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क्या दूध पीने से बच्चों के 'सेक्सुअल ऑर्गन्स' में हो रहा असामान्य विकास? 

Wed, 10 Oct 2018 05:42 PM IST
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 10 Oct 2018 05:42 PM IST
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Does drinking milk uncommon development in children sexual organs?
Milk
क्या दुधारू जानवरों को दिए जाने वाले इंजेक्शन 'ऑक्सीटोसिन' का असर दूध के माध्यम से बच्चों के अंदर पहुंच रहा है? और क्या इसी कारण से बच्चों के सेक्सुअल ऑर्गन्स का तेज विकास हो रहा है? विशेषकर लड़कियों के मामले में, क्या उनके जननांगों का 'असामान्य' विकास हो रहा है और उनमें समय से पहले मासिक धर्म शुरू हो रहा है? विशेषज्ञों का कहना है कि खानपान में परिवर्तन, वातावरण के बदलाव और सूचना पहुंचने के स्रोतों में आये बदलाव के कारण अब ऐसा हो रहा है और तमाम बच्चों में इस तरह के लक्षण दिखाई पड़ रहे हैं। 
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रसायन विज्ञान के एक विशेषज्ञ डॉक्टर आरएन त्रिपाठी के मुताबिक दुधारू पशुओं का दूध निकालने के लिए कुछ किसान अपने जानवरों को ऑक्सिटोसिन इंजेक्शन देते हैं। इससे पशु की ऐच्छिक मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं और उन पर उनका नियंत्रण खत्म हो जाता है। इससे एक बार में ही पशुओं का पूरा दूध उतर जाता है। इसी कारण से किसान पशुओं को यह इंजेक्शन लगाते हैं। लेकिन जिस तरह हमारी खाई गई दवाओं के अंश हमारे खून या पेशाब में दिखाई पड़ते हैं, उसी प्रकार पशुओं को दिए इंजेक्शन का असर भी उनके दूध में पहुंच जाता है। 
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यही कारण है कि बीमार पशुओं के दूध को किसी को नहीं पिलाना चाहिए। लेकिन अज्ञानता या आर्थिक लालच में किसान इन पशुओं के दूध का खुद भी प्रयोग करते हैं और बाहर भी बेच देते हैं। अगर कोई किसान अपने पशु को ऑक्सिटोसिन का इंजेक्शन लगाता है तो उसका रेसिड्यू दूध के माध्यम से हमारे शरीर में पहुंचने की पूरी संभावना रहती है। और इस कारण से हमारे शरीर पर उसका नकारात्मक असर पड़ना तय होता है।
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बच्चों पर असर

डॉक्टर आरएन त्रिपाठी के मुताबिक, ऑक्सीटोसिन के रेसिड्यू के अंश बच्चों के शरीर में पहुंचने से उनके जननांगों के विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और वह असामान्य हो जाता है। इसके असर के कारण बच्चियों में समय से पहले मासिक धर्म की शुरुआत हो सकती है। गर्भवती महिलाओं के द्वारा ऐसे दूध को पीने से उनका गर्भपात होने की आशंका बढ़ जाती है।

नई दिल्ली के स्टैंडर्ड एनालिटिकल लेब्रोटरी के निदेशक देवांशु श्रीवास्तव के मुताबिक कुछ पुरुषों के स्तन का विकास भी अपेक्षाकृत अधिक हो जाता है और यह काफी बुरा दिखने लगता है। इसे सेकंडरी सेक्सुअल कैरेक्टरिस्टिक या द्वितीयक लैंगिक लक्षण कहते हैं। पुरुषों में इन लक्षणों के होने के पीछे भी ऑक्सिटोसिन जैसे इंजेक्शन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


कैसा दूध सुरक्षित

देवांशु श्रीवास्तव के मुताबिक बड़े ब्रांड्स के दूध अपेक्षाकृत इन परेशानियों से मुक्त होते हैं। उनके पास दूध की हर सप्लाई के पहले चेकिंग की एक उचित व्यवस्था होती है जिसके कारण कोई नकारात्मक चीज लोगों तक नहीं पहुंच पाती। लेकिन छोटी डेयरियों, संक्रमित क्षेत्र में पल रहे पशुओं के दूध के इस्तेमाल से हमेशा खतरे की आशंका बनी रहती है।
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