ED: फर्जी कॉल सेंटर स्थापित कर विदेशी नागरिकों के साथ धोखाधड़ी, अपराध की आय को यूं करते थे भारत में ट्रांसफर
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सागर यादव और उनकी सहयोगी कंपनियों मेसर्स स्क्रैपिक्स कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड व मेसर्स कैसानोवस रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड, जो दोनों कोलकाता में स्थित हैं,से जुड़े फर्जी कॉल सेंटरों के मामले में कार्रवाई की है। ईडी ने आयरिश महिला कार्मेल फॉक्स के साथ हुई साइबर धोखाधड़ी की सूचना के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पटना क्षेत्रीय कार्यालय ने सागर यादव और उनकी सहयोगी कंपनियों मेसर्स स्क्रैपिक्स कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड व मेसर्स कैसानोवस रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड, जो दोनों कोलकाता में स्थित हैं,से जुड़े फर्जी कॉल सेंटरों के मामले में कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने उक्त कंपनियों के जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत 2.83 करोड़ रुपये (लगभग) मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। कुर्क की गई संपत्तियों में जमीन के टुकड़े, फ्लैट और सावधि जमा आदि शामिल हैं। आरोपी, फर्जी कॉल सेंटर स्थापित कर विदेशी नागरिकों के साथ साइबर धोखाधड़ी की वारदात को अंजाम देते थे। इसके बाद वे अपराध की आय को विभिन्न तरीकों से भारत में ट्रांसफर करते थे।
ईडी ने आयरिश महिला कार्मेल फॉक्स के साथ हुई साइबर धोखाधड़ी की सूचना के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। हालांकि इसके लिए आयरिश की राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो (एनसीबी) और भारत की केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) से ईडी कार्यालय को शिकायत प्राप्त हुई थी। सीबीआई ने एनसीबी आयरलैंड से प्राप्त शिकायती दस्तावेज, ईडी को मुहैया कराए थे। ईडी, पटना जोनल कार्यालय ने इस मामले में ईसीआईआर दर्ज करके जांच शुरू की, क्योंकि यह मामला पीएमएलए, 2002 की धारा 2(1) (आरए) में परिभाषित 'सीमा पार निहितार्थ' के अपराध की श्रेणी के अंतर्गत आता था। इस तरह के केस में अपराध एक विदेशी देश में किया गया था और बाद में अपराध की आय (पीओसी) भारत में स्थानांतरित कर दी गई थी।
ईडी की जाँच से पता चला है कि कुछ व्यक्ति फर्जी कॉल सेंटर स्थापित करके विदेशी नागरिकों के साथ साइबर धोखाधड़ी कर रहे थे। साइबर धोखाधड़ी के ऐसे कृत्यों से उत्पन्न पीओसी को वेस्टर्न यूनियन/मनीग्राम, रीवायर, रेमिटली के साथ-साथ क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भारत में लाया जाता था। फिर उसे लेंडेन क्लब, लेंडबॉक्स, लिक्विलोन्स आदि जैसे ऐप्स के माध्यम से धन शोधन के लिए इस्तेमाल किया जाता था। ईडी ने इस केस में सागर यादव सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया है। सागर यादव, उनकी संस्थाओं और उनके अन्य सहयोगियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत और दो पूरक अभियोजन शिकायतें दर्ज की हैं।
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जांच एजेंसी के मुताबिक, मेसर्स स्क्रैपिक्स कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स कैसानोवस रियलिटी प्राइवेट के नाम पर 2 अचल संपत्तियाँ खरीदी गईं, जिनका बिक्री मूल्य पीओसी यानी अपराध की आय का उपयोग करके चुकाया गया। ईडी ने 2.67 करोड़ रुपये (लगभग) की इन अचल संपत्तियों को अनंतिम कुर्की रखा है। सावधि जमा (एफडी) के रूप में 15.75 लाख रुपये (लगभग) मूल्य की चल संपत्तियों को भी अनंतिम कुर्की के तहत रखा गया है।