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कमांडर सम्मेलन: अब युद्ध में अग्रिम मोर्चा संभालेंगे ड्रोन, सेना की नई आधुनिक इकाइयों की भी होगी समीक्षा
Tue, 14 Apr 2026 05:18 AM IST
Nirmal Kant
ब्यूरो, नई दिल्ली।
ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Tue, 14 Apr 2026 05:18 AM IST
सार
युद्धों में ड्रोन की निर्णायक भूमिका को देखते हुए भारतीय सेना अब अग्रिम मोर्चों को मानव रहित हवाई प्रणालियों से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है और इसी पर दिल्ली में चार दिवसीय कमांडर सम्मेलन में विस्तार से चर्चा हुई। पढ़िए रिपोर्ट-
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ड्रोन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दुनिया में जारी युद्धों में ड्रोन वॉरफेयर की बढ़ती भूमिका देखते हुए सेना अब अपने अग्रिम मोर्चों को मानव रहित हवाई प्रणालियों (यूएवी) से पूरी तरह लैस करने की तैयारी में है। दिल्ली में सोमवार से शुरू हुए चार दिवसीय कमांडर सम्मेलन में मल्टी डोमेन ऑपरेशंस के माहौल में इनके व्यापक उपयोग पर चर्चा की जा रही है।
हाल के संघर्षों ने यह साफ किया है कि छोटे और सस्ते ड्रोन भी युद्ध की दिशा बदल सकते हैं। ऐसे में अग्रिम मोर्चों पर हमलावर ड्रोन की तैनाती और उनके संचालन की रणनीति तैयार की जाएगी। दुश्मन के ड्रोन को बेअसर करने के लिए अधिक ड्रोन-रोधी तकनीकें शामिल करने पर भी बात होगी। साल 2026 को इयर ऑफ नेटवर्किंग एंड डाटा सेंट्रिसिटी घोषित करने के बाद यह सेना का पहला बड़ा सम्मेलन है। सेना का जोर ड्रोन से मिलने वाले डाटा को रीयल-टाइम में कमांड सेंटर्स तक पहुंचाने और सटीक स्ट्राइक सुनिश्चित करने पर है। सम्मेलन का एक फोकस मल्टी डोमेन ऑपरेशंस भी है, जिसमें थल, जल और नभ के साथ ही साइबर और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में एकीकृत युद्ध लड़ने की क्षमता विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
सम्मेलन में कैबिनेट सचिव डॉ टीवी सोमनाथन, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष आलोक जोशी सेना के समक्ष सरकार का दृष्टिकोण रखेंगे। रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान जैसे बदलते भू-राजनीतिक हालातों और उनसे राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी चर्चा करेंगे। साथ ही सीडीएस जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी अपना सामरिक विषयों पर अपना रुख साझा करेंगे।
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ये भी पढ़ें: कहानी फिल्मी है: केरल में हत्या का दोषी मुंबई से गिरफ्तार, पुलिस से बचने के लिए कचरा उठाने वाला बना
नई इकाइयों की होगी समीक्षा...
सेना ने हाल ही में आधुनिक युद्ध के लिए कई नई इकाइयां तैयार की हैं। इनमें भैरव बटालियन, अश्नि प्लाटून, दिव्यास्त्र बैटरी और शक्तिबाण रेजिमेंट आदि शामिल हैं। कमांडर इस बात की समीक्षा करेंगे कि ये नई इकाइयां तकनीकी बदलावों और अत्याधुनिक साजो-सामान के साथ कितने प्रभावी ढंग से तालमेल बिठा पा रही हैं।
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हाल के संघर्षों ने यह साफ किया है कि छोटे और सस्ते ड्रोन भी युद्ध की दिशा बदल सकते हैं। ऐसे में अग्रिम मोर्चों पर हमलावर ड्रोन की तैनाती और उनके संचालन की रणनीति तैयार की जाएगी। दुश्मन के ड्रोन को बेअसर करने के लिए अधिक ड्रोन-रोधी तकनीकें शामिल करने पर भी बात होगी। साल 2026 को इयर ऑफ नेटवर्किंग एंड डाटा सेंट्रिसिटी घोषित करने के बाद यह सेना का पहला बड़ा सम्मेलन है। सेना का जोर ड्रोन से मिलने वाले डाटा को रीयल-टाइम में कमांड सेंटर्स तक पहुंचाने और सटीक स्ट्राइक सुनिश्चित करने पर है। सम्मेलन का एक फोकस मल्टी डोमेन ऑपरेशंस भी है, जिसमें थल, जल और नभ के साथ ही साइबर और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में एकीकृत युद्ध लड़ने की क्षमता विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
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सम्मेलन में कैबिनेट सचिव डॉ टीवी सोमनाथन, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष आलोक जोशी सेना के समक्ष सरकार का दृष्टिकोण रखेंगे। रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान जैसे बदलते भू-राजनीतिक हालातों और उनसे राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी चर्चा करेंगे। साथ ही सीडीएस जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी अपना सामरिक विषयों पर अपना रुख साझा करेंगे।
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नई इकाइयों की होगी समीक्षा...
सेना ने हाल ही में आधुनिक युद्ध के लिए कई नई इकाइयां तैयार की हैं। इनमें भैरव बटालियन, अश्नि प्लाटून, दिव्यास्त्र बैटरी और शक्तिबाण रेजिमेंट आदि शामिल हैं। कमांडर इस बात की समीक्षा करेंगे कि ये नई इकाइयां तकनीकी बदलावों और अत्याधुनिक साजो-सामान के साथ कितने प्रभावी ढंग से तालमेल बिठा पा रही हैं।