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Taiwan earthquake: भूकंप के बाद भी नहीं पसीज रहा चीन का दिल, अमर उजाला ने जाने वहां के ताजा हालात
सार
ताइवान पर भीषण प्राकृतिक आपदा के बावजूद चीन लगातार अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। सैन्य विशेषज्ञ यह भी अंदेशा जता रहे हैं कि ताइवान में आए इस भूकंप के बाद चीनी लड़ाकू विमानों की लगातार आवाजाही कहीं चीन की कोई चाल तो नहीं है।
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ताइवान में आया भूकंप।
- फोटो : Twitter
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विस्तार
ताइवान में मंगलवार सुबह 07:58 बजे 7.4 तीव्रता का महाशक्तिशाली भूकंप आया, जो ताइवान में इस सदी का दूसरा सबसे बड़ा भूकंप था। इससे पहले इतनी ही तीव्रता का भूकंप 1999 में आया था। इस भूकंप का केंद्र हुलिएन शहर रहा जो तटीय शहर होने के साथ ताइवान के लिए सामरिक तौर पर भी बेहद अहम है, क्योंकि यह ताइवान का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा भी है। वहीं ताइवान पर भीषण प्राकृतिक आपदा के बावजूद चीन लगातार अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। सैन्य विशेषज्ञ यह भी अंदेशा जता रहे हैं कि ताइवान में आए इस भूकंप के बाद चीनी लड़ाकू विमानों की लगातार आवाजाही कहीं चीन की कोई चाल तो नहीं है। ताइवान के ताजा हालात को लेकर अमर उजाला ने बात की वहां की राजधानी ताइपे में अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार आदिल बरार से, जो ताइवान में हो रहीं प्रत्येक गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।
हुलिएन शहर में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
ताइवान में न्यूजवीक के चाइना न्यूज रिपोर्टर आदिल बरार ने बताया कि वे इस समय ताइपे में हैं और बुधवार सुबह 07:58 बजे जब भूकंप आया, तो वे उस वक्त कॉफी बना रहे थे। पांच मिनट उनकी इमारत बुरी तरह हिलती रही। लेकिन फिर सब कुछ नॉर्मल हो गया। उन्होंने वहां के हालात फिलहाल सामान्य हैं। ये ताइवान में पिछले 25 साल में आया सबसे शक्तिशाली भूकंप है। भूकंप से सबसे ज्यादा नुकसान सामरिक रूप से महत्वपूर्ण शहर हुलिएन को हुआ है। भूकंप की तीव्रता को देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा था कि ताइवान को प्राकृतिक आपदा से जानमाल को काफी नुकसान होगा, लेकिन ऊपर वाले ने बचा लिया। हालांकि भूकंप में 9 लोगों की मौत की खबर है और 900 लोग हताहत हुए हैं, लेकिन हुलिएन शहर की कई इमारतों को काफी नुकसान हुआ है और सड़कों में दरारें आ गईं हैं। आदिल ने बताया कि ताइपे में मौजूद दुनिया के सबसे ऊंची इमारत ताइपे 101 को कोई नुकसान नहीं हुआ है, जिसकी ऊंचाई 1667 फीट है और इसमें 101 फ्लोर हैं। आदिल का कहना है कि हुलिएन शहर में अभी रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है, वहां दो भारतीय मूल के दो लोगों के फंसे होने की खबर है।
चट्टानों के खिसकने से हुईं मौतें
आदिल के मुताबिक ताइपे शहर भूकंप में लगभग दो घंटे तक तो अफरातफरी मची रही, लेकिन उसके बाद सब कुछ सामान्य हो गया। रोजमर्रा की तरह लोग दफ्तर गए और कामकाज निपटाया। बाजार भी आम दिनों की तरह खुले रहे। पिछले दो साल से ताइपे में रह रहे आदिल के मुताबिक वहां के लोग जापान से प्रेरित हैं और उन्होंने अपनी इमारतों को इस तरह से डिजाइन किया है कि रिक्टर स्केल पर 7.5 तीव्रता वाला भी भूकंप भी इमारतें आसानी से झेल लें। सरकार ने लंबे समय से भूकंपीय जोखिमों से होने वाले खतरों को पहचानते हुए इसी तरह के कई उपायों में निवेश किया है। सख्त बिल्डिंग कोड का फायदा यह हुआ कि मरने वालों की तादाद काफी कम रही। उन्होंने बताया कि हुलिएन शहर में जितनी भी मौतें हुई हैं, वह चट्टानों के खिसकने से हुई हैं।
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सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी में उत्पादन बहाल
आदिल ने बताया कि भूकंप के बाद ताइवान की सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) में हालात सामान्य हैं। इससे पहले खबरें आ रहीं थीं कि भूंकप से सेमीकंडक्टर निर्माता कंपनियों का कामकाज प्रभावित हुआ है, लेकिन अब वहां उत्पादन बहाल कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि भूकंप आने के बाद सिंचू में टीएसएमसी के संयंत्र के कुछ क्षेत्रों को तुरंत खाली करा लिया गया, लेकिन हालात ठीक होने पर कर्मचारी बाद में अपने काम पर लौट गए। हालांकि, भूकंप से टीएसएमसी के कुछ संयंत्रों के कुछ उपकरण को नुकसान पहुंचा था, जिससे उत्पादन लाइनें बाधित हो गईं। लेकिन मुख्य अल्ट्रावॉयलेट लिथोग्राफी (ईयूवी) मशीनों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
गुरुवार को भी देखे गए चीन के मिलिट्री एयरक्राफ्ट
आदिल ने बताया कि ताइवान दो टेक्टोनिक प्लेटों के जंक्शन के पास स्थित है और आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि हुलिएन शहर के पास यह फाल्ट लाइन है, जिससे इतना भीषण भूकंप आया है। हालांकि इतने शक्तिशाली भूकंप के बावजूद सुनामी ने आने पर वह भी आश्चर्य जताते हैं। वह कहते हैं जापान का ओकिनावा शहर वहीं नजदीक है, जहां सूनामी आने की चेतावनी जारी की गई थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। वहीं उन्होंने कहा कि इतना ताकतवर भूकंप आने के बाद भी चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। गुरुवार सुबह छह बजे भी चीनी सेना के चार मिलिट्री एयरक्राफ्ट ताइपे का चक्कर लगाते रहे, जो चीन के फुजियान प्रांत से उड़ान भरते हैं। वहीं चीनी नौसेना के सात जहाज भी ताइवान के आसपास डेरा डाले हुए हैं।
भूकंप प्रभावित प्रभावित हुलिएन शहर पर चीन की नजर
ताइवान के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसकी सीमा के करीब 30 से ज्यादा चीनी युद्धक विमान और नौ नौसेना के जहाज का पता चला है। भूकंप आने से पहले भी ताइवान के ऊपर चीनी विमानों ने उड़ान भरी थी। ताइवान मामलों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप आने से पहले और बाद में भी सर्वाधिक प्रभावित हुलिएन शहर के आसपास चीन के युद्धक विमानों ने उड़ानें भरी थीं, जो ताइवान के लिए सामरिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस शहर में ताइवानी सेना का एयरबेस भी है, जहां अमेरिका से मिले F-16 विमान रखे हुए हैं। भूकंप आने से पहले ताइपे पर चीन के मुख्य युद्धक विमानों ने चार बार उड़ान भरी थी, वहीं ताइवान के दक्षिण पूर्व तटीय क्षेत्र हुलिएन के आसपास के तटीय इलाके को चीनी नौसेना ने पिछले दो सालों से सर्वाधिक गश्ती क्षेत्र बना रखा है, जहां बुधवार को 9 चीनी नौसेना के जहाज देखे गए। भूकंप से पहले चीनी युद्धक विमानों और ड्रोन ने उस इलाके में 10 से ज्यादा बार उड़ानें भरीं। हालांकि ताइवानी सेना ने चीन की हरकतों के जवाब में वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली भी तैनात कर रखी है।
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हुलिएन शहर में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
ताइवान में न्यूजवीक के चाइना न्यूज रिपोर्टर आदिल बरार ने बताया कि वे इस समय ताइपे में हैं और बुधवार सुबह 07:58 बजे जब भूकंप आया, तो वे उस वक्त कॉफी बना रहे थे। पांच मिनट उनकी इमारत बुरी तरह हिलती रही। लेकिन फिर सब कुछ नॉर्मल हो गया। उन्होंने वहां के हालात फिलहाल सामान्य हैं। ये ताइवान में पिछले 25 साल में आया सबसे शक्तिशाली भूकंप है। भूकंप से सबसे ज्यादा नुकसान सामरिक रूप से महत्वपूर्ण शहर हुलिएन को हुआ है। भूकंप की तीव्रता को देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा था कि ताइवान को प्राकृतिक आपदा से जानमाल को काफी नुकसान होगा, लेकिन ऊपर वाले ने बचा लिया। हालांकि भूकंप में 9 लोगों की मौत की खबर है और 900 लोग हताहत हुए हैं, लेकिन हुलिएन शहर की कई इमारतों को काफी नुकसान हुआ है और सड़कों में दरारें आ गईं हैं। आदिल ने बताया कि ताइपे में मौजूद दुनिया के सबसे ऊंची इमारत ताइपे 101 को कोई नुकसान नहीं हुआ है, जिसकी ऊंचाई 1667 फीट है और इसमें 101 फ्लोर हैं। आदिल का कहना है कि हुलिएन शहर में अभी रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है, वहां दो भारतीय मूल के दो लोगों के फंसे होने की खबर है।
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चट्टानों के खिसकने से हुईं मौतें
आदिल के मुताबिक ताइपे शहर भूकंप में लगभग दो घंटे तक तो अफरातफरी मची रही, लेकिन उसके बाद सब कुछ सामान्य हो गया। रोजमर्रा की तरह लोग दफ्तर गए और कामकाज निपटाया। बाजार भी आम दिनों की तरह खुले रहे। पिछले दो साल से ताइपे में रह रहे आदिल के मुताबिक वहां के लोग जापान से प्रेरित हैं और उन्होंने अपनी इमारतों को इस तरह से डिजाइन किया है कि रिक्टर स्केल पर 7.5 तीव्रता वाला भी भूकंप भी इमारतें आसानी से झेल लें। सरकार ने लंबे समय से भूकंपीय जोखिमों से होने वाले खतरों को पहचानते हुए इसी तरह के कई उपायों में निवेश किया है। सख्त बिल्डिंग कोड का फायदा यह हुआ कि मरने वालों की तादाद काफी कम रही। उन्होंने बताया कि हुलिएन शहर में जितनी भी मौतें हुई हैं, वह चट्टानों के खिसकने से हुई हैं।
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सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी में उत्पादन बहाल
आदिल ने बताया कि भूकंप के बाद ताइवान की सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) में हालात सामान्य हैं। इससे पहले खबरें आ रहीं थीं कि भूंकप से सेमीकंडक्टर निर्माता कंपनियों का कामकाज प्रभावित हुआ है, लेकिन अब वहां उत्पादन बहाल कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि भूकंप आने के बाद सिंचू में टीएसएमसी के संयंत्र के कुछ क्षेत्रों को तुरंत खाली करा लिया गया, लेकिन हालात ठीक होने पर कर्मचारी बाद में अपने काम पर लौट गए। हालांकि, भूकंप से टीएसएमसी के कुछ संयंत्रों के कुछ उपकरण को नुकसान पहुंचा था, जिससे उत्पादन लाइनें बाधित हो गईं। लेकिन मुख्य अल्ट्रावॉयलेट लिथोग्राफी (ईयूवी) मशीनों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
गुरुवार को भी देखे गए चीन के मिलिट्री एयरक्राफ्ट
आदिल ने बताया कि ताइवान दो टेक्टोनिक प्लेटों के जंक्शन के पास स्थित है और आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि हुलिएन शहर के पास यह फाल्ट लाइन है, जिससे इतना भीषण भूकंप आया है। हालांकि इतने शक्तिशाली भूकंप के बावजूद सुनामी ने आने पर वह भी आश्चर्य जताते हैं। वह कहते हैं जापान का ओकिनावा शहर वहीं नजदीक है, जहां सूनामी आने की चेतावनी जारी की गई थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। वहीं उन्होंने कहा कि इतना ताकतवर भूकंप आने के बाद भी चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। गुरुवार सुबह छह बजे भी चीनी सेना के चार मिलिट्री एयरक्राफ्ट ताइपे का चक्कर लगाते रहे, जो चीन के फुजियान प्रांत से उड़ान भरते हैं। वहीं चीनी नौसेना के सात जहाज भी ताइवान के आसपास डेरा डाले हुए हैं।
भूकंप प्रभावित प्रभावित हुलिएन शहर पर चीन की नजर
ताइवान के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसकी सीमा के करीब 30 से ज्यादा चीनी युद्धक विमान और नौ नौसेना के जहाज का पता चला है। भूकंप आने से पहले भी ताइवान के ऊपर चीनी विमानों ने उड़ान भरी थी। ताइवान मामलों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप आने से पहले और बाद में भी सर्वाधिक प्रभावित हुलिएन शहर के आसपास चीन के युद्धक विमानों ने उड़ानें भरी थीं, जो ताइवान के लिए सामरिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस शहर में ताइवानी सेना का एयरबेस भी है, जहां अमेरिका से मिले F-16 विमान रखे हुए हैं। भूकंप आने से पहले ताइपे पर चीन के मुख्य युद्धक विमानों ने चार बार उड़ान भरी थी, वहीं ताइवान के दक्षिण पूर्व तटीय क्षेत्र हुलिएन के आसपास के तटीय इलाके को चीनी नौसेना ने पिछले दो सालों से सर्वाधिक गश्ती क्षेत्र बना रखा है, जहां बुधवार को 9 चीनी नौसेना के जहाज देखे गए। भूकंप से पहले चीनी युद्धक विमानों और ड्रोन ने उस इलाके में 10 से ज्यादा बार उड़ानें भरीं। हालांकि ताइवानी सेना ने चीन की हरकतों के जवाब में वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली भी तैनात कर रखी है।