नोटबंदी सर्जिकल स्ट्राइक नहीं कार्पेट बॉम्बिंग लगता है : सुप्रीम कोर्ट
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500 और 1000 रुपये के नोट को चलन से बाहर करने को लेकर परेशानी झेल रहे लोगों के लिए कोर्ट से कोई राहत भरी खबर नहीं आ रही है। नोटबंदी के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग पीआईएल पर केंद्र सरकार से हलफनामा दायर करने को कहा है।
साथ ही कोर्ट ने केंद्र के फैसले पर हस्तक्षेप करने की बात नकार दी है। कोर्ट ने कहा कि वह कानूनी पहलू देखने के बाद फैसला लेगी। हालांकि कोर्ट ने केंद्र सरकार से ये जरूर पूछा है कि सरकार आम आदमी को हो रही परेशानी कम करने के क्या उपाय कर रही है? कोर्ट ने आदेश दिया कि वह जल्द से जल्द नोटबंदी की वजह से लोगों को हो रही परेशानी कम करने के लिए कदम उठाए।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, ‘नोटबंदी का फैसला सर्जिकल स्ट्राइक जैसा ना प्रतीत होकर लोगों पर बम फोड़ने (कार्पेट बम) जैसा है।’साथ ही बेंच ने कहा कि जिसके पास 500 और 1000 नोट हैं वो हर कोई ब्लैकमनी धारक नहीं हो सकता।
वहीं सुनवाई के दौरान एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने बेंच को बताया कि सरकार ने 10 नवंबर तक बैंकों में 3.25 लाख करोड़ जमा हो चुके हैं और करीब 11 लाख करोड़ और जमा हो सकते हैं। गौरतलब है कि शीर्ष कोर्ट ने यह फैसला उन याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिया जिसमें सरकार द्वारा किए गए नोटबंदी के फैसला को वापस लेने की बात कही गई थी। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी।
नोटबंदी से परेशान हो रही जनता
नोटबंदी पर याचिकाएं वकील विवेक नारायण मिश्रा, संगम लाल पांडेय, एस मुत्थूकुमार और आदिल अल्वी की ओर से दायर की गई हैं। गत सप्ताह दाखिल इन सभी याचिकाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई करने की गुहार की गई थी।
जिसके बाद इन सभी याचिकाओं को मंगलवार को एक साथ सुनवाई करने का निर्णय लिया गया। इन याचिकाओं में कहा गया है कि अचानक लिए गए इस फैसले से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। शादियों के मौसम सरकार के इस फैसले से लोगों को बहुत परेशान हो रही है।
परिवार वालों की परेशानी यह है कि आखिर वे शादी सामारोह को कैसे अंजाम दें। साथ ही अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए सरकार का यह आदेश उनके लिए जीवन-मृत्यु का सवाल खड़ा हो गया है। साथ ही यह किसानों के लिए कमाई का वक्त है। इस फैसले से उनकी कमाई पर असर पड़ रहा है।