{"_id":"583e07514f1c1b2d1ede6621","slug":"debt-ridden-farmer-commits-suicide-in-uttar-pradesh","type":"story","status":"publish","title_hn":"आजमगढ़ में कर्ज के बोझ से दबे किसान ने फांसी लगाकर दी जान","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
आजमगढ़ में कर्ज के बोझ से दबे किसान ने फांसी लगाकर दी जान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Nov 2016 04:27 AM IST
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- फोटो : social media
यूपी में आजमगढ़ के गंभीरपुर थाना क्षेत्र में कर्ज से परेशान एक किसान ने फांसी लगाकर जान दे दी। उसकी लाश मंगलवार की दोपहर गांव के एक इंटर कॉलेज के पीछे बबूल के पेड़ से लटकती मिली। शव देख कॉलेज की छात्राओं ने शोर किया, तो गांव के लोगों को इसकी जानकारी हुई।
मईखरगपुर गांव निवासी रामयश यादव (45) चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था। उसके चार बच्चे हैं। रामयश घर पर रहकर खेतीबारी करता था। मंगलवार की सुबह जब वह घर से निकला था, तो परिवार के लोगों ने समझा कि वह कहीं गया होगा।
दिन में करीब 11 बजे स्कूल की छात्राएं गांव में स्थित इंटर कॉलेज के पीछे पोखरे के टीले की तरफ गईं तो उनकी नजर बबूल के पेड़ पर लटकती रामयश की लाश पर पड़ी। छात्राओं ने शोर मचाया तो लोगों को इसकी जानकारी हुई। पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजवा दिया।
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रामयश के बेटे प्रदीप ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई और खेती के लिए उनके पिता ने गांव के कई लोगों से उधार लिया था, लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से उधार नहीं चुका पा रहे थे। इसलिए आए दिन तगादा करने वाले घर पहुंच रहे थे। भाई-बहनों की पढ़ाई के लिए वह एक लाख रुपये से अधिक कर्ज ले चुके थे। उसने दावा किया कि आर्थिक तंगी के चलते ही उन्होंने यह कदम उठाया है।
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मईखरगपुर गांव निवासी रामयश यादव (45) चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था। उसके चार बच्चे हैं। रामयश घर पर रहकर खेतीबारी करता था। मंगलवार की सुबह जब वह घर से निकला था, तो परिवार के लोगों ने समझा कि वह कहीं गया होगा।
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दिन में करीब 11 बजे स्कूल की छात्राएं गांव में स्थित इंटर कॉलेज के पीछे पोखरे के टीले की तरफ गईं तो उनकी नजर बबूल के पेड़ पर लटकती रामयश की लाश पर पड़ी। छात्राओं ने शोर मचाया तो लोगों को इसकी जानकारी हुई। पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजवा दिया।
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रामयश के बेटे प्रदीप ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई और खेती के लिए उनके पिता ने गांव के कई लोगों से उधार लिया था, लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से उधार नहीं चुका पा रहे थे। इसलिए आए दिन तगादा करने वाले घर पहुंच रहे थे। भाई-बहनों की पढ़ाई के लिए वह एक लाख रुपये से अधिक कर्ज ले चुके थे। उसने दावा किया कि आर्थिक तंगी के चलते ही उन्होंने यह कदम उठाया है।