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रक्षा तैयारी: दुर्गा-2 के प्रहार से होगा ड्रोन हमलों का मुकाबला, डीआरडीओ तैयार कर रहा है कवच

Mon, 28 Jun 2021 10:28 PM IST
सुरेंद्र जोशी शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 28 Jun 2021 10:28 PM IST
सार

चुनौतियों से निपटने में भारत कभी पीछे नहीं रहा है। देश की सेना व रक्षा वैज्ञानिकों ने विश्व स्तरीय संसाधनों का विकास किया है। दुर्गा-2 पलक झपकते ही ड्रोन का खात्मा कर देगा।
 

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Defense preparedness: Drone attacks will be countered by Durga-2 attack, DRDO is preparing armor
Symbolic Image

विस्तार

आतंकी हों या देश के दुश्मन, उनके किसी हमले से क्या घबराना? भारत के रक्षा वैज्ञानिक हर चुनौती और खतरे को समझकर अनुसंधान में लगे हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक भी दुर्गा-2 की परियोजना में व्यस्त हैं। जल्द ही इसके ऑपरेशनल हो जाने की उम्मीद है। 
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रक्षा वैज्ञानिक बताते हैं कि दुर्गा-2 के ऑपरेशनल होने के बाद भारत किसी भी ड्रोन को पलक झपकते ही न केवल खोज लेगा, बल्कि मार गिराएगा। बताते हैं कि देश में प्रधानमंत्री और अन्य विशिष्ट वीआईपी को भी बहुत छोटे आकार के ड्रोन जैसे हमलों से बचाने की क्षमता भी विकसित की जा रही है।
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विशिष्ट व्यक्तियों को ड्रोन से बचाने की क्षमता पहले से 
सूत्रों के मुताबिक देश के विशिष्ट व्यक्तियों को ड्रोन या कम ऊंचाई से उड़ने वाली ऑब्जेक्ट से बचाने की क्षमता तो सुरक्षा बलों के पास है, लेकिन आने वाले समय में और मजबूत बनाए जाने की योजना है। विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए माइक्रोवेव या एक्स-रे तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। 
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काली परियोजना पर चल रहा काम, विकिरण से होगा सफाया
भारतीय वैज्ञानिक काली परियोजना पर भी काम कर रहे हैं। इस परियोजना पर भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र और डीआरडीओ के वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। यह एक एनर्जी वीपेन सिस्टम होगा जो माइक्रोवेव, एक्स-रे आदि जैसी विकिरणों के माध्यम से दुश्मन के लो फ्लाइंग ऑब्जेक्ट को पलक झपकते ही नष्ट कर देगा।

दुर्गा-2 के वार से ध्वस्त होंगे दुश्मन के ड्रोन
सीमा पार की गुस्ताख हरकतों को लेकर देश के वैज्ञानिक भी सतर्क हैं और उन्हें नेस्तनाबूद करने की प्रणाली विकसित की जा रही है। दुर्गा-2 परियोजना देश की एक विशिष्ट, गोपनीय योजना है। इसलिए इसके बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं मिल सकी है। 

ऐसा करेगी प्रहार
लेकिन सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह लेजर तकनीक पर आधारित तंत्र होगा। 100 किलोवॉट की क्षमता वाली इस प्रणाली से लेजर बीम के जरिए किसी भी ड्रोन जैसे ऑब्जेक्ट को डेढ़ से दो किमी की ऊंचाई पर हवा में ही नष्ट किया जा सकेगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार दुर्गा-2 में दुश्मन के ड्रोन को खोजने, उसे पहचानने तथा लक्ष्य पर लेकर उसे कई हिस्सों में भेदने की भी क्षमता होगी। यह प्रणाली एक बार में कई लक्ष्यों को पहचान और उसे लेजर उर्जा के सहारे नष्ट कर सकेगी।


हर चुनौती का वैज्ञानिकों के पास जवाब
प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति की सुरक्षा, 15 अगस्त तथा 26 जनवरी जैसे समारोहों की सुरक्षा को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियां काफी गंभीर हैं। माना जा रहा है कि इसके लिए लेजर आधारित हथियारों की तकनीक अपनाई जा सकती है। हालांकि अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि यह तकनीक और सुरक्षा प्रणाली पूरी तरह से देशी होगी या फिर इसे किसी सहयोगी देश की सहायता से तैयार किया जा रहा है। लेकिन इतना तय है कि इस तकनीक में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की सहायता ली जाएगी।  
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