीन साल (2020 से 2022) में कैंसर से 23.68 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। हर दिन 2160 मौतें व 3905 मामले सामने आ रहे हैं। तीन साल में 42 लाख से अधिक लोग चपेट में आ चुके हैं। हर साल औसतन 7.89 लाख मौतें हो रही हैं। यूपी में हर दिन 320, महाराष्ट्र में 183 और बिहार में 166 लोग जान गंवा रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed