पर्यावरण संरक्षण : एचसीएल का कमाल, कचरे से निकलेगा 'सोना-चांदी'
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देश में कचरे का निपटारा करने का इतना बेहतर तरीका शायद ही किसी ने ढूंढकर निकाला हो, जिससे वह खुद-ब-खुद सोना और चांदी उगलने लगे। यह कारनामा देश की सार्वजनिक कंपनी हिंदुस्तॉन कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) ने कर दिखाया है। खनिज पत्थरों से तांबा निकालने के बाद शेष रह गए बुरादे (कचरा) से दुर्लभ तत्वों को निकालने की यूनिट उसने तैयार कर ली है। अप्रैल से इसकी शुरुआत करके वह सालाना कचरे का प्रबंधन कर 60 से 70 करोड़ रुपये भी कमाने लगेगा।
खनन के जरिए देश में तांबा की जरूरतों को पूरा करने में हिस्सेदारी निभाने वाली एचसीएल ने ढाई सौ करोड़ रुपये से कचरा प्रबंधन की यूनिट तैयार की है। एचसीएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक संतोष शर्मा के मुताबिक पहले तांबा निकालने के बाद पत्थरों के बुरादे को एक निर्धारित स्थान पर कचरे की तरह फेंक दिया जाता था। अब इसके प्रसंस्करण की यूनिट स्थापित हो चुकी है और अगले दो-तीन माह में यह शुरू हो जाएगी।
इसके जरिए एचसीएल प्रतिदिन दस हजार टन कचरे से आठ-नौ सौ ग्राम सोना, पांच से आठ किलो चांदी, 450 टन तांबे का चूरा, 50-60 टन मैग्नेटाइट और 4500 से पांच हजार टन सिलिका निकाल लेगा। बाकी रेत बचेगी, जो निर्माण कार्य में काम आ जाएगी। उन्होंने कहा कि इस तरह से पूरे कचरे का प्रबंधन हो जाएगा और पर्यावरण संरक्षित होगा। हमारा इरादा तांबा अयस्क के खदान में होने वाले खनन को पूरी तरह से कचरा मुक्त करना है।
60-70 करोड़ रुपये की सालाना आय होने का अनुमान
सार्वजनिक कंपनी के प्रबंध निदेशक शर्मा ने कहा कि अनुमान है कि कचरा प्रबंधन से सालाना हमें 60-70 करोड़ रुपये की आय होगी। इसके अलावा लोगों को रोजगार मिलेगा। खास बात ये है कि इसे पूरे काम में एक प्रतिशत भी प्रदूषण नहीं होगा। किसी तरह के केमिकल या भट्ठी का प्रयोग इस यूनिट में नहीं किया जा रहा है, बल्कि पहले चरण में पानी फिर चुंबक के जरिए दुर्लभ तत्वों को अलग किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कचरा प्रबंधन का पहला ट्रायल खेतड़ी, राजस्थान में तांबा अयस्क यूनिट में किया गया था। लेकिन वहां पानी की समस्या के मद्देनजर कचरा प्रबंधन की यूनिट को मध्य प्रदेश में स्थापित किया गया। शर्मा ने स्पष्ट किया कि कचरे से दुर्लभ तत्वों को निकलाने की प्रक्रिया में पानी बर्बाद नहीं होता है। उसी पानी को दोबारा शोधन के दौरान प्रयोग में लाया जाता है। पानी के बाद चुंबकीय मशीन सभी तत्वों को अलग करती है। मैग्नेटाइट को लौह पदार्थों के काम में लाया जाता है। जबकि सिलिका शीशा बनाने में काम आती है।
गौरतलब है कि एचसीएल इस यूनिट से निकलने वाली रेत, सीलिका, मैग्नेटाइट, चांदी और सोना की बिक्री करेगा। पहले प्रति दस हजार टन और फिर प्रसंस्करण में मात्रा को बढ़ाया जाएगा। ऐसे में एचसीएल तांबा निकलाने की अपनी सभी यूनिट के कचरे का प्रबंधन कर पर्यावरण को संरक्षित करेगा। साथ ही आय को बढ़ाकर सार्वजनिक उपक्रम की क्षमता को मजबूत करेगा।