मिशन शक्ति पर चिदंबरम को डीआरडीओ का जवाब, ऐसे कार्यों को गोपनीय नहीं रख सकते
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख जी सतीश रेड्डी ने पूर्व वित्त मंत्री व कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के मिशन शक्ति पर दिए गए बयान पर पलटवार किया है। डीआरडीओ प्रमुख ने शनिवार को कहा कि मिशन शक्ति की प्रकृति ऐसी है कि इसको किसी भी स्थिति में गोपनीय नहीं रखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि उपग्रह को दुनियाभर के कई स्टेशनों के जरिये ट्रैक किया जाता है।
इस दौरान उनसे यह पूछा गया कि इस तरह के परीक्षण को करने के बाद सार्वजनिक करने की क्या जरूरत थी, क्या चुनावी मौसम में इसके बारे में बताने से पहले सभी संबंधित संस्थानों से मंजूरी ली गई थी। इस सवाल के जवाब में रेड्डी ने कहा कि टेस्ट के बाद इस तरह के मिशन को तकनीकी रूप से गुप्त नहीं रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मिशन के लिए सभी जरूरी मंजूरियां ली गई थीं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन ने भी इस तरह के परीक्षणों को करने के बाद दुनिया को इसकी जानकारी दी थी।
DRDO Chief G Satheesh Reddy on P Chidambaram's statement on #MissionShakti : Mission of this nature after a test is conducted can’t be kept secret. The satellite is tracked by many stations across the world. All necessary permissions were taken. pic.twitter.com/A9mYnttZag
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) April 6, 2019
बता दें कि डीआरडीओ का यह बयान कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम की उस टिप्पणी का जवाब माना जा रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि बुद्धिमान सरकार अपनी क्षमता को गोपनीय रखती है केवल मूर्ख सरकार ही सैन्य गोपनीयता का खुलासा करती है।
मिशन शक्ति की अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा आलोचना करने और लाइव सैटेलाइट के मार गिराने से उत्पन्न मलबे से खतरे की आशंका को डीआरडीओ के चेयरमैन जी सतीश रेड्डी ने सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति के दौरान हमने 300 किलोमीटर से भी कम दूरी के लोअर ऑर्बिट को चुना जिससे दुनियाभर के अन्य देशों के स्पेस असेट्स को मलबे से कोई नुकसान न हो।
उन्होंने साफ किया कि यह सारा मलबा 45 दिन के अंदर नष्ट हो जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि वैसे तो भारतीय इंटरसेप्टर की क्षमता 1000 किलोमीटर के ऑर्बिट में सैटेलाइट को गिराने की थी। नासा ने मिशन शक्ति को बेहद खतरनाक बताते हुए कहा था कि इसकी वजह से अंतरिक्ष की कक्षा में करीब 400 मलबे के टुकड़े फैल गए हैं, जोकि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में मौजूद स्पेस असेट्स के लिए नया खतरा उत्पन्न कर सकता है।
2 साल, 150 वैज्ञानिकों की मेहनत से मिली कामयाबी
रेड्डी ने बताया कि मिशन शक्ति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में मंजूरी दी थी। रिकॉर्ड 2 साल में करीब 150 वैज्ञानिकों की मेहनत से इस प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। सिस्टम और अन्य उपकरणों के लिए कई भारतीय कंपनियों ने सहयोग किया। जनवरी 2019 में रडार, कम्यूनिकेशन नेटवर्क आदि स्थापित किए गए। आखिरकार 27 मार्च को सुबह मिसाइल लांच की गई और उसने पूरी सटीकता के साथ टारगेट को हिट किया।
डिफेंस का सबसे अच्छा तरीका डिटरेंस है
डीआरडीओ चेयरमैन ने कहा कि डिफेंस का सबसे अच्छा तरीका डिटरेंस है। मिशन शक्ति से देश ने जमीन से ही सीधे लक्ष्य को निशाना बनाने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया और यह डिफेंस के लिए भी काम करता है।