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एल्गार परिषद केस: बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की गौतम नवलखा की जमानत अर्जी

Mon, 08 Feb 2021 06:33 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: प्रियंका तिवारी Updated Mon, 08 Feb 2021 06:33 PM IST
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Elgar Council Case Bombay High Court  Dismisses Gautam Navlakha Bail plea
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सिविल राइट्स एक्टिविस्ट गौतम नवलखा की जमानत याचिका की खारिज - फोटो : अमर उजाला

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को एल्गार परिषद-माओवादी संबंधित मामले में कार्यकर्ता गौतम नवलखा की जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि उसे विशेष अदालत के आदेश में दखल देने का कोई कारण नजर नहीं आता, जो पहले ही जमानत याचिका खारिज कर चुकी है।

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न्यायमूर्ति एस एस शिंदे और न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक की पीठ ने सोमवार को कहा कि उसने पिछले साल नवलखा की जमानत याचिका खारिज करने के विशेष एनआईए अदालत के आदेश पर गौर किया है और उसे इस आदेश में हस्तेक्षप को कोई कारण नजर नहीं आता।
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नवलखा ने जमानत याचिका खारिज करने के पिछले साल 12 जुलाई के एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया था। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुणे में 31 दिसंबर 2017 को एल्गार परिषद की एक सभा आयोजित की गई थी। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने कथित रूप से सभा में भड़काऊ भाषण दिए थे, जिसके अगले दिन जिले के कोरेगांव भीमा में हिंसा भड़क गई थी।
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पुलिस का आरोप है कि कार्यक्रम को माओवादी समूहों का समर्थन हासिल था। बता दें, इस मामले की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अधिकरण (एनआईए) द्वारा की जा रही है। फिलहाल नवलखा मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं। उनकी खराब तबीयत का हवाला देकर हाईकोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई गई थी। नवलखा ने 12 जुलाई 2020 के एनआईए की विशेष अदालत के जमानत याचिका खारिज करने के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया था।


उल्लेखनीय है कि एक जनवरी 1818 को भीमा-कोरेगांव की लड़ाई में पेशवा बाजीराव द्वितीय पर अंग्रेजों ने जीत हासिल की थी। इसमें दलित भी शामिल थे। बाद में अंग्रेजों ने कोरेगांव में अपनी जीत की याद में जयस्तंभ का निर्माण कराया था। आगे चल कर यह दलितों का प्रतीक बन गया। लड़ाई की 200वीं सालगिरह के मौके पर दलित संगठनों ने एक जनवरी 2018 को कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसी दौरान हिंसा में एक युवक की मौत हो गई और 50 गाड़ियां फूंकी गईं। इस हिंसा के लिए पुणे के शनिवार वाड़ा में हुए एल्गार परिषद कार्यक्रम को जिम्मेदार बताया गया था। बाद में इसी मामले में गौतम नवलखा समेत एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया गया।

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