चुनावी माहौल में इस एक घटना पर गरमा सकती है यूपी की सियायत
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चुनावी माहौल में छात्र जाबिर के आत्मदाह प्रकरण पर सियासत गरमा सकती है। घटना के बाद भाजपा, सपा और कांग्रेस के नेता अपने ढंग से घटना की जिम्मेदारी तय कर रहे हैं। सपा और कांग्रेस जहां घटना के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार बता रहे हैं वहीं भाजपा इसका दोष राज्य सरकार पर मढ़कर अपना पल्लू झाड़ लेना चाहती है। मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री महेंद्र नाथ पांडेय का कहना है कि घटना का मुख्य कारण पुलिस का लाठीचार्ज करना है। पुलिस ने संयम से काम लिया होता तो किसी छात्र के आत्मदाह की नौबत नहीं आती।
पुलिस ने लाठीचार्ज के जरिए छात्रों को भड़काने का काम किया है। रही बात कुलपति रतनलाल हांगलू की तो इनकी शिकायत राष्ट्रपति से करने के साथ मंत्रालय भी अपने स्तर से जांच कराएगा। उनके खिलाफ पहले भी शिकायत मिली थी। जिसकी जांच जारी है। विश्वविद्यालय छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष और शहर पश्चिमी विधान सभा सीट से समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी ऋचा सिंह ने अस्पताल जाकर जाबिर का हाल देखा और कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन यहां भी रोहित वेमुला जैसी घटना दोहराना चाहता था।
ऋचा ने बताया कि उन्होंने कुलपति से बात की तो उनका जवाब था कि विश्वविद्यालय प्रशासन का घटना से कुछ भी लेना देना नहीं है। ऋचा के मुताबिक, उन्होंने जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से जाबिर के इलाज का समुचित इलाज का प्रबंध करने को कहा है। रोहित वेमुला का नाम लेकर एक तरह से ऋचा सिंह ने इशारे में केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है।
साथियों को भी नहीं लगी इरादे की भनक
उधर, इविवि के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे शहर उत्तरी के निवर्तमान विधायक और कांग्रेस के प्रत्याशी अनुग्रह नारायण सिंह को रात पौने 12 बजे तक घटना की जानकारी ही नहीं थी। अमर उजाला ने जब उनसे फोन पर इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा वह कुछ ही देर पहले बाहर से आए हैं। इसलिए उन्हें घटना की पूरी जानकारी नहीं है। उनकी बातों से ऐसा लगा कि चुनावी माहौल में वह कोई बयान देने से बचना चाहते थे।
साथियों को भी नहीं लगी इरादे की भनक
इलाहाबाद (ब्यूरो)। पुलिस-प्रशासन और खुफिया शाखा से इतर जाबिर के साथी छात्रों का कहना है कि उन्हें भी उसके इस इरादे की कोई भनक नहीं लगी। पूर्व छात्रनेता अखिलेश गुप्ता उर्फ गुड्डू के मुताबिक वह गुरुवार सुबह छात्रसंघ भवन के पास मौजूद थे तभी जाबिर उन्हें कैंपस में जाता दिखा। उसे देख साथियों ने कहा कि जाबिर भाई कैंपस में हैं तो जरूर क्रांति होगी।
इस पर जाबिर ने बोला था कि नहीं भाई ऐसे ही आ गया हूं आंदोलन में शामिल होने। वरिष्ठ छात्रनेता जिया कोनैन रिजवी ने बताया कि जाबिर हमेशा छात्रों के हित की लड़ाई आगे रहते हैं। साथी छात्रनेता अंकुश यादव, पवन यादव, सदाकत, हीतेश ने बताया कि जाबिर का ऐसा कोई इरादा नहीं था। विश्वविद्यालय प्रशासन की तानाशाही के चलते ऐसा कदम उठाया है।