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ट्रंप और मोदी की मुलाकात में द्विपक्षीय नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग में आ सकती है तेजी
Thu, 20 Feb 2020 08:37 PM IST
अनवर अंसारी
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Thu, 20 Feb 2020 08:37 PM IST
सार
भारत आ रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली बैठक में द्विपक्षीय नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग के क्षेत्र में तेजी लाने के लिए बात हो सकती है। वेस्टिंगहाउस और न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) कोवड़ा, एपी में छह 1100 मेगावाट के रिएक्टर बनाने के लिए अमेरिकन प्रतिनिधिमंडल से चर्चा संभव है।
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Donald Trump and Pm Modi
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
वेस्टिंगहाउस के दिवालियापन के मुद्दों के समाधान के बाद, दोनों पक्ष अब इस कार्य को जिम्मेदारी के साथ पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बैठक में कौन सा पक्ष किस तरह के काम की जिम्मेदारी लेगा, यह चर्चा हो सकती है। एनपीसीआईएल ने वेस्टिंगहाउस की मॉड्यूलर निर्माण पद्धति को समझने के लिए अमेरिकी संदर्भ संयंत्र का दौरा किया था।
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भारत और अमेरिका के बीच अक्तूबर 2008 में परमाणु सहयोग समझौता हुआ था। इस समझौते से भारत के परमाणु ऊर्जा उत्पादन में खासा इजाफा हुआ है। इससे पहले हुई भारत और अमेरिका की आपसी वार्ता में कहा गया कि दोनों राष्ट्र द्विपक्षीय नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
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इसी के तहत भारत में छह अमेरिकी परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने पर सहमती बनी थी। ये संयंत्र आंध्र प्रदेश के कोवड़ा में लगाए जाने हैं। अमेरिकी परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना सहित द्विपक्षीय सुरक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग को मजबूत करने के लिए दोनों राष्ट्रों ने प्रतिबद्धता जताई थी।
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भारत और अमेरिका ने अक्टूबर 2008 में जिस असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग करने के लिए ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, उसके बाद से दोनों राष्ट्रों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिली थी। इस सौदे का अहम पहलू परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) था, जिसने भारत को एक विशेष छूट दी थी।
इसी सौदे के कारण भारत एक दर्जन देशों के साथ सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर कर सका था। छूट के बाद, भारत ने अमेरिका, फ्रांस, रूस, कनाडा, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, यूके, जापान, वियतनाम, बांग्लादेश, कजाकिस्तान और दक्षिण कोरिया के साथ असैन्य परमाणु सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए। अब माना जा रहा है कि ट्रंप और मोदी की वार्ता में 1100 मेगावाट के छह रिएक्टर बनाने की योजना आगे बढ़ सकती है।