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छोटी करेंसी जमा नहीं की तो डॉक्टरों ने किया इलाज बंद, वेंटिलेटर हटाने से मरीज की मौत

ब्यूरो/ अमर उजाला, मऊ/ टूंडला (फीरोजाबाद) Updated Fri, 11 Nov 2016 07:14 AM IST
doctors remove ventilator because of money, patient dead
- फोटो : Demo Pic
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पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट बंद होने और परिवारजनों के छोटी करेंसी का इंतजाम नहीं कर पाने की वजह से मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने मरीज का इलाज बंद कर दिया। आईसीयू में भर्ती मरीज का वेंटिलेटर हटा दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। परिवारीजनों ने हंगामा किया तो मेडिकल कॉलेज कर्मियों ने उन्हें पीटा और पुलिस के हवाले कर दिया। 



घटना बुधवार रात एफएच मेडिकल कॉलेज में हुई। गांव भूत नगरिया निवासी रामवीर (38) तबीयत अचानक खराब हो गई थी और उसे परिवारीजन उपचार के लिए आगरा हाइवे स्थित एफएच मेडिकल कॉलेज ले गए। रामवीर ही हालत देख चिकित्सकों ने उसे आईसीयू में भर्ती कर लिया और वेंटिलेटर लगा दिया। उसके परिवारीजनों से स्टाफ ने 10 हजार रुपये जमा करने को कहा, परिवार ने एटीएम बंद होने का हवाला देते हुए चार हजार रुपये होने की बात कही और कहा कि शेष धनराशि अगले दिन जमा कर देंगे।


बताया जा रहा है कि परिजनों के पास पांच सौ और एक हजार रुपये नोट थे, लेकिन मेडिकल कॉलेज स्टाफ ने उन्हें लेने से इनकार कर दिया। परिवारीजनों का आरोप है कि वे गिड़गिड़ाते रहे लेकिन उनकी कोई बात नहीं सुनी और वेंटिलेटर हटा लेने से रामवीर की मौत हो गई। परिजनों ने हंगामा किया तो स्टाफ और हास्टल से बुलाए गए छात्रों ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया और हाईवे चौकी पुलिस को सौंप दिया। 

टूंडला एफएच मेडिकल कालेज चेयरमैन डॉ.रिहान फारुख ने कहा कि एक मरीज को शराब के नशे में धुत कुछ लोग होकर अस्पताल लाए थे, उपचार के दौरान मरीज की मौत हो गई। मरीज के साथ आए लोगों ने चिकित्सकों के साथ मारपीट कर दी, जिन्हें पुलिस को सौंप दिया गया था।  ग्रामीणों के सभी आरोप निराधार हैं।

बड़े नोट के चक्कर में गई मासूम की जान

पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट मेडिकल स्टोर वाले के न लेने से दवा के अभाव में बृहस्पतिवार को आठ माह के मासूम की मौत हो गई। अस्पताल वालों ने भी बिल के पेमेंट में हजार और पांच सौ के नोट न लेते हुए बच्चे के शव को रोक लिया।

इसके बाद बच्चे के पिता ने जेवरात एक दूकान पर गिरवी रखकर कुछ फुटकर रुपये जुटाए। इसी दौरान घरवालों के हंगामा करने पर जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप पर अस्पताल से मासूम के शव को घरवालों को सुपुर्द कराया।  उधर, अस्पताल प्रशासन ने दवा के अभाव में मौत की बात को गलत बताया है। हलधरपुर थाना क्षेत्र के सिंधवल निवासी शिवहरि गिरी के नाती को आठ नवंबर को निमोनिया हो गया। 

घरवालों ने उसे नगर के चांदमारी इमिलिया स्थित फातिमा अस्पताल में भर्ती कराया। बच्चे को भर्ती कराने के बाद रात में जैसे ही पांच सौ और एक हजार रुपये नोट पर पाबंदी की खबर आई घर के लोग परेशान हो उठे। शिवहरि का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने बड़े नोटों को लेने से इनकार कर दिया। 

काफी प्रयास के बाद कुछ दवाएं तो मिली, लेकिन मासूम के इलाज में फुटकर पैसे को लेकर लगातार दबाव बनाया जाता रहा। इस दौरान उन्हें रिश्तेदारी से लेकर हर जगह कहीं से भी फुटकर पैसों की मदद नहीं मिल सकी। बृहस्पतिवार को आखिरकार बैंक के खुलने से पहले ही मासूम की मौत हो गई।
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