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SC: AI से तैयार फर्जी फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर क्या कहा?

Mon, 02 Mar 2026 09:03 PM IST
Nirmal Kant न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Nirmal Kant Updated Mon, 02 Mar 2026 09:03 PM IST
सार

SC: सुप्रीम कोर्ट ने निचली एआई से तैयार किए गए गैर-मौजूद और फर्जी फैसलों पर अदालत द्वारा भरोसा करने को गंभीर चिंता का विषय बताया है। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ प्रक्रिया की गलती नहीं, बल्कि न्यायिक कदाचार है, जिसका सीधा असर न्यायिक निष्पक्षता पर पड़ता है। पढ़ें रिपोर्ट-

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'Direct bearing on integrity': SC flags trial court's use of AI-generated 'non-existent' judgments
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से तैयार किए गए 'गैर-मौजूद और फर्जी' फैसलों पर निचली अदालत द्वारा भरोसा करने के मामले को गंभीरता से लिया है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि इस तरह का आचरण न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधा असर डालता है और इसे कदाचार माना जा सकता है। कोर्ट एक दीवानी (सिविल) विवाद पर फैसला सुना रहा था। 
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फैसले से ज्यादा चिंता निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर: सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच सुनवाई कर रही थी। इस दौरान बेंच ने कहा, यह संस्थागत स्तर पर गंभीर चिंता का विषय है। बेंच ने स्पष्ट किया कि चिंता फैसले के गुण-दोष को लेकर नहीं, बल्कि निर्ण लेने की प्रक्रिया को लेकर है। 
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आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दाखिल हुई थी एसएलपी
सुप्रीम कोर्ट आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई कर रहा था। फैसले में संपत्ति विवाद से जुड़े एक निषेधाज्ञा मुकदमे में निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा गया था। शीर्ष कोर्ट में याचिकाकर्ता उस मुकदमें प्रतिवादी हैं, जो वादियों की ओर से दायर किया गया है। 
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संपत्ति विवाद में आयुक्त की रिपोर्ट बना विवाद का कारण
मुकदमे के दौरान निचली अदालत ने संपत्ति की स्थिति देखने और दर्ज करने के लिए एक वकील को आयुक्त नियुक्त किया था। याचिकाकर्ताओं ने उस आयुक्त की रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी। लेकिन निचली अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के खई फैसलों का हवाला देते हुए उनकी आपत्तियों को खारिज कर दिया। 

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निचली अदालत ने गैर-मौजूद फैसलों का लिया था सहारा
इसके बाद आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि जिन फैसलों का हवाला निचली अदालत ने दिया है, वे गैर-मौजूद और फर्जी हैं। हाईकोर्ट ने माना कि जिन फैसलों का जिक्र किया गया था, वे एआई से तैयार किए गए थे। हाईकोर्ट ने इस पर चेतावनी भी दी, लेकिन उसने मामले के गुण-दोष के आधार पर सुनवाई करते हुए दीवानी समीक्षा याचिका खारिज कर दी। 

इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक फैसलों में निचली अदालत की ओर से गैर-मौजूद और फर्जी फैसलों पर भरोसा किए जाने पर गंभीर चिंता जताई।  हम इस बात का संज्ञान ले रहे हैं कि निचली अदालत ने एआई से बनाए गैर-मौजूद, फर्जी या बनावटी फैसलों का इस्तेमाल किया। हम इसके नतीजों और जिम्मेदारी की जांच करना चाहते हैं, क्योंकि इससे न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधा असर पड़ता है। 


फर्जी फैसलों पर आधारित निर्णय कदाचार: सुप्रीम कोर्ट
बेंच ने आगे कहा, शुरुआत में ही यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि ऐसे गैर-मौजूद और फर्जी फैसलों पर आधारित निर्णय को महज फैसले की प्रक्रिया की गलती नहीं माना जा सकता। यह कदाचार है और इसके कानूनी परिणाम होंगे। शीर्ष कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए 10 मार्च की तारीख तय की और निर्देश दिया कि एसएलपी के निपटारे तक निचली अदालत नियुक्त वकील आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर आगे कोई कार्यवाही न करेगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा, बेंच ने वरिष्ठ वकील श्याम दीवान को अदालत की मदद के लिए (न्यायमित्र) नियुक्त किया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी। 



 
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