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Supreme Court: असम में परिसीमन प्रस्ताव के मसौदे का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, AIUDF ने दायर की याचिका

Sun, 16 Jul 2023 03:16 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Sun, 16 Jul 2023 03:16 PM IST
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Assam delimitation exercise: AIUDF moves SC against draft proposal
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

असम में विपक्षी दल ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव के मसौदे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। एआईयूडीएफ ने राज्य विधानसभा और लोकसभा के निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से संबंधित प्रस्ताव के मसौदे का विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

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एआईयूडीएफ के संगठन महासचिव और विधायक अमीनुल इस्लाम ने बताया कि 2008 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दौरान संबद्ध अधिनियमों में संशोधनों के कारण परिसीमन आयोग के बजाय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को इस कवायद की जिम्मेदारी दी गई। हमने आयोग को यह शक्ति प्रदान करने से संबंधित संशोधनों को चुनौती दी है। 
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बिहार में भाजपा नेता की मौत का मामला भी शीर्ष कोर्ट पहुंचा
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ 13 जुलाई को मार्च के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक नेता की मौत का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें या तो शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करने या जांच के लिए सीबीआई को निर्देश देने की मांग की गई है। बता दें कि बिहार के जहानाबाद जिले के पार्टी नेता विजय सिंह की "विधानसभा मार्च" में भाग लेने के दौरान मृत्यु हो गई थी।
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भाजपा नेताओं ने दावा किया था कि पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज में उनकी मृत्यु हो गई थी, जबकि पटना जिला प्रशासन ने एक संक्षिप्त बयान जारी कर कहा था कि उनके शरीर पर "कोई चोट के निशान नहीं" पाए गए थे। राज्य सरकार की शिक्षक भर्ती नीति के खिलाफ आंदोलन के समर्थन में भाजपा द्वारा आयोजित "विधानसभा मार्च" पटना के गांधी मैदान से शुरू हुआ था और विधानसभा परिसर से कुछ किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया था।

भूपेश नारायण ने दायर की है याचिका
सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका बिहार निवासी भूपेश नारायण ने दायर की है। याचिका में कथित तौर पर भाजपा द्वारा आयोजित शांतिपूर्ण जुलूस के दौरान 13 जुलाई की घटना के वास्तविक अपराधियों को बचाने में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और बिहार के पुलिस महानिदेशक सहित अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की मांग की गई है। वकील बरुण कुमार सिन्हा द्वारा दायर याचिका में कहा गया है, कानून के शासन को बनाए रखना और कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का संवैधानिक दायित्व है। लोकतांत्रिक देश में सरकारी नीति के विरुद्ध शांतिपूर्ण जुलूस या मार्च या प्रदर्शन विरोध का एक सर्वमान्य तरीका है।


इसमें कहा गया है कि भारतीय नागरिकों के खिलाफ सत्ता का दुरुपयोग मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा है। याचिका में दावा किया गया कि पूर्व नियोजित तरीके से, जुलूस में शामिल सदस्यों को अचानक पुलिस ने घेर लिया और लाठीचार्ज, पानी की बौछार और आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया गया, जिसके परिणामस्वरूप अराजकता की स्थिति पैदा हो गई। इसमें आरोप लगाया गया है कि पुलिस की बर्बरता और अत्याचार के कारण विजय सिंह की मौत हुई।

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