छह चरणों में खरीदे गए 1056 करोड़ के इलेक्टोरल बांड, राजनीतिक दलों ने जमकर उठाया फायदा
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चुनावी चंदे में पारदर्शिता लाने के मकसद से लांच की गई इलेक्टोरल बांड योजना का राजनीतिक दलों ने जमकर फायदा उठाया है। सरकार ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में एक हजार 56 करोड़ रुपए के इलेक्टोरल बांड्स खरीदे गए। गौरतलब है कि भाजपा की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2018 तक कुल 222 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बांड्स जारी हुए थे, जिसमें 210 करोड़ रुपये उसके खाते में आए थे।
मंगलवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान सांसद नदिमुल हक के सवालों का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पी राधाकृष्णन ने बताया कि नवंबर 2018 तक इलेक्टोरल बांड स्कीम के छह चरण पूरे होने तक 1056.73 करोड़ के बांड्स खरीदे गए। वहीं राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल बांड्स से 1045.53 करोड़ रुपए की नकदी मिली।
इस साल दो जनवरी को अधिसूचित हुई थी योजना
राधाकृष्णन के मुताबिक सरकार ने इस साल दो जनवरी को इलेक्टोरल बांड स्कीम को अधिसूचित किया था। इन इलेक्टोरल बांड्स को कोई भी व्यक्ति जो भारत का नागरिक है या देश में गठित कोई भी इकाई इसे खरीदने की पात्र है। इन इलेक्टोरल बांड्स को एसबीआई की 11 शाखाओं से खरीदा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा के तहत 29ए के पंजीकृत राजनीतिक दल ही चुनावी बांड प्राप्त करने के पात्र हैं। चुनावी बांड जारी होने की तिथि से 15 दिनों के लिए वैध होगा। कोई भी पात्र राजनीतिक दल खाते में अगर बांड जमा करता है तो उसकी राशि उसी दिन अकाउंट में आ जाएगी।
वहीं भाजपा ने 24 नवंबर को चुनाव आयोग को सौंपी अपनी 31 मार्च 2018 तक की ऑडिट रिपोर्ट में बताया था कि 01 से 10 मार्च तक चले पहले चरण में सरकार ने 222 करोड़ के 520 बांड जारी किए थे, जिसका 95 फीसदी हिस्सा भाजपा के खाते में गया है।