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दलों का दलदल बना बिहार में यूपीए, आठ पार्टियों के बीच सीटों का बंटवारा चुनौती

Tue, 22 Jan 2019 05:57 AM IST
संदीप भट्ट शरद गुप्ता, अमर उजाला, नई दिल्ली
शरद गुप्ता, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Tue, 22 Jan 2019 05:57 AM IST
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Difficult to split seats between eight parties in Bihar
bihar alliance

उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के हाल ही में एनडीए छोड़ कर यूपीए में शामिल होने से से भाजपा-जद यू-लोक जनशक्ति पार्टी गठबंधन को फर्क पड़ा हो या न पड़ा हो, लेकिन राजद-कांग्रेस पर इसका गहरा असर पड़ा है। अब यूपीए में इतने अधिक दल हो गए हैं कि उनके बीच सीटों का बंटवारा एक अत्यंत दुरूह कार्य बन गया है।

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पहले कांग्रेस और राजद में 10 और 20 सीटें लड़ने पर सहमति थी। लेकिन धीरे-धीरे अन्य दल इस गठबंधन में शामिल होते गए और कारवां इतना बड़ा हो गया कि इसे संभालना खुद लालू प्रसाद यादव के लिए मुश्किल हो गया है। अब इस गठबंधन में कुशवाहा के अलावा जीतन राम मांझी का हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम), मुकेश साहनी की निषाद पार्टी और तीन वाम दल भी शामिल हैं।
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माकपा, भाकपा और भाकपा (माले) - तीनों ने ही दो-दो सीटों पर दावा ठोंका है। लेकिन लालू यादव तीनों को केवल एक-एक सीट ही देने को तैयार हैं। पिछली बार वाम दलों को राजद-कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन में जगह नहीं मिली थी। फिर भी भाकपा उसका गढ़ माना जाने वाले बेगूसराय में लड़ी थी और लगभग दो लाख वोट पाकर तीसरे स्थान पर आई थी। यदि राजद और भाकपा में से एक ही पार्टी लड़ी होती तो 58 हज़ार वोट से जीत दर्ज करने वाली भाजपा बेगूसराय से जीत नहीं पाती।
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इस बार जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार बतौर यूपीए उम्मीदवार बेगूसराय से लड़ना चाहते हैं। उन्होंने काफी पहले से बेगूसराय में डेरा जमाकर प्रचार भी शुरू कर दिया है। लेकिन चूंकि राजद वहां दूसरे नंबर पर थी, इसलिए लालू बेगूसराय से अपना उम्मीदवार लड़ाना चाहते हैं और भाकपा को मोतीहारी (पश्चिमी चंपारण) सीट से लड़ने की पेशकश की है। भाकपा मोतीहारी और बेगूसराय दोनों सीटें मांग रही है।

वहीं, एनडीए छोड़कर यूपीए में शामिल हुए उपेंद्र कुशवाहा चार सीटों से कम लेने को तैयार नहीं हैं। जीतनराम मांझी और मुकेश साहनी का भी दावा दो-दो सीटों पर है। यानी यदि सभी घटक दलों को उनकी मांग के अनुरूप संतुष्ट करना पड़ा तो कांग्रेस और राजद को केवल 26 सीटों पर ही लड़ना होगा। यही वजह है लालू यादव कांग्रेस को केवल आठ सीटें देना चाहते हैं।
 

शक्ति प्रदर्शन के बाद ही बात करेगी कांग्रेस

कांग्रेस कार्यकर्ता इस बीच, तीन फरवरी को कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन मानी जा रही पटना में राहुल गांधी की जनसभा की तैयारी में जुटे हैं। उनका मानना है कि ज्यादा भीड़ जुटाने से उनका दावा ज्यादा सीटों पर बनेगा।

राजद को सभी के मानने का भरोसा

राजद का मानना है कि सब सभी जद आमने-सामने बैठकर बात करेंगे, तो समस्या का हल निकल ही आएगा। एक वरिष्ठ राजद नेता का कहना था कि सभी पार्टियाँ इसबार भाजपा के खिलाफ एकजुट हो रही हैं। कहीं यदि कहीं समस्या आई भी तो केवल एक या दो सीटों पर होगी। इससे ज्यादा पर नहीं।

पिछली बार

2014 के चुनाव में राजद 27 सीटों लड़ी थी और केवल चार जीती थी। कांग्रेस ने 12 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे जिनमें से केवल दो ही जीत दर्ज कर पाए। 

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