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जज लोया का मामला गंभीर, सभी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच के बाद लिया जाएगा निर्णय: सुप्रीम कोर्ट
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 22 Jan 2018 07:13 PM IST
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विशेष सीबीआई जज की मौत के मामले को गंभीर बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में तमाम दस्तावेजों की निष्पक्ष तरीकेसे परीक्षण करने केबाद यह तय करेगा कि जांच कराई जानी चाहिए या नहीं? इसकेसाथ ही बांबे हाईकोर्ट में दायर इसी तरह की दो याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया है।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को कहा कि अगर जिला न्यायालय के जज की मौत हुई और कई मीडिया रिपोर्ट को देखते हुए हमारे लिए इस मामले का परीक्षण करना जरूरी है।
लेकिन सिर्फ मीडिया रिपोर्ट केआधार पर हम किसी निष्कर्ष नहीं पहुंच सकते। पीठ ने कहा कि हमें इस पूरे मामले से संबंधित दस्तावेजों और रिकार्ड पर निष्पक्षता से गौर करना होगा। पीठ ने यह भरोसा दिलाया कि बहुत ही बारीकी और निष्पक्षता से इस मामले को गौर किया जाएगा। पीठ ने सभी पक्षकारों को इस मामले से संबंधित उनकेपास मौजूद तमाम दस्तावेज मुहैया कराने के लिए कहा है।
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मालूम हो कि शीर्ष अदालत कांग्रस नेता तहसीन पूनावाला और महाराष्ट्र केएक पत्रकार बीएस लोने की ओर से दायर जनहित याचिकाओं सुनवाई कर रही है। याचिकाओं में जज लोया की मौत की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने की गुहार की गई है।
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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को कहा कि अगर जिला न्यायालय के जज की मौत हुई और कई मीडिया रिपोर्ट को देखते हुए हमारे लिए इस मामले का परीक्षण करना जरूरी है।
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लेकिन सिर्फ मीडिया रिपोर्ट केआधार पर हम किसी निष्कर्ष नहीं पहुंच सकते। पीठ ने कहा कि हमें इस पूरे मामले से संबंधित दस्तावेजों और रिकार्ड पर निष्पक्षता से गौर करना होगा। पीठ ने यह भरोसा दिलाया कि बहुत ही बारीकी और निष्पक्षता से इस मामले को गौर किया जाएगा। पीठ ने सभी पक्षकारों को इस मामले से संबंधित उनकेपास मौजूद तमाम दस्तावेज मुहैया कराने के लिए कहा है।
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मालूम हो कि शीर्ष अदालत कांग्रस नेता तहसीन पूनावाला और महाराष्ट्र केएक पत्रकार बीएस लोने की ओर से दायर जनहित याचिकाओं सुनवाई कर रही है। याचिकाओं में जज लोया की मौत की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने की गुहार की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में ही होगी सुनवाई
साथ ही पीठ ने बांबे हाईकोर्ट के दायर इसी तरह की दो याचिकाओं को ट्रांसफर करने का निर्देश दिया। अब इन तमाम याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में ही सुनवाई होगी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि कोई भी हाईकोर्ट इससे संबंधित मामले की सुनवाई न करें।
सोमवार को सुनवाई शुरू होते ही महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी ने सीलबंद जांच रिपोर्ट पीठ को सौंपी। हरीश साल्वे ने पीठ से कहा जज लोया की मौत केबाद मीडिया रिपोर्ट के बाद जांच कराई गई थी कि किन परिस्थितियों में उनकी मौत हुई।
रिपोर्ट पढ़ते हुए साल्वे ने कहा कि जब लोया ने सीने में दर्द की शिकायत की तो चार न्यायिक अधिकारी जज लोया को लेकर कार से अस्पताल ले गए थे। साल्वे ने बताया कि जांच रिपोर्ट गत वर्ष 23 नवंबर को बांबे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट स्पष्ट है लेकिन सुप्रीम कोर्ट को उचित निर्देश देने का पूरा अधिकार है।
इस दौरान मुंबई के वकीलों के एक समूह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने आरोप लगाया कि इस मामले को तथ्यों को छुपाने की कोशिश की जा रही है। दवे और इंदिरा जयसिंह ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार की रिपोर्ट पूरी नहीं है।
जवाब में रोहतगी ने कहा कि यह नहीं कहा जाना चाहिए कि पूरी रिपोर्ट नहीं है। इस पर दवे ने कहा कि हमनें आरटीआई केतहत जानकारी जुटाई है। इस पर पीठ ने सभी पक्षकारों को तमाम दस्तावेज इकट्ठा कर उपलब्ध कराने केलिए कहा है।
सोमवार को सुनवाई शुरू होते ही महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी ने सीलबंद जांच रिपोर्ट पीठ को सौंपी। हरीश साल्वे ने पीठ से कहा जज लोया की मौत केबाद मीडिया रिपोर्ट के बाद जांच कराई गई थी कि किन परिस्थितियों में उनकी मौत हुई।
रिपोर्ट पढ़ते हुए साल्वे ने कहा कि जब लोया ने सीने में दर्द की शिकायत की तो चार न्यायिक अधिकारी जज लोया को लेकर कार से अस्पताल ले गए थे। साल्वे ने बताया कि जांच रिपोर्ट गत वर्ष 23 नवंबर को बांबे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट स्पष्ट है लेकिन सुप्रीम कोर्ट को उचित निर्देश देने का पूरा अधिकार है।
इस दौरान मुंबई के वकीलों के एक समूह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने आरोप लगाया कि इस मामले को तथ्यों को छुपाने की कोशिश की जा रही है। दवे और इंदिरा जयसिंह ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार की रिपोर्ट पूरी नहीं है।
जवाब में रोहतगी ने कहा कि यह नहीं कहा जाना चाहिए कि पूरी रिपोर्ट नहीं है। इस पर दवे ने कहा कि हमनें आरटीआई केतहत जानकारी जुटाई है। इस पर पीठ ने सभी पक्षकारों को तमाम दस्तावेज इकट्ठा कर उपलब्ध कराने केलिए कहा है।
उछला अमित शाह का नाम, साल्वे के पेश होने पर जताई आपत्ति
दुष्यंत दवे ने आरोप लगाया कि हरीश साल्वे पूर्व में सोहराबुद्दीन मामले में आरोपी अमित शाह की ओर से पेश हो चुके हैं और अब दोनों महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश हो रहे हैं। जवाब में साल्वे ने कहा कि जज लोया की मौत को कुछ लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। पीठ केसदस्य न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने मामले को शांत करते हुए कहा कि कौन किसके लिए पेश होगा, इस पर हम कुछ नहीं कर सकते।
उछला अमित शाह का नाम
वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने सुनवाई केदौरान कहा कि चूंकि इस मामले में प्रभावशाली व्यक्ति अमित शाह है। इसलिए लीतापोती की कोशिश की जा रही है। पहले तो दवे सिर्फ प्रभावशाली व्यक्ति से संबोधित कर रहे थे लेकिन बाद में उन्होंने अमित शाह का नाम ले ही लिया। इस पर साल्वे ने आपत्ति कड़ी आपत्ति जताई। इस पर पीठ ने कहा कि आज की तारीख में जज लोया की मौत स्वाभाविक है। ऐसे में वैसे किसी व्यक्ति का नाम नहीं उछाला जाना चाहिए जो पक्षकार नहीं है।
उछला अमित शाह का नाम
वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने सुनवाई केदौरान कहा कि चूंकि इस मामले में प्रभावशाली व्यक्ति अमित शाह है। इसलिए लीतापोती की कोशिश की जा रही है। पहले तो दवे सिर्फ प्रभावशाली व्यक्ति से संबोधित कर रहे थे लेकिन बाद में उन्होंने अमित शाह का नाम ले ही लिया। इस पर साल्वे ने आपत्ति कड़ी आपत्ति जताई। इस पर पीठ ने कहा कि आज की तारीख में जज लोया की मौत स्वाभाविक है। ऐसे में वैसे किसी व्यक्ति का नाम नहीं उछाला जाना चाहिए जो पक्षकार नहीं है।