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आपातकाल के दौरान दमन का शिकार हुए पीड़ितों ने मांगी पेंशन और स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा

Mon, 27 Aug 2018 02:30 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 27 Aug 2018 02:30 AM IST
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Emergency victims demanded pension and freedom fighter status
Emergency 1975 - फोटो : File Photo

आपातकाल के दौरान मीसा और डीआईआर कानून के तहत सरकारी उत्पीड़न का शिकार हुए पीड़ितों ने महाराष्ट्र सरकार की तर्ज पर प्रधानमंत्री से स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा मांगा है। अखिल भारतीय लोकतंत्र सेनानी संघर्ष समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल हुए देश भर के आपातकाल पीड़ितों ने बाकी बचे 20 राज्यों में भी आपातकाल पीड़ितों के लिए पेंशन की व्यवस्था करने की मांग की।

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समिति ने सरकार को यूपी, राजस्थान, पंजाब और मद्रास हाईकोर्ट के फैसलों की याद दिलाई जिसमें सरकारों को ऐसे पीड़ितों को उचित सम्मान देने का निर्देश दिया गया था। समिति के अध्यक्ष गोवर्धन प्रसाद अटल ने कहा कि देश में खिलाफत आंदोलन के अलावा मोपला विद्रोहियों को पेंशन दिया जा रहा है। जिसका आजादी आंदोलन से कोई लेना देना नहीं है। जबकि लोकतंत्र की रक्षा के लिए हजारों लोगों को मीसा और डीआईआर कानून के तहत जेल में बंद कर उनके परिवारों को तबाह किया गया।
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उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र जैसे कई राज्य ऐसे लोकतंत्र सेनानियों को पेंशन दे रही है। जबकि 20 राज्य अब तक पेंशन देने केलिए तैयार नहीं हैं। समिति ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर न सिर्फ स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा मांगा है, बल्कि आपातकाल पीड़ितों की सूची की जांच की भी मांग की है। 
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समिति के प्रभारी नरेश गुप्ता ने कहा कि हम चाहते हैं कि इस दिशा में केंद्र सरकार खुद पहल करे। लोकतंत्र की रक्षा के लिए सरकार से संघर्ष करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने के अलावा संविधान में यह भी व्यवस्था करे कि भविष्य में कोई भी सरकार तानाशाही का सहारा ले कर देश पर आपातकाल नहीं थोप सके। समिति की बैठक में यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, असम, मणिपुर सहित अन्य कई राज्यों के आपातकाल के दौरान दमन का शिकार हुए पीड़ितों ने हिस्सा लिया। 

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