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प्लास्टिक की इन सभी चीजों पर लगने वाला है प्रतिबंध, बन रहा है सख्त कानून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 29 Sep 2018 03:19 PM IST
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प्लास्टिक
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय चार प्लास्टिक उत्पादों को समाप्त करने के लिए देशभर में एक समान कानून बनाने पर विचार कर रहा है। यह प्लास्टिक उत्पाद हैं- फोम वाले गिलास, पानी की प्लास्टिक बोतलें, डिस्पोसेबल प्लास्टिक की चम्मचें और प्लास्टिक की सभी थैलियां। हालांकि इस कानून के दायरे से केवल एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को अलग रखा गया है। मंत्रालय के पास एक ड्राफ्ट तैयार है लेकिन इसके विभिन्न खंडों पर आंतरिक रूप से बातचीत की जा रही है।
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मंत्रालय ने सभी राज्यों को पत्र लिखा है और उन्हें इन उत्पादों पर अपनी नीतियां और दिशा-निर्देश बताने के लिए कहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हाल ही में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने धरती के चैंपियन सम्मान से सम्मानित किया है। उन्हें यह सम्मान 2022 तक एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को पूरी तरह से खत्म करने की प्रतिज्ञा लेने और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का नेतृत्व करने की वजह से मिला है। पर्यावरण मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार प्लास्टिक उद्योग देशभर में एकसमान नियम चाहता है ना कि राज्य विशिष्ट प्रतिबंध।
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पर्यावरण मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक की परिभाषा पर काम किया जा रहा है। उपयोग होने वाले 50 प्रतिशत प्लास्टिक केवल एक बार इस्तेमाल होने वाली श्रेणी में आते है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'एक केंद्रीय कानून पर काम किया जा रहा है लेकिन देश को इसके लिए तैयार होना चाहिए। राज्यों को आगे आना चाहिए। प्लास्टिक बैग और पतले प्लास्टिक बैग को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर 22 राज्यों में प्रतिबंधित किया गया है। महाराष्ट्र का कानून सबसे सख्त है। सिक्किम भी प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध लागू करने वाला है। हमने झारखंड और मध्यप्रदेश में भी आशाजनक परिणाम देखे हैं।'
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महाराष्ट्र के प्लास्टिक और थर्माकोल उत्पाद अधिसूचना में प्लास्टिक बैग और फोम कप्स के साथ ही प्लास्टिक की पैकेजिंग को लेकर मार्च 2018 में अधिसूचित किया गया था। केंद्रीय कानून महाराष्ट्र की अधिसूचना के आधार पर हो सकता है। नियम का सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए इसमें एक दंडनीय खंड शामिल किया जाएगा। मंत्रालय प्लास्टिक उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के लिए राज्यों और संस्थानों के साथ बातचीत कर रहा है। अधिकारी ने कहा, 'हमने इन चार वस्तुओं को स्वेच्छा से चरणबद्ध करने के लिए सभी मंत्रालयों और सरकारी विभागों को लिखा है।'
दूध के पैकेट एक बार प्रयोग होने वाले प्लास्टिक उत्पाद हैं जिनका भारत में बहुत ज्यादा उपयोग होता है। लेकिन इसे कानून के दायरे में नहीं लाया जाएगा क्योंकि इसका दूसरा कोई विकल्प मौजूद नहीं है। बोतलबंद पानी पर मंत्रालय की योजना इन्हें दफ्तर और संस्थानों पर प्रतिबंधित करने की है। लेकिन व्यक्तियों पर नहीं। एक अधिकारी ने कहा, 'फिलहाल के लिए हम लोगों से कह रहे हैं कि बोतलबंद पानी का इस्तेमाल संस्कृति के तौर पर ना करें। इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है।'