होसबाले की नियुक्ति से क्या आरएसएस बढ़ा पाएगा दक्षिण भारत में अपनी पैठ?
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ दक्षिण भारत में तेजी से अपना प्रभाव बढ़ा रहा है इसलिए इस बार की प्रतिनिधि सभा का आयोजन बंगलूरू में किया है। दक्षिण से ताल्लुक नजर रखने वाले होसबोले इसमें भी मददगार हो सकते हैं।
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बंगलूरू में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में नए सरकार्यवाह के तौर पर दत्तात्रेय होसबाले को चुना गया है। अब संघ में होसबाले नंबर दो की भूमिका में होंगे। इसके पहले 12 वर्षों से सरकार्यवाह की जिम्मेदारी सुरेश भैय्याजी जोशी संभाल रहे थे। दत्तात्रेय होसबाले 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 में संघ के स्थापना के शताब्दी वर्ष से जुड़े सभी संगठनात्मक कार्य भी देखेंगे।
1 दिसम्बर, 1955 को कर्नाटक के शिमोगा जिले के सोराबा तालुक में दत्तात्रेय होसबाले ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से अपने संघ जीवन की शुरुआत की। होसबोले 1968 में 13 वर्ष की आयु में स्वयंसेवक बने और 1972 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से जुड़े। अगले 15 वर्षों तक वे परिषद् के संगठन महामंत्री रहे।
सन् 1975-77 के जेपी आन्दोलन में भी सक्रिय थे और लगभग पौने दो वर्ष आपने 'मीसा' के अंतर्गत जेलयात्रा भी की। वर्ष 2004 में ये संघ के अखिल भारतीय सह-बौद्धिक प्रमुख बनाए गए। 2008 से अब तक सह-सरकार्यवाह के पद पर कार्यरत रहे हैं। दत्तात्रेय होसबाले मातृभाषा कन्नड़ के अलावा अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, तमिल, मराठी, आदि अनेक भारतीय और विदेशी भाषाओं के जानकार है।
नरेंद्र मोदी के करीबी
दत्तात्रेय होसबाले नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाते हैं। दत्तात्रेय और मोदी की नजदीकी का अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि साल 2015 में ही दत्तात्रेय को सरकार्यवाह की जिम्मेदारी दी जाने की कोशिश की गई थी लेकिन विफल साबित हुई। संघ के ही एक धड़े ने उनका विरोध किया था। दत्तात्रेय ने एबीवीपी से छात्र राजनीति की शुरुआत की है। यही वजह है कि संघ में ही दत्तात्रेय को सरकार्यवाह बनाने का एक धड़ा अब तक उनका विरोध करता रहा है। एबीवीपी में लंबे समय तक रहने के दौरान दत्तात्रेय के पास सांगठनिक कौशल भी है।
संघ दक्षिण में बढ़ा रहा है अपना प्रभाव
एक वरिष्ठ संघ विचारक ने नाम न छापने के अनुरोध पर 'अमर उजाला' से कहा, संघ दक्षिण भारत में तेजी से अपना प्रभाव बढ़ा रहा है इसलिए इस बार की प्रतिनिधि सभा का आयोजन बंगलूरू में किया है। दक्षिण से ताल्लुक नजर रखने वाले होसबाले इसमें भी मददगार हो सकते हैं। होसबोले साल 2009 से सह सरकार्यवाह पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वे वर्तमान में 65 वर्ष के है। वे 71 साल की उम्र होने तक सरकार्यवाह का दो कार्यकाल पूरा कर सकते हैं। इन दो कार्यकाल में साल 2024 का लोकसभा चुनाव और संघ का जन्मशताब्दी वर्ष भी आ जाएगा। उन्होंने आगे कहा, संघ में संघ प्रमुख या सरसंघचालक का पद ही सबसे बड़ा होता है। इसके चुनाव नहीं होते है। संघ प्रमुख ही अपने उत्तराधिकारी की नियुक्ति करते हैं। पूर्व सरसंघचालक केएस सुदर्शन ने ही मौजूदा सरसंघचालक मोहन भागवत की नियुक्ति की थी। लेकिन यह एक तरह से मार्गदर्शक के पद की तरह होता है। संगठन के रोज के कामों की जिम्मेदारी सरकार्यवाह के जिम्मे ही होती है। ये आमभाषा में महासचिव के बराबर का होता है। सरसंघचालक अपना उत्तराधिकारी स्वयं चुनता है। संगठन में सरसंघचालक का निर्णय ही अंतिम माना जाता है।
हर तीन वर्ष में चुने जाते है सरकार्यवाह
सरकार्यवाह का चुनाव हर तीन साल में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में होता है। आम तौर पर ये बैठक मार्च के दूसरे या तीसरे हफ्ते में तीन दिन के लिए होती है।निर्वाचन वर्ष में होने वली प्रतिनिधि सभा की बैठक हमेशा से नागपुर में होती आई है। पिछले वर्ष बैठक बेंगलुरु में होनी थी, लेकिन कोरेाना संक्रमण के कारण इसे रद्द कर दिया गया था। जबकि संघ की सालाना होने वाली बैठक देशभर में कहीं भी हो सकती है।
प्रतिनिधि सभा की बैठक में सरकार्यवाह का चुनाव सामान्यत
बैठक में दूसरे दिन होता है। इस साल यह दो दिन की बैठक में भी दूसरे दिन ही हुआ है। बैठक में वर्तमान सरकार्यवाह अपने कार्यकाल में किए गए कामों की जानकारी देते है। इसके बाद उसका कार्यकाल खत्म हो जाता है। इसके बाद नया सरकार्यवाह चुना जाता है। चुने जाने के बाद नया सरकार्यवाह ही अपनी टीम की घोषणा करते है। गौरतलब है कि आम तौर पर इस सभा में 1500 प्रतिनिधि भाग लेते हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते इस बार सिर्फ 450 प्रतिनिधि ही बेंगलुरु में हैं। करीब 1,000 प्रतिनिधि 44 स्थानों से वर्चुअल तौर पर बैठक से जुड़े हैं।