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कांग्रेस के 'शून्य' पर अपने कर रहे सवाल, ज्योतिरादित्य बोले-सोच और रणनीति बदलनी होगी 

Thu, 13 Feb 2020 05:26 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित कुमार Updated Thu, 13 Feb 2020 05:26 PM IST
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Delhi Result: Congress leader Jyotiraditya Scindia raising question on work culture,
Jyotiraditya scindia - फोटो : pti

दिल्ली विधानसभा चुनावों में फिर से एक भी सीट हासिल नहीं करने वाली कांग्रेस पर अब अपने ही सवाल उठाने लगे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी को बदलना होगा। 

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सिंधिया ने कहा, 'हमारी पार्टी के लिए यह बहुत ही निराशाजनक है। नई विचारधारा और नई कार्यप्रणाली की आपात जरूरत है। देश बदल गया है, इसलिए हमें भी नए तरीके से सोचना होगा और देश के लोगों से संपर्क करना होगा।' 

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गौरतलब हो कि उनसे पहले हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दिल्ली चुनाव में कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको पर सवाल खड़े किए थे। दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी के अंदर की कलह खुलकर सामने आने लगी। 

मंगलवार को नतीजे आने के बाद प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद बुधवार दोपहर कांग्रेस के दिल्ली प्रदेश प्रभारी पीसी चाको ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष शर्मिष्ठा मुखर्जी ने चिदंबरम के बयान पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी को बंद करने की सलाह दे डाली।

सिब्बल बोले- चेहरे की थी कमी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा था कि कांग्रेस के पास दिल्ली में प्रोजेक्ट करने के लिए चेहरे की कमी थी। यह पार्टी का अंदरूनी मुद्दा है। हम इस पर गौर करेंगे और इसका जल्द से जल्द समाधान करेंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बयान पर आगे कहा था कि दिल्ली ने भाजपा को जबरदस्त झटका दिया है और उनकी हार अब नहीं रुकेगी।

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने चिदंबरम से पूछा- केजरीवाल की जीत पर गर्व क्यों कर रहे हैं?


आम आदमी पार्टी (आप) की जीत को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम द्वारा विपक्ष का हौसला बढ़ाने वाला परिणाम करार दिए जाने पर उनकी ही पार्टी की नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि अगर कांग्रेस ने भाजपा को पराजित करने का काम क्षेत्रीय दलों को आउटसोर्स कर दिया है तो प्रदेश कांग्रेस कमेटियों (पीसीसी) को अपनी दुकान बंद कर देना चाहिए।

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली महिला कांग्रेस की प्रमुख शर्मिष्ठा ने चिदंबरम के एक ट्वीट को रिट्वीट करते हुए कहा था कि सर, पूरे सम्मान के साथ कहना चाहती हूं कि क्या कांग्रेस ने भाजपा को पराजित करने के लिए प्रादेशिक स्तर के दलों को आउटसोर्स कर रखा है? अगर ऐसा नहीं है तो हम अपनी करारी शिकस्त के बारे में चिंता करने की बजाय आम आदमी पार्टी की जीत पर खुशी क्यों मना रहे हैं? और अगर यह ‘हां’ है तो फिर हमें (पीसीसी) दुकान बंद कर देनी चाहिए। 

दरअसल, चिदंबरम ने ट्वीट किया था, ‘अगर मतदाता उन राज्यों के विचारों का प्रतिनिधित्व करते हैं जहां से वे आए थे, तो दिल्ली का मत विपक्ष का यह विश्वास बढ़ाने वाला है कि भाजपा को हर राज्य में हराया जा सकता है। दिल्ली का वोट राज्य विशेष के वोट की तुलना में अखिल भारतीय वोट है क्योंकि दिल्ली एक मिनी इंडिया है।’

कोरोनावायरस की तरह त्रासदी के समान है दिल्ली में कांग्रेस की हार: जयराम रमेश

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जयराम रमेश ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार की तुलना कोरोना वायरस की तरह त्रासदी से करते हुए कहा है कि पार्टी को गंभीरता से अपनी समीक्षा करनी चाहिए।

अगर ऐसा नहीं किया गया तो पार्टी के अप्रासंगिक होने की संभावना के लिए तैयार रहना चाहिए। रमेश की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली ने भी पार्टी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘‘सर्जिकल’’ कार्रवाई का आह्वान किया है।

रमेश ने कहा कि कांग्रेसी नेताओं को अपना पुनरवालोकन करना होगा। कांग्रेस को यदि प्रासंगिक होना है तो उसे स्वयं का पुनरवालोकन करना होगा। अन्यथा, हम अप्रासंगिकता की ओर बढ़ रहे हैं। हमें अहंकार छोड़ना होगा, छह साल से सत्ता से दूर होने के बावजूद हममें से कई लोग कई बार ऐसे बर्ताव करते हैं जैसे हम अब भी मंत्री हैं।

 रमेश का मानना है कि कांग्रेस को दोबारा से मजबूत करने के लिए स्थानीय नेताओं को प्रोत्साहन देना होगा और आगे बढ़ाना होगा। रमेश ने कहा कि स्थानीय नेताओं को स्वतंत्रता और स्वायत्तता दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमारे नेतृत्व के स्वभाव और शैली को बदलना होगा। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली के चुनाव परिणाम ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह की शैली वाली राजनीति को खारिज किया है। चुनाव परिणाम उनके मुंह पर करारा तमाचा है और इसने प्रचार अभियान में इस्तेमाल की गई भाषा तथा तरकीबों को खारिज कर दिया।

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