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Hindi News ›   India News ›   Election Commission called up the all-party meeting in Kolkata on 16 April amid covid-19 situation

कोरोना के बढ़ते मामले: चार राज्यों में मतदान खत्म होने और पश्चिम बंगाल में आधा चुनाव होने के बाद नींद से जागा चुनाव आयोग!

Wed, 14 Apr 2021 08:11 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 14 Apr 2021 08:11 PM IST
सार

  • कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के बीच बुलाई कोलकाता में सर्वदलीय बैठक
  • सभी जिलाधिकारियों को दिया कोविड-19 की गाइडलाइंस पालन कराने का निर्देश

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Election Commission called up the all-party meeting in Kolkata on 16 April amid covid-19 situation
प्रधानमंत्री मोदी की रैली - फोटो : PTI

विस्तार

कोविड-19 संक्रमण को लेकर नींद में सोया चुनाव आयोग जाग गया है। कोलकाता में चुनावी रैलियां, रोड-शो में कोविड व्यवहार का सख्ती से पालन कराने के लिए आयोग ने कदम उठाया है। सभी जिलाधिकारियों को इसके बाबत सख्त निर्देश दिए हैं। मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने, जरूरी होने पर धारा-144 लगाने के भी निर्देश दिए हैं। 16 अप्रैल को आयोग ने कोलकाता में सर्वदलीय बैठक बुलाई है। ताकि दलों के नेताओं से कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए सावधानी बरतने की अपील की जा सके।

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पश्चिम बंगाल में कोविड-19 का संक्रमण फैल रहा है। अकेले कोलकाता में 8,600 के करीब कोविड-19 से संक्रमित लोग हैं। 25 परगना में सात हजार से अधिक सक्रिय मामले हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 29,050 कोविड के संक्रमित हैं। पिछले 24 घंटे में 2500 से अधिक नए संक्रमित मिले हैं, जबकि 20 लोगों की संक्रमण से मृत्यु हो चुकी है। इस तरह से अब तक 10,343 लोग कोविड संक्रमण से अपनी जान गंवा चुके हैं। राज्य में अब तक 83,45,753 लोगों को कोविड की वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इनमें से 73,28,568 लोगों को टीके की पहली और 10,17,185 को दूसरी डोज लग चुकी है।  

चुनाव आयोग की इस सक्रियता पर टीएमसी के वरिष्ठ नेता, ममता सरकार में मंत्री पार्थ चटर्जी ने कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। वहीं टीएमसी के एक अन्य नेता ने कहा कि चुनाव आयोग का शुरू से अजीब रवैया रहा है। चुनाव आयोग जैसे लगता है भाजपा के हिसाब से काम कर रहा है। उसे याद चार चरणों के मतदान के बाद आई है। सूत्र का कहना है कि मीडिया को पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में चुनाव कराए जाने पर शोध करना चाहिए। ऐसा पहली बार हुआ है, जब एक ही जिले में तीन चरणों में मतदान हुआ है। टीएमसी नेता का कहना है कि पश्चिम बंगाल में कोविड के संक्रमित मार्च से ही मिल रहे हैं।

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पश्चिम बंगाल भाजपा के उपाध्यक्ष देबाशीष मित्रा का कहना है कि आदमी का जीवन अधिक कीमती है। संक्रमण काफी पहले से फैल रहा है। इसलिए चुनाव आयोग ने जो कदम अब उठाना शुरू किया है, उसे पहले उठाना चाहिए था। देबाशीष मित्रा का कहना है कि चुनाव प्रचार का समय कम करने, लोगों में कोविड व्यवहार का पालन कराने से संक्रमण कम फैलेगा, लोगों की जान बचेगी। इस बार का संक्रमण बच्चों को निशाना बना रहा है। हालांकि मुझे लगता है कि जहां शुरू में मतदान हुए, वहां के प्रत्याशियों को प्रचार का समय कम मिल पाया था। इसलिए चुनाव आयोग उस समय खास सख्ती करता नजर नहीं आ रहा था।

ममता बनर्जी चुनाव आयोग के इस प्रयास को बना सकती है मुद्दा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव आयोग के कदम से लगातार नाराज चल रही हैं। वह चुनाव आयोग के आठ चरणों में मतदान की घोषणा से लेकर खुद के कूच विहार जाने से रोक, 24 घंटे तक प्रचार अभियान पर रोक समेत कई निर्णयों पर आपत्ति लगा चुकी हैं। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग के इस निर्णय पर भी ममता बनर्जी की तल्ख प्रतिक्रिया आ सकती है। टीएमसी के रणनीतिकारों का कहना है कि पहले तीन चरण के मतदान भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र में हुए हैं, लेकिन चौथे चरण के मतदान से चुनाव टीएमसी के गढ़ में प्रवेश कर रहा है।

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