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एयरसेल-मैक्सिस मामले में ईडी ने किया चिदंबरम की अग्रिम जमानत का विरोध, मांगी कस्टडी

Wed, 31 Oct 2018 03:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 31 Oct 2018 03:58 PM IST
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ED files reply opposing anticipatory bail plea filed by P Chidambaram in the Aircel Maxis case
पी चिदंबरम - फोटो : PTI

एयरसेल मैक्सिस केस में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। मामले की सुनवाई गुरुवार को होगी। ईडी ने कहा है कि हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जरूरत है। जमानत दिए जाने से जांच को नुकसान होगा।

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बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एयरसेल-मैक्सिस धन शोधन मामले में बृहस्पतिवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। ईडी ने चिदंबरम पर विदेशी निवेशकों के उद्यमों को मंजूरी देने के लिए उनके साथ सांठगांठ करने का आरोप लगाया है।
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विशेष न्यायाधीश ओ पी सैनी ने आरोपपत्र पर विचार करने के लिए 26 नवंबर की तारीख तय की।  ईडी ने मामले में पहला आरोपपत्र चिदंबरम के पुत्र कार्ती के खिलाफ दायर किया था। बाद में उनके खिलाफ एक पूरक आरोपपत्र भी दायर किया गया था।
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एयरसेल-मैक्सिस सौदेबाजी घोटाले में ईडी ने बुधवार को पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को अग्रिम जमानत दिए जाने का अदालत में विरोध किया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत से इस मामले में मनी लांड्रिंग के आरोपों की पूछताछ के लिए वरिष्ठ कांग्रेसी नेता चिदंबरम को उसकी हिरासत में सौंपे जाने की मांग की। 

ईडी की तरफ से बुधवार को चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका के विरोध में अपना जवाब दाखिल किया गया था। ईडी ने चिदंबरम पर जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाते हुए उन्हें जमानत दिए जाने को जांच के लिए बेहद हानिकारक साबित होने की बात कही थी।

ईडी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वरिष्ठ वकील, राज्य सभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री होने के नाते चिदंबरम जांच को प्रभावित करने की हैसियत रखते हैं। इस मामले की सुनवाई अब बृहस्पतिवार को विशेष जज ओपी सैनी की अदालत में होगी। बता दें कि अदालत ने 8 अक्तूबर को चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति को इस मामले में गिरफ्तारी से मिली राहत की अवधि 1 नवंबर तक बढ़ा दी थी। 

30 मई से लगातार बढ़ रही जमानत अवधि
बता दें कि चिदंबरम को इस मामले में पहली बार 30 मई को गिरफ्तारी से राहत दी गई थी, जिसे बाद में अदालत ने कई बार बढ़ाया है। ईडी ने 25 अक्तूबर को आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसमें चिदंबरम पर एयरसेल-मैक्सिस मनी लांड्रिंग मामले में विदेशी निवेशकों से गठजोड़ करते हुए अवैध तरीके से उनकी एफडीआई को अनुमति देने का आरोप लगाया गया था।

एजेंसी ने इस मामले में नौ आरोपियों के नाम शामिल किये हैं जिनमें चिदंबरम, एस भास्कररमन (कार्ती के सीए), वी श्रीनिवासन (एयरसेल के पूर्व सीईओ) भी हैं।  उनके खिलाफ आरोप है कि मार्च 2006 में पूर्व मंत्री द्वारा विदेशी निवेशक ग्लोबल कम्युनिकेशन एंड सर्विसेज होल्डिंग्स लिमिटेड, मॉरीशस को अवैध एफआईएफबी अनुमोदन दिए जाने के बदले 1.16 करोड़ रुपये का धनशोधन किया गया। आरोप है कि यह मंजूरी भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति से जुड़े विभिन्न नियमों का उल्लंघन कर दी गयी।

ईडी ने दूसरा पूरक आरोपपत्र दायर करते हुए कहा कि 2006 में भारत सरकार की एफडीआई नीति के नियमों के तहत तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम को 600 करोड़ रूपए तक के विदेशी निवेश के प्रस्ताव को मंजूरी देने का अधिकार था। ग्लोबल कम्युनिकेशन एंड सर्विसेज होल्डिंग्स लिमिटेड का निवेश प्रस्ताव आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) को भेजा जाना था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया और ‘साजिश’ के तहत चिदंबरम द्वारा मंजूरी दे दी गयी।


इसमें कहा गया है कि आरोपपत्र पर्याप्त भौतिक सबूतों पर आधारित है जो ईमेल के रूप में हैं तथा कार्ती और उसके सहयोगियों के जब्त डिजिटल उपकरणों से प्राप्त किए गए हैं। इस मामले में पहला आरोपपत्र 13 जून को कार्ती के खिलाफ दायर किया गया था जिसमें दावा किया गया था कि एयरसेल-मैक्सिस धनशोधन मामले में रिश्वत के रूप में दो कंपनियों को कथित तौर पर 1.16 करोड़ रूपये मिले थे। आरोपपत्र के अनुसार इन कंपनियों पर कार्ती का नियंत्रण था। ईडी की ओर से वकील एन के मट्टा और नीतेश राणा अदालत में उपस्थित हुए।

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