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चुनाव आयोग: पांच राज्यों के अधिकारियों के हुए तबादले, इलेक्शन से पहले प्रशासनिक फेरबदल की वजह क्या?
Tue, 27 Oct 2026 05:17 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Tue, 27 Oct 2026 05:17 PM IST
सार
चुनाव आयोग ने 2027 में विधानसभा चुनाव वाले उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड में अधिकारियों के तबादले के निर्देश दिए हैं। गृह जिले में तैनात और एक जिले में तीन साल पूरे कर चुके अधिकारियों को हटाया जाएगा।
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चुनाव आयोग
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
चुनाव आयोग ने मंगलवार को उन पांच राज्यों को, जहां 2027 में चुनाव होने हैं, चुनाव कार्यों से सीधे जुड़े कुछ श्रेणियों के अधिकारियों का तबादला करने का निर्देश दिया है। ये पांच राज्य हैं - गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड।
हाल ही में इन पांच राज्यों सहित 17 राज्यों में मतदाता सूची के 'विशेष सारांश पुनरीक्षण' का आदेश देते हुए, चुनाव आयोग ने कहा था कि इन पांच राज्यों में चुनाव अगले साल की शुरुआत में हो सकते हैं। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए, लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग का अधिकारियों का तबादला करने का निर्देश देना एक सामान्य प्रक्रिया है।
क्या है निर्देश?
इन पांच राज्यों को भेजे गए एक निर्देश में, चुनाव आयोग ने कहा है कि जो अधिकारी अपने गृह जिलों में तैनात हैं, या जिन्होंने पिछले चार वर्षों में किसी जिले में तीन साल पूरे कर लिए हैं (या उत्तर प्रदेश के मामले में 31 मई 2027 तक तीन साल पूरे कर लेंगे), उन्हें वहां से हटाकर दूसरी जगह तैनात किया जाना चाहिए।
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इस आदेश के दायरे में जिला चुनाव अधिकारी (डीईओ), ऑफिसर (आरओ), अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएस), उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम), तहसीलदार और ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) जैसे जिला स्तरीय अधिकारी; तथा संभागीय और नगर आयुक्त आते हैं।
इसके अलावा, उप-निरीक्षक से लेकर रेंज के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) और महानिरीक्षक (आईजी) स्तर तक के पुलिस अधिकारी, तथा आबकारी और परिवहन विभाग के उप-निरीक्षक या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी भी इस आदेश के दायरे में आते हैं।
किसे मिली छूट?
राज्य मुख्यालयों में तैनात अधिकारियों को इस आदेश से छूट दी गई है। साथ ही, चुनाव कार्यों से न जुड़े कर्मचारियों, जैसे डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षकों को भी इससे बाहर रखा गया है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा (493 सदस्य) का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त हो रहा है, जबकि मणिपुर (60 सदस्य), गोवा (40 सदस्य), पंजाब (117 सदस्य) और उत्तराखंड (70 सदस्य) की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा। 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' के प्रावधानों के तहत, चुनाव आयोग को यह अधिकार है कि वह विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले चुनाव करा सकता है।
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हाल ही में इन पांच राज्यों सहित 17 राज्यों में मतदाता सूची के 'विशेष सारांश पुनरीक्षण' का आदेश देते हुए, चुनाव आयोग ने कहा था कि इन पांच राज्यों में चुनाव अगले साल की शुरुआत में हो सकते हैं। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए, लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग का अधिकारियों का तबादला करने का निर्देश देना एक सामान्य प्रक्रिया है।
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क्या है निर्देश?
इन पांच राज्यों को भेजे गए एक निर्देश में, चुनाव आयोग ने कहा है कि जो अधिकारी अपने गृह जिलों में तैनात हैं, या जिन्होंने पिछले चार वर्षों में किसी जिले में तीन साल पूरे कर लिए हैं (या उत्तर प्रदेश के मामले में 31 मई 2027 तक तीन साल पूरे कर लेंगे), उन्हें वहां से हटाकर दूसरी जगह तैनात किया जाना चाहिए।
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इस आदेश के दायरे में जिला चुनाव अधिकारी (डीईओ), ऑफिसर (आरओ), अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएस), उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम), तहसीलदार और ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) जैसे जिला स्तरीय अधिकारी; तथा संभागीय और नगर आयुक्त आते हैं।
इसके अलावा, उप-निरीक्षक से लेकर रेंज के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) और महानिरीक्षक (आईजी) स्तर तक के पुलिस अधिकारी, तथा आबकारी और परिवहन विभाग के उप-निरीक्षक या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी भी इस आदेश के दायरे में आते हैं।
किसे मिली छूट?
राज्य मुख्यालयों में तैनात अधिकारियों को इस आदेश से छूट दी गई है। साथ ही, चुनाव कार्यों से न जुड़े कर्मचारियों, जैसे डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षकों को भी इससे बाहर रखा गया है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा (493 सदस्य) का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त हो रहा है, जबकि मणिपुर (60 सदस्य), गोवा (40 सदस्य), पंजाब (117 सदस्य) और उत्तराखंड (70 सदस्य) की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा। 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' के प्रावधानों के तहत, चुनाव आयोग को यह अधिकार है कि वह विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले चुनाव करा सकता है।