क्या राहुल गांधी को पप्पू बताने के लिए सरकार ने उड़ाया उनका मजाक?
- वित्त राज्यमंत्री मंत्री अनुराग ठाकुर ने किया राहुल की समझ पर हमला
- क्या लोकसभा में राहुल गांधी को नीचा दिखाया गया?
- राहुल गांधी ने पूछा 50 बैंक डिफाल्टर्स का नाम और सरकार ने कहा साइट देख लीजिए
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लोकसभा हो या राज्यसभा हर सदस्य का केंद्र सरकार से प्रश्न पूछना संवैधानिक अधिकार होता है। परंपरा के अनुरुप सरकार उसका जवाब देती है। विवरण उपलब्ध न होने पर संबंधित सदस्य को इसे उपलब्ध कराने का आश्वासन या कोई वाजिब कारण बताया जाता है, लेकिन कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ। उल्टा सवाल पूछने वाले राहुल गांधी की समझ पर वित्त राज्यमंत्री ने ही सवाल उठा दिया। कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी इसे राहुल गांधी को नीचा दिखाने, उनका सदन में अपमान और खराब बर्ताव किए जाने से जोड़कर देख रहे हैं। क्या सच में वित्त राज्यमंत्री ठाकुर ने राहुल गांधी की समझ पर सवाल उठाकर उन्हें पप्पू (कम समझ वाला आदमी) साबित करने की कोशिश की?
क्या हुआ सवाल नंबर 305 पूछने पर?
वायनाड से सांसद राहुल गांधी सदन में खड़े हुए उन्होंने भूमिका बनानी शुरू की और अंत में केंद्र सरकार से पूछा कि बैंक के 50 विलफुल डिफाल्टर कौन है? केंद्र सरकार ऐसे 50 डिफाल्टरों के नाम बताए?
उत्तर-केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सदन में मौजूद थी, लेकिन जवाब वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने दिया। अनुराग ठाकुर ने कहा कि सभापति महोदय जिस तरह से खराब दृष्टि से सवाल पूछा गया, मुझे लगता है......(व्यवधान)....कांग्रेस पार्टी के लोकसभा में नेता अधीर रंजन चौधरी ने निर्मला सीतारमण से उत्तर देने की मांग की। लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि यहां सदन में अधिकतर सवालों का जवाब वित्त राज्यमंत्री देते हैं।
...व्यवधान के बाद अनुराग ठाकुर ने जवाब देना आरंभ किया। कहा, सर यह समझना बहुत आवश्यक है कि आखिर क्या हुआ? यह कब हुआ? यह कैसे हुआ?...व्यवधान...वित्तराज्यमंत्री ने कहा कि अगर इतनी भूमिका बांधकर इस बात को कहा गया है तो मुझे लगता है कि इन्हें पता है, कमियां कहां हैं? इसलिए उत्तर सुनना नहीं चाहते। ..व्यवधान... अनुराग ठाकुर ने जवाब देना जारी रखा। उन्होंने बताया कि 2010-14 के दौरान ग्रॉस एडवांस देने और उनमें फ्रॉड का हवाला दिया। बताया कि तब यह अनुपात 0.64 प्रतिशत था। 2018-19 में 0.18 और 2019-20 में 0.08 प्रतिशत पर आया। मोदी सरकार ने देश को एनपीए की जानकारी दी, बैंको का रीकैपिटलाइजेशन किया, बैंक पीसीए फ्रेमवर्क से बाहर भी आए।
प्रश्न खुद लिखा होगा तो.........वेब साइट पर देख लें सूची
वित्तराज्यमंत्री ने कहा कि 25 लाख तक के विलफुल डिफाल्टर की सूची सीआईसी की वेबसाइट पर उपलब्ध है। इसमें छिपाने जैसा कुछ नहीं है। ठाकुर ने कहा कि यदि अपना प्रश्न सदस्य ने खुद लिखा होगा तो इन्हें इसकी जानकारी होगी। उन्होंने सदन को जानकारी दी कि यदि सदस्य चाहते हैं कि वह पढ़कर सुनाएं तो 25 लाख से एक करोड़ रुपये के डिफाल्टर की सूची पढऩे, सदन के पटल पर रखने को तैयार हैं। ...व्यवधान
अपने पापों का ठीकरा दूसरे के सिर
अनुराग ठाकुर ने सवाल का जवाब देते हुए कहा कि कुछ लोग अपने पापों का ठीकरा दूसरे के सिर मढऩा चाहते हैं, लेकिन वह ऐसा नहीं होने देंगे। ....व्यवधान...
वित्तराज्यमंत्री ने इस दौरान अपने सरकार की उपलब्धियां गिनाई। कुछ सांसदों के पेंटिंग का हवाला देने की मांग का जिक्र करते हुए बिना कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का नाम लिए पेंटिंग बेचने, किसको बेचने का जिक्र करते हुए कहा कि वह राजनीति नहीं कर रहे हैं।....
राहुल गांधी की समझ पर उठाया सवाल
वित्त राज्यमंत्री ने कहा कि एक वरिष्ठ सदस्य द्वारा पूरे भारतीय बैंकिंग व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करना दिखाता है कि उनकी नासमझी कितनी है।....व्यवधान...उन्होंने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा यस बैंक संकट को लेकर देश के नागरिकों को भरोसा देने समेत उनके द्वारा उठाए गए अन्य कदमों की जानकारी दी।
अभिषेक मनु सिंघवी ने उठाया सरकार के आचरण पर सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने वित्तराज्यमंत्री के इस तरह से सदन में जवाब देने को कठघरे में खड़ा किया। सिंघवी ने कहा कि इस सवाल पर केन्द्रीय वित्त मंत्री को जवाब देना चाहिए था। सांसद का हक है सवाल पूछना। सिंघवी ने कहा कि राहुल गांधी को उनके सवाल का जवाब नहीं दिया गया और उल्टे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष, सांसद राहुल गांधी को वेबसाइट देखने की सलाह दी गई। सरकार ने राहुल गांधी को ही बहुत हल्के में लिया। सवाल का मजाक उड़ाया गया, सरकार ने जवाब देने से बची। सिंघवी ने कहा जो हो रहा है यह लोकतंत्र के हित में नहीं है। इसके बाद उन्होंने केन्द्र सरकार की आर्थिक, बैंकिंग नीतियों पर हमला बोला।
क्या राहुल गांधी को हूट करके हुई पप्पू बताने की कोशिश?
केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री के उत्तर देने के तरीके से लग रहा है कि वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को निशाने पर ले रहे थे। डेढ़ दशक की राज्यसभा में कार्यवाही देखने के बाद ऐसा अवसर कभी देखने को नहीं मिला। वित्त राज्यमंत्री ने सदन में राहुल गांधी के खुद प्रश्न लिखने पर भी संदेह व्यक्त किया। उन्होंने सवाल का पूछना राहुल गांधी द्वारा यूपीए सरकार का ठीकरा मोदी सरकार पर फोडऩा बताते हुए, सवाल को लेकर उनकी समझ पर सवाल उठाया। मीडिया कर्मियों और अन्य दलों के सांसदों के बीच में सवाल और जवाब के पूरे प्रकरण में राहुल गांधी का मखौल उड़ाने की चर्चा रही।
क्या कहते हैं राहुल गांधी?
अपनी समझ पर भाजपा नेताओं द्वारा सवाल उठाने पर राहुल गांधी ने करीब डेढ़ साल पहले कहा था कि उन्हें जानबूझकर पप्पू(कम समझवाला आदमी) साबित करने की कोशिश भाजपा और संघ परिवार करता है। राहुल गांधी के अनुसार उन्हें पप्पू साबित करने के लिए भाजपा और आरएसएस ने काफी पहले से अभियान चलाया है। विज्ञापन और काफी पैसा खर्च किया है। ताकि राहुल गांधी राजनीति में उभर न सकें।
क्यों हुई लोकसभा में हुआ ऐसा सवाल-जवाब?
भाजपा के एक वरिष्ठ सांसद ने सवाल सुना और मुस्कराकर टाल गए। कांग्रेस के नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। अभिषेक मनु सिंघवी ने सवाल उठाए। लेकिन माना जा रहा है कि मोदी सरकार-एक के समय में कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी की लोकसभा में परफारमेंस को अब भाजपा के नेता टारगेट कर रहे हैं। राहुल गांधी के खड़े होते या कुछ पूछते ही
भाजपा के सांसद टांट कसना शुरू कर देते हैं। इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछली सरकार और 16वी लोकसभा में उन्हें(प्रधानमंत्री)चौकीदार चोर कहने से भी जोड़कर देखा जा रहा है। राहुल गांधी तब चुपचाप विपक्ष की तरफ से सत्ता पक्ष की तरफ गए थे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गले लग गए थे। माना जा रहा है कि राहुल गांधी भविष्य में कांग्रेस अध्यक्ष बन सकते हैं। इसलिए भी भाजपा के नेता उन्हें रणनीति के तहत कम अहमियत दे रहे हैं।