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अनुच्छेद 370 पर कौन सी राह पकड़े कांग्रेस, हर नेता अलाप रहा अलग सुर

Tue, 13 Aug 2019 09:52 PM IST
Gaurav Pandey डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Tue, 13 Aug 2019 09:52 PM IST
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Does Congress Supports Article 370 in Jammu Kashmir
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

अनुच्छेद 370 को खत्म करने के मोदी सरकार के फैसले पर कांग्रेस पार्टी कौन सी राह पकड़े, यह अभी तक तय नहीं हो पा रहा है। जब इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर से ही नेताओं के अलग-अलग सुर बाहर आने लगे तो कांग्रेस ने मध्यमार्ग पर चलने में देर नहीं लगाई। ज्यादा फजीहत न हो, इसके लिए कांग्रेस ने कहना शुरू कर दिया कि इस अनुच्छेद को हटाने का तरीका असंवैधानिक है। यह फैसला लेने से पहले जम्मू कश्मीर विधानसभा की राय लेनी चाहिए थी।

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इसके बाद भी पार्टी में जिस नेता की जैसी मर्जी, वैसा बयान मीडिया में आ जाता है। उधर भाजपा ने भी कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे पर कांग्रेस से आ रही अलग-अलग आवाजें निराशा, हताशा और उनकी दिशाहीन राजनीति को दिखाती हैं। मंगलवार को कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा, हमारी पार्टी में कश्मीर के विषय पर खुली चर्चा होती है। कोई नेता निजी तौर पर कुछ भी कह सकता है, लेकिन कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) का निर्णय अंतिम माना जाता है।

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जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर कांग्रेस में उठते रहे हैं दो सुर

इस मुद्दे पर शुरू से ही कांग्रेस पार्टी में दो सुर उठते रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का प्रस्ताव जब राज्यसभा में पेश किया तो उसी वक्त से कांग्रेस नेता समर्थन और विरोध में खुलकर सामने आने लगे। यहां तक कि सदन में भी अनुच्छेद 370 पर कांग्रेस ज्यादा मजबूती से अपना पक्ष रखती हुई नजर नहीं आई। कांग्रेस के कई नेताओं ने इस अनुच्छेद को हटाने का समर्थन कर दिया।

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जनार्दन द्विवेदी, हरियाणा के सीएम रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा और महाराष्ट्र से मिलिंद देवड़ा आदि नेता अनुच्छेद 370 को हटाने के समर्थन में बयान देते हुए दिखाई दिए। दीपेंद्र हुड्डा ने तो इस अनुच्छेद को लेकर ट्वीट भी किया। उन्होंने लिखा, 21वीं सदी में इसकी कोई जगह ही नहीं है। हालांकि बाद में उन्होंने अपना यह ट्वीट हटा लिया था। कर्ण सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कहीं न कहीं इसके समर्थन में दिखे।

दूसरी ओर पी चिदंबरम और मणिशंकर अय्यर जैसे नेता अलग राग अलाप रहे थे। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा, कश्मीर में हालात जल्द सामान्य होंगे, लेकिन कुछ लोग यदि कश्मीर में फिलीस्तीन देखते हैं, तो यह उनकी नकारात्मक सोच है। चिदंबरम इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं। चिदंबरम ने सोमवार को आरोप लगाया था कि भाजपा ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा इसलिए खत्म किया, क्योंकि वह मुस्लिम बहुल राज्य है।अगर वह हिंदू बहुल राज्य होता तो राजग सरकार यह फैसला नहीं लेती।

जम्मू-कश्मीर में नाकाबंदी है, विपक्षी दलों के नेताओं को वहां जाने की मिले खुली छूट

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने मंगलवार को कांग्रेस दफ्तर में आयोजित एक प्रेसवार्ता में कहा, मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में नाकाबंदी कर रखी है। इंटरनेट और मोबाइल सेवा बंद हैं। हमें वहां के राज्यपाल की आवभगत नहीं चाहिए। कांग्रेस पार्टी केवल इतना चाहती है कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक विपक्षी दलों के नेताओं को कश्मीर में घूमने की खुली छूट दे दें। वहां पर लोग अपने घरों में बंद हैं। इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरी है कि वहां किसी भी तरह से राजनीतिक संवाद शुरू हो। जो नेता नजरबंद हैं, उन्हें फौरन रिहा किया जाए।

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