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हरियाणा में जातिवाद और आरक्षण के चक्रव्यूह से कांग्रेस को कैसे निकाल पाएंगी प्रियंका गांधी?

Mon, 06 May 2019 10:26 PM IST
Gaurav Pandey डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Mon, 06 May 2019 10:26 PM IST
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Election Analysis : How Priyanka Gandhi will bring Congress from Casteism and Reservation in Haryana
प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)

हरियाणा में 12 मई को मतदान है, लिहाजा अब सभी पार्टियों ने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। भाजपा उम्मीदवार पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं तो वहीं कांग्रेस पार्टी अभी तक मोदी के समक्ष राहुल गांधी को नहीं खड़ा कर पाई। ये कांग्रेस के लिए नकारात्मक साबित हो रहा है।

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दूसरी ओर, कांग्रेस उम्मीदवार जातिवाद और आरक्षण के चक्रव्यूह में फंसे हैं। कांग्रेस पार्टी के सभी उम्मीदवार इन दोनों मसलों से बाहर निकलने के लिए छटपटा रहे हैं। उन्हें इस चक्रव्यूह से बाहर निकालने के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा सात मई को प्रदेश का दौरा करेंगी। प्रदेश कांग्रेस को उम्मीद है कि प्रियंका गांधी का यह दौरा पार्टी उम्मीदवारों को कुछ राहत प्रदान करेगा।
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बता दें कि प्रदेश में 2016 के दौरान आरक्षण के नाम पर जो दंगे हुए थे, उसके बाद भाजपा पर गैर-जाटों की पार्टी होने का पक्का ठप्पा लग गया था। हालांकि भाजपा ने कई तरह के राजनीतिक और गैर-राजनीतिक सम्मेलन आयोजित कर लोगों को यह संदेश देने का प्रयास किया है कि प्रदेश में सभी हरियाणवी एक हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 'हरियाणा एक, हरियाणवी एक' का नारा दिया था, लेकिन राजनीतिक तौर से पार्टी पर गैर-जाट की राजनीति करने जैसे आरोप लगे।

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गैर जाटों की नाराजगी झेल रही कांग्रेस

आज स्थिति यह है कि कांग्रेस ने जिन सीटों पर जाट प्रत्याशियों को टिकट दी है, वहां उन्हें गैर जाटों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है। खासतौर पर, पंजाबी, ब्राह्मण, यादव, सैनी, ठाकुर, वैश्य और दूसरी पिछड़ी एवं अनुसूचित जातियां कहीं न कहीं अपने हितों को भाजपा के साथ सुरक्षित मान रही है। रोहतक, सोनीपत और भिवानी सीट पर कांग्रेस पार्टी ने जाट उम्मीदवार खड़े किए हैं। इन तीनों ही सीटों पर कांग्रेस को शहरी वोटरों में अपनी जगह बनाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। बाकी सीटों पर भी जाट-गैर जाट के समीकरण बने हैं।

अंबाला, हिसार, सिरसा, फरीदाबाद और गुरुग्राम में भी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों को आरक्षण के दौरान हुई आगजनी व दंगों का सामना करना पड़ रहा है। तकरीबन सभी सीटों पर एक पार्टी विशेष द्वारा आरक्षण के दंगों के वीडियो चलाए जा रहे हैं। लोगों को बताया जा रहा है कि आरक्षण के दौरान प्रदेश में कमजोर वर्गों के साथ क्या हुआ था। अब चुनाव में इसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ रहा है, इसलिए पार्टी की हरियाणा इकाई ने आलाकमान से आग्रह किया था कि प्रदेश में राहुल या प्रियंका के दौरे कराए जाएं। अब सात मई को प्रियंका गांधी अंबाला, हिसार और रोहतक का दौरा करेंगी। रोहतक में उनका रोड शो भी रखा गया है।

भाजपा तो दोनों तरफ से फायदा ले गई

प्रदेश के राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आरक्षण के दंगों के बाद भाजपा दोनों तरफ से फायदा ले गई। पूर्ववर्ती चौटाला सरकार या हुड्डा सरकार के दौरान प्रदेश के गैर-जाट वर्ग में यह संदेश चला गया था कि सरकारी नौकरियां में जमकर भेदभाव हो रहा है। साथ ही नौकरियों में एक जाति विशेष के लोगों को तरजीह मिल रही है। इसके अलावा लोगों के बीच यह भी खूब प्रचारित किया गया कि सरकारी नौकरी कथित तौर पर पैसे और राजनीतिक सिफारिश पर मिलती है।

ट्रांसफर पोस्टिंग में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। प्रदेश की राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले एमके भल्ला का कहना है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सरकारी नौकरियों में निष्पक्षता और पारदर्शिता लाने के लिए जो कुछ किया, उससे प्रदेश के सभी वर्गों में यह संदेश चला गया है कि अब ईमानदारी और मेरिट पर नौकरी मिल रही है। इसे भाजपा ने सभी लोकसभा क्षेत्रों में अच्छे से भुनाया है। इसके नतीजे भी सार्थक मिले हैं।

दूसरा, गैर जाट वोटरों के मत बंट नहीं रहे हैं, जबकि जाट वोटर, कांग्रेस, इनेलो और जननायक जनता पार्टी के बीच विभाजित हो रहे हैं। भाजपा को इसका सीधा फायदा मिल रहा है। यही वजह है कि अब कांग्रेस पार्टी को शहरी क्षेत्रों के वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए राहुल-प्रियंका जैसे स्टार प्रचारकों की जरूरत पड़ रही है। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक तंवर का कहना है कि हम सभी सीटों पर मजबूत स्थिति में हैं। राहुल प्रियंका के आने से हमें बड़ा फायदा यह मिलेगा कि इससे हमारे उम्मीदवारों की जीत का अंतर बढ़ जाएगा।

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