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2,654 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी का मामला, ED ने DPIL की 1,122 करोड़ रुपये की संपत्ति की अटैच
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Wed, 25 Apr 2018 04:36 AM IST
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Enforcement Directorat
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को बताया कि उसने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में वडोदरा स्थित कंपनी डायमंड पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (डीपीआईएल) की विंड मिल्स और एक निर्माणाधीन होटल समेत 1,122 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है। यह कार्रवाई धन शोधन की जांच के संबंध में गई है।
बता दें कि डीपीआईएल विभिन्न बैंकों से 2,654 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की आरोपी है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने सीबीआई की प्राथमिकी पर स्वत: संज्ञान लेते हुए धन शोधन निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत डीपीआईएल और उसके प्रोमोटरों के खिलाफ आपराधिक मामला दायर किया था। ईडी ने पिछले महीने कंपनी के परिसरों की तलाशी भी ली थी।
ईडी ने बताया कि डीपीआईएल व उससे संबंधित कंपनियों जैसे कि डायमंड पावर ट्रांसफॉर्मर लिमिटेड, डायमंड प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, मेफेयर लेजर्स और नॉर्थवे स्पेसिस की संपत्तियां अटैच की गई हैं। अटैच की गई संपत्तियों में संयंत्र, मशीनरी, वडोदरा में इमारत और जमीन, भुज में तीन विंडमिल्स, भटनागर परिवार (प्रोमोटरों) के आवासीय बंगले/फ्लैट, बिना बिके हुए फ्लैट्स, निर्माणाधीन होटल एवं अन्य भूखंड शामिल हैं।
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प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि डीपीआईएल ने अपनी संबंधित संस्थाओं के जरिए कथित तौर पर ‘धोखाधड़ी’ कर के 261 करोड़ रुपये हासिल किए। एजेंसी ने आरोप लगाया कि बैंकों से लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) की सुविधा को तोड़ मरोड़कर यह रकम हासिल की गई। ईडी ने कहा कि कंपनी ने लोन या कैश के रूप में हासिल बड़ी रकम नॉर्थवे स्पेसिस और मेफेयर लेजर्स जैसी रियल एस्टेट कंपनियों में भी लगाया।
प्रवर्तन निदेशालय इस बात की छानबीन कर रहा है कि क्या आरोपियों द्वारा लोन का इस्तेमाल गैरकानूनी संपत्तियां और काला धन बनाने में किया गया। सीबीआई ने कहा था कि डीपीआईएल को एस. एन. भटनागर और उनके बेटे अमित व सुमित भटनागर प्रोमोट करते हैं जो इस कंपनी के कार्यकारी अधिकारी भी हैं। डीपीआईएल बिजली की केबल और उपकरण बनाती है।
डायमंड्स ग्रुप की कंपनियों की व्यापारिक गतिविधि रही कम: ईडी
प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि डायमंड समूह की कंपनियों की वास्तविक व्यापारिक गतिविधि काफी कम रही जबकि रिकॉर्ड बताते हैं कि ज्यादातर व्यापार फर्जी लेनदेन से किया गया। नतीजतन बैंकों के साथ 2654.40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आई।
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बता दें कि डीपीआईएल विभिन्न बैंकों से 2,654 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की आरोपी है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने सीबीआई की प्राथमिकी पर स्वत: संज्ञान लेते हुए धन शोधन निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत डीपीआईएल और उसके प्रोमोटरों के खिलाफ आपराधिक मामला दायर किया था। ईडी ने पिछले महीने कंपनी के परिसरों की तलाशी भी ली थी।
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ईडी ने बताया कि डीपीआईएल व उससे संबंधित कंपनियों जैसे कि डायमंड पावर ट्रांसफॉर्मर लिमिटेड, डायमंड प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, मेफेयर लेजर्स और नॉर्थवे स्पेसिस की संपत्तियां अटैच की गई हैं। अटैच की गई संपत्तियों में संयंत्र, मशीनरी, वडोदरा में इमारत और जमीन, भुज में तीन विंडमिल्स, भटनागर परिवार (प्रोमोटरों) के आवासीय बंगले/फ्लैट, बिना बिके हुए फ्लैट्स, निर्माणाधीन होटल एवं अन्य भूखंड शामिल हैं।
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प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि डीपीआईएल ने अपनी संबंधित संस्थाओं के जरिए कथित तौर पर ‘धोखाधड़ी’ कर के 261 करोड़ रुपये हासिल किए। एजेंसी ने आरोप लगाया कि बैंकों से लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) की सुविधा को तोड़ मरोड़कर यह रकम हासिल की गई। ईडी ने कहा कि कंपनी ने लोन या कैश के रूप में हासिल बड़ी रकम नॉर्थवे स्पेसिस और मेफेयर लेजर्स जैसी रियल एस्टेट कंपनियों में भी लगाया।
प्रवर्तन निदेशालय इस बात की छानबीन कर रहा है कि क्या आरोपियों द्वारा लोन का इस्तेमाल गैरकानूनी संपत्तियां और काला धन बनाने में किया गया। सीबीआई ने कहा था कि डीपीआईएल को एस. एन. भटनागर और उनके बेटे अमित व सुमित भटनागर प्रोमोट करते हैं जो इस कंपनी के कार्यकारी अधिकारी भी हैं। डीपीआईएल बिजली की केबल और उपकरण बनाती है।
डायमंड्स ग्रुप की कंपनियों की व्यापारिक गतिविधि रही कम: ईडी
प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि डायमंड समूह की कंपनियों की वास्तविक व्यापारिक गतिविधि काफी कम रही जबकि रिकॉर्ड बताते हैं कि ज्यादातर व्यापार फर्जी लेनदेन से किया गया। नतीजतन बैंकों के साथ 2654.40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आई।