दिल्ली में हिंसा थामने गृह मंत्री अमित शाह की जगह एनएसए अजित डोभाल क्यों उतरे सड़कों पर?
- 25 फरवरी को देर रात दिल्ली की सड़कों पर उतरे थे एनएसए अजीत डोभाल
- राष्ट्रपति ट्रंप को विदा करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के हालात पर ध्यान दिया
- खुफिया एजेंसियों ने किया था शाह को हिंसा प्रभावित इलाकों में जाने से मना
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25 फरवरी को देर रात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने दिल्ली की सड़कों पर उतरकर जायजा लिया। 26 फरवरी को वह फिर दिल्ली के हिंसा प्रभावित क्षेत्र में गए, लेकिन गृहमंत्री अमित शाह कहीं नहीं दिखे। आखिर क्यों? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से नाराज हैं?
सड़क पर उतरे एनएसए डोभाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को करीब से जानने वाले सूत्रों का कहना है कि यह संभव ही नहीं है। बताते हैं सांप्रदायिक हिंसा की खबरों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तकलीफ जरूर हुई, लेकिन उनका और अमित शाह का संबंध काफी गहरा है। दोनों एक दूसरे को बखूबी समझते हैं।
गृह मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ जब प्रधानमंत्री हैदराबाद हाऊस में द्विपक्षीय वार्ता कर रहे थे, तब केंद्रीय गृहमंत्री दिल्ली के हालात पर बैठक कर रहे थे। राष्ट्रपति ट्रंप को विदा करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के हालात पर ध्यान दिया।
देर रात तक बैठक की और इसके बाद प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की मंत्रणा के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को दिल्ली के हालात पर काबू पाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
अजीत डोभाल ही उपयुक्त थे
दिल्ली में हिंसा पर नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ही उपयुक्त थे। एक वरिष्ठ राजनीतिक सूत्र के अनुसार डोभाल को दिल्ली में उतारकर केंद्र सरकार ने संदेश दिया था। दरअसल तब तक दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने भी कोई सार्वजनिक पहल नहीं की थी।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दिल्ली में लोगों के बीच में जाने के पक्ष में नहीं थे। सुरक्षा एजेंसियों ने अमित शाह के दिल्ली में सार्वजनिक तौर उतरने और हिंसा न करने की अपील के पक्ष में सकारात्मक राय नहीं दी थी। इतना ही नहीं दोनों गृह राज्य मंत्री के उतरने पर भी स्थिति में किसी तरह के बदलाव की संभावना नहीं थी।
लिहाजा केंद्र सरकार के पास सबसे उपयुक्त चेहरा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ही थे।
दिल्ली में हिंसा थामने क्यों नहीं उतरे अमित शाह?
उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसके दो बड़े कारण थे। पहला कारण यह था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली की हिंसा से प्रभावित सड़क पर उतरकर अपनी राजनीतिक छवि से कोई समझौता करने के पक्ष में नहीं थे। अमित शाह की छवि एक हार्ड लाइनर हिंदू नेता की छवि है।
वह हिंसा प्रभावित क्षेत्र में उतरकर दोनों संप्रदायों के घाव पर मलहम लगाने वाली भाषा (धर्म निरपेक्ष) बोलकर लोगों को सांत्वना नहीं देना चाहते थे। बताते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अमित शाह की इस मंशा को भलीभांति समझते हैं। वहीं सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के अफसरों की राय भी अमित शाह के दिल्ली की सड़कों पर उतरने के पक्ष में नहीं थी।
बताते हैं यही कारण रहा कि दिल्ली में सुरक्षा, सांत्वना, सद्भाव और सौहार्द का संदेश देने के लिए अजीत डोभाल को उतारा गया। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिया। डोभाल इससे पहले जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 लगने के बाद महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
बताते हैं दिल्ली दौरे से लौटने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को हालात से अवगत कराया।
मंगलवार को दिखेगी केमिस्ट्री
मंगलवार को संसद भवन के पुस्तकालय भवन में भाजपा संसदीय दल की बैठक है। यह बैठक सुबह साढ़े नौ बजे सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होनी है। तीन मार्च को अवकाश के बाद शुरू हुए बजट सत्र के दूसरे दिन यह बैठक हो रही है।
समझा जा रहा है कि इसमें दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा पर भी चर्चा होगी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की केमिस्ट्री साफ दिखाई देगी।