केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में उठी पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाली की मांग, एक जुलाई से शुरू होगा अभियान
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह बताते हैं कि केंद्र सरकार अर्धसेनिक बलों के प्रति भेदभाव व सौतेले व्यवहार की नीति अपना रही है। इसे लेकर विभिन्न बलों के 20 लाख परिवारों में भारी रोष एवं बैचेनी है...
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में अब सेना की तर्ज पर पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग उठने लगी है। कंफेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन की तरफ से इसे लेकर एक जुलाई से ट्विटर पर अभियान शुरू किया जा रहा है। इसमें दस लाख अर्धसैनिक बलों के कर्मी और उनके परिजन हिस्सा लेंगे।
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह बताते हैं कि केंद्र सरकार अर्धसेनिक बलों के प्रति भेदभाव व सौतेले व्यवहार की नीति अपना रही है। इसे लेकर विभिन्न बलों के 20 लाख परिवारों में भारी रोष एवं बैचेनी व्याप्त है।
इनकी मांगों में पुरानी पेंशन बहाली, वन रैंक वन पेंशन व ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप 'ए' सर्विस का दर्जा, आदि बातें शामिल है।
रणबीर सिंह का कहना है कि उन्होंने समस्त देशवासियों से इस ट्विटर अभियान से जुड़ने की अपील की है। एसोसिएशन अपनी इन मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रही है। पिछले सात वर्षों से जंतर-मंतर, राजघाट, संसद मार्ग व देश के अन्य हिस्सों में शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किए गए हैं।
प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को सैकड़ों बार ज्ञापन दिए गए, लेकिन परिणाम जीरो रहा। कोरोना महामारी के चलते प्रशासन द्वारा शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी गई, इसलिए ट्विटर के माध्यम से सरकार तक आवाज पहुंचाने का निर्णय लेना पड़ा।
एसोसिएशन तकरीबन 20 लाख अर्धसैनिक परिवारों का प्रतिनिधित्व करती है। दुख की बात कि किसी आईपीएस डीजी ने जनवरी 2004 में न्यू पेंशन स्कीम लागू करने का विरोध नहीं किया।
आज के परिप्रेक्ष्य में सरहदों पर तनातनी के चलते जवान मोर्चा संभाले हुए हैं और दूसरी तरफ सुरक्षा बलों के जवान कोविड महामारी में आम जनता के लिए बेहद मददगार साबित हो रहे हैं।
आए दिन पैरामिलिट्री फोर्स के जवान कश्मीर में शहीद हो रहे हैं। संसद से लेकर सड़क तक अर्धसैनिक बलों के जवान देश की चाक-चौबंद चौंकीदारी कर रहे हैं तो ऐसे में जवानों को पुरानी पैंशन व वन रैंक वन पेंशन से वंचित करना एक गंभीर चिंतनीय विषय है।
यदि कोई व्यक्ति कुछ दिन सांसद बन जाता है, तो उसे आजीवन पेंशन मिलती है, मगर दूसरी तरफ वे जवान जो अपने देश के लिए महत्वपूर्ण चालीस साल दे रहे हैं, उसकी पेंशन बंद कर दी जाती है।
सुविधाओं के नाम पर सरहद के चौकीदारों के साथ छलावा किया जा रहा है।
एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष वीएस कदम ने विधायकों, सांसदों, खिलाड़ियों, फिल्मी हस्तियों व पैरामिलिट्री फोर्स के करोड़ों भारतीय प्रशंसकों से अपील की है कि वे एक जुलाई को ट्विटर अभियान में शामिल होकर सरहदों के वास्तविक चौकीदारों की पुरानी पैंशन बहाली, वन रैंक वन पेंशन व ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप 'ए' सर्विस के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद करें।