डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म: ड्रोन उड़ाने की अनुमति ऑनलाइन मिलेगी, सिंधिया बोले- बस दो दिन का इंतजार
केंद्र सरकार ने हाल ही में ड्रोन को लेकर नए नियम जारी किए थे, वहीं मेक इन इंडिया के तहत ड्रोन के विनिर्माण पर भी सरकार का जोर है।
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देश में कहीं भी ड्रोन उड़ाने के लिए अब आपको ऑनलाइन माध्यम से अनुमति लेनी होगी। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री सिंधिया ने गुरुवार को इस संबंध में बताया कि अगले दो दिनों में एक डिजिटल प्लेटफाॅर्म पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके तहत देश में ड्रोन उड़ाने के लिए फ्लाई और नो-फ्लाई क्षेत्रों को दर्शाने वाला एक इंटरेक्टिव एयरस्पेस मैप ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा। ड्रोन संचालित करने की अनुमति प्राप्त करने के लिए पेश किए जा रहे इस डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म की मदद से तुरंत मंजूरी/अस्वीकृति दी जा सकेगी।
In next 2 days, an interactive airspace map indicating fly & no-fly areas for drones in the country will be uploaded online. A digital sky platform will be introduced to obtain permission to operate drones, approvals/rejection to be given instantly: Union Civil Aviation Minister pic.twitter.com/cm0hj6KksP
— ANI (@ANI) September 23, 2021विज्ञापन
गांवों के सर्वे के लिए 200 ड्रोन खरीदेगी सरकार
स्वामित्व परियोजना के तहत गांवों के सटीक हवाई सर्वे के लिए केंद्र सरकार 200 ड्रोन खरीदेगी। इनकी मदद से मैदानी एवं घाटी वाले क्षेत्र की मैपिंग की जाएगी। सरकार ने इसकी खरीद के लिए पिछले सप्ताह निविदाएं जारी की थीं। सरकार का लक्ष्य 2024 के अंत तक 6.62 लाख गांवों की मैपिंग करानी है।
भारत के सर्वेक्षण विभाग ग्रामीण इलाकों के लिए एकीकृत संपत्ति सत्यापन समाधान प्रदान कराने के इरादे से पेशेवर ड्रोन खरीदेगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इस खरीद के लिए बोली दस्तावेज जारी किया है जिसमें स्पष्ट किया गया है कि बोली लगाने वाले को 200 ड्रोन की आपूर्ति अधिसूचना के दस हफ्तों के भीतर करनी होगी। साथ ही ड्रोन आयात करने के इच्छुक कंपनियों को नागर विमानन मंत्रालय की दिनांक 12 मार्च की अधिसूचना के दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा।
पीएम नरेंद्र मोदी ने नौ राज्यों में पायलट योजना पूरी होने के बाद 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के मौके पर स्वामित्व परियोजना की शुरुआत की थी। इस परियोजना का यूपी, पंजाब, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में ट्रायल सफल रहा था। इन राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 61077 गांवों की मैपिंग की जा चुकी है।