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आप श्री अरविंद कुमार को जानते हैं ? 

Sun, 05 Aug 2018 04:02 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 05 Aug 2018 04:02 PM IST
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do you know mr arvind kumar?

श्री अरविंद कुमार डेढ़ बरस बाद नब्बे के हो जाएँगे। स्वतंत्रता सेनानी के बेटे थे इसलिए सोच में संस्कार बचपन से ही थे। दिल्ली प्रेस में हाथ से कंपोजिंग का काम सीखा लेकिन आज कंप्युटर ने इस प्रणाली को मार डाला है। इसके अलावा छपाई के सारे छोटे मोटे काम भी घोंट लिए। काम करते करते अँगरेज़ी साहित्य में एम ए कर लिया। 

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बासठ साल पहले वे कैरेवान के सहायक संपादक थे। कहीं से रोजेट का थिसारस मिला, थिसारस यानी तिजौरी। इस ग्रंथ ने दिशा बदल दी। हिंदुस्तान को तब पता चला, जब राष्ट्रपति डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा ने उनका हिंदी थिसारस समांतर कोश जारी किया। क़रीब पचपन साल पहले वो मुंबई पहुँचे, फ़िल्म पत्रिका माधुरी के पहले संपादक बने। 
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जब पत्रिका शुरू हुई तो पाठक लोक में ज़बरदस्त हलचल होने लगी, जिन लोगों ने माधुरी देखी और पढ़ी है, उन्हें कुछ बताने की आवश्यकता नहीं। पंद्रह साल माधुरी के संपादन का रिकॉर्ड बनाने के बाद अरविंद कुमार दिल्ली लौटे आपना समांतर कोश का सपना लेकर। कोई दो दशक की हाड़तोड़ मेहनत के बाद १८०० पन्नों का यह कोश सामने आया । इसमें ११०० शीर्षक, २३७५० उप शीर्षक और १६०८५० अभिव्यक्तियाँ हैं । 

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शब्द चलते हैं, शब्द चलाते हैं, शब्द यात्री हैं।

do you know mr arvind kumar?

तब अरविंद जी की उमर छियासठ साल थी। वो कितनीअच्छी बात लिखते हैं - "शब्द चलते हैं, शब्द चलाते हैं, शब्द यात्री हैं, शब्द यायावर हैं, वे विस्मृत हो जाते हैं तो कई बार खो जाते हैं, वे स्वयं बदल जाते हैं या उनका अर्थ। नए विचारों, नई जीवन शैलियों, नए अनुसंधानों और परिवर्तनों के कारण भी नई शब्दावली बनती है। प्रत्येक शताब्दी के साथ एक नई भाषा का जन्म होता है , नए नए शब्दों से हमारा परिचय बढ़ता है- तभी थिसारस आवश्यक होता है", आयु के इसी पड़ाव पर उन्होंने कंप्युटर सीखा। 

आज दुनिया भर में बिखरे करोड़ों हिंदी प्रेमी अरविंद जी को हिंदी के महान साधक के रूप में सम्मान से देखते हैं। उन्हें राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन के स्मृति दिवस पर हिंदी भवन में हिंदी रत्न का सम्मान दिया गया तो लगा- यह सम्मान का सम्मान है। 

सम्मान समारोह में त्रिलोकी नाथ चतुर्वेदी, राजर्षि के पौत्र डॉक्टर अशोक टंडन, जाने माने कवि गोविंद व्यास, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त वन्य प्राणी वृतचित्र निर्माता माइक पांडे, लोकप्रिय कवि लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, रचनाकार ममता किरण, अरविंद जी की बेटी मीतालाल तथा मुझ जैसे अनेक हिंदी प्रेमी उपस्थित थे। 

माइक पांडे इन दिनों अरविंद जी के कृतित्व पर फ़िल्म बना रहे हैं। एक ज़माने में दूरदर्शन के पर्दे को ख़बर पढ़ते हुए गरिमा से भर देने वाली सरला माहेश्वरी ने कार्यक्रम का संचालन किया । 

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