फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   ESIC denied to give full compensation of dead girl in Mumbai

मुंबई आग: अस्पताल ने मृतक बच्ची के लिए दिया घायलों वाला मुआवजा, कहा- 'वो वैसे भी मरने वाली थी'

Wed, 26 Dec 2018 01:26 PM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Shilpa Thakur Updated Wed, 26 Dec 2018 01:26 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
ESIC denied to give full compensation of dead girl in Mumbai
- फोटो : ANI

मुंबई के ईएसआईसी कामगार अस्पताल में 17 दिसंबर को लगी आग के दौरान एक बच्ची (जुड़वां) की मौत हो गई थी। जन्म के महज कुछ दिनों बाद ही दुनिया छोड़नी वाली इस बच्ची के माता-पिता को बेटी की मौत पर 10 लाख रुपये का पूरा मुआवजा नहीं दिया गया। उन्हें केवल दो लाख रुपये दिए गए और कहा गया कि वह पैदाइशी कमजोर थी और वैसे भी मरने वाली थी। बता दें मृतकों को 10 लाख और घायलों को 2 लाख रुपये मुआवजा दिया गया है।


loader

अधिकारियों ने दावा किया है कि बच्ची का समय से पहले जन्म हुआ था इसलिए वह काफी कमजोर थी। "उसकी हालत पैदा होने के बाद से ही गंभीर बनी हुई थी। तो ऐसा माना जा सकता है कि उसकी मौत प्राकृतिक थी।" बच्ची की मौत अस्पताल में आग लगने के चार दिन बाद शुक्रवार को हुई। इस आग में कुल 11 लोगों की मौत हुई थी, जिसमें दो शिशु भी हैं। 

बच्ची के माता-पिता को सोमवार को दो लाख रुपये का चेक दिया गया और कुछ देर बाद उन्हें एक और चेक दिया गया। उनसे कहा गया कि पहला चेक उनकी बेटी का है और दूसरा उनके बेटे का। बेटा अभी अस्पताल में भर्ती है। 27 साल की महिला का कहना है कि पैसा उनके बच्चे के जाने के दुख को कम नहीं कर सकता लेकिन वो कैसे इस बात से इनकार कर सकते हैं कि वह आग की शिकार नहीं थी? दंपति ने कहा कि अस्पताल के अधिकारी आग के दौरान मारे गए और घायल हुए लोगों को मुआवजा दे रहे थे।

महिला के पति का कहना है, "हमने तुरंत ही गलती पकड़ ली लेकिन उन्हें पता था कि हमारी बेटी पहले ही मर चुकी है। अधिकारियों ने कहा कि जितने पैसे मिल रहे हैं उतने ले लें। बाद में मामला ईएसआईसी के सामने रखना।"

महिला ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। जिसमें से एक लड़का और एक लड़की थी। लड़की की मौत हो चुकी है, वह जब पैदा हुई तो कमजोर थी। उसका वजन 800 ग्राम था। वहीं लड़के का वजन 1.5 किलोग्राम था। लड़की का वजन तीन दिन बाद और भी कम हो गया। महिला ने बताया कि "डॉक्टरों ने कहा था कि आजकल 500-600 किग्रा वाले बच्चे भी अच्छी एनआईसीयू केयर के साथ जीवित रह सकते हैं।" उन्होंने कहा कि "आग लगने के बाद बच्ची को 45-60 मिनट तक बिना वेंटीलेटर के रखा गया। बाद में उसे एंबुलेंस में ऑक्सीजन मिला और अस्पताल की आग से उसे काफी नुकसान पहुंचा।" इलाज के दौरान अस्पताल में बच्ची की मौत हो गई। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed