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CRPF: जांबाज शहीद कमांडर भालेराव की पत्नी का निधन, अब परिवार में बची आठ वर्षीय बेटी, सीआरपीएफ पर टिकीं निगाहें

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 13 Feb 2023 06:07 PM IST
सार

CRPF: सीआरपीएफ में भालेराव के साथियों का कहना है कि अब परिवार में उनकी बेटी वेदांगी बची है। भालेराव को इंटरनल सिक्योरिटी अकादमी में उसे 'बेस्ट ट्रेनी इन आउटडोर सब्जेक्ट', का सम्मान मिला था। सहयोगी रहे अधिकारियों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में सीआरपीएफ द्वारा उनकी बेटी को फैमिली पेंशन दी जानी चाहिए...

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CRPF: Martyr Commander wife passed away, family seeking pension for his lone 8 year old daughter
CRPF: शहीद कमांडर नितिन भालेराव अपने परिवार के साथ - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नवंबर 2020 के दौरान ताड़मेटला गांव के निकट नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट कर सीआरपीएफ कोबरा की छह टीमों को भारी नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई थी। नक्सलियों द्वारा लंबी दूरी तक बारूदी सुरंग बिछाई गई। भारी संख्या में मौजूद नक्सलियों की यह रणनीति थी कि पहले सीआरपीएफ कोबरा को बारूदी सुरंग यानी आईईडी विस्फोट के जरिए चोट पहुंचाएंगे और उसके बाद घात लगाकर हमला कर देंगे। वे कोबरा जवानों के हथियार छीनना चाहते थे, लेकिन 206वीं कोबरा बटालियन के सहायक कमांडेंट 33 वर्षीय नितिन पी भालेराव और उनके साथियों ने नक्सलियों को अपने इरादों में कामयाब नहीं होने दिया। उस ऑपरेशन में भालेराव शहीद हो गए थे। अब दो दिन पहले उनकी पत्नी रश्मि का हार्ट अटैक होने से निधन हो गया है। परिवार में अब उनकी आठ वर्षीय बेटी वेदांगी नितिन भालेराव बची हैं। सीआरपीएफ में भालेराव के साथी अनेक अधिकारियों ने बल के शीर्ष नेतृत्व से मांग की है कि इस कष्ट की घड़ी में नितिन भालेराव की बेटी को आर्थिक मदद दी जाए। इस मामले में सीआरपीएफ वाइव्ज वेल्फेयर एसोसिएशन को भी आगे आना चाहिए।
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बेटी को सीआरपीएफ से मिले फैमिली पेंशन

सीआरपीएफ में भालेराव के साथियों का कहना है कि अब परिवार में उनकी बेटी वेदांगी बची है। भालेराव के पिता का 1994 में निधन हो गया था। उनके बड़े भाई अमोल और छोटे भाई सुयोग, दोनों टीचर हैं। नितिन की शहादत के बाद उनका परिवार बड़ी मुश्किल से सामान्य अवस्था में आया था। अब 11 फरवरी को नितिन भालेराव की पत्नी रश्मि का भी निधन हो गया है। वेदांगी, नासिक के ही एक स्कूल में तीसरी कक्षा की छात्रा है। नितिन, सीआरपीएफ का जांबाज ग्राउंड कमांडर था। अखिल भारतीय पुलिस कमांडो मुकाबले में उसने सीआरपीएफ दल का नेतृत्व किया था। इंटरनल सिक्योरिटी अकादमी में उसे 'बेस्ट ट्रेनी इन आउटडोर सब्जेक्ट', का सम्मान मिला था। नितिन के सहयोगी रहे अधिकारियों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में सीआरपीएफ द्वारा उनकी बेटी को फैमिली पेंशन दी जानी चाहिए।

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CRPF: Martyr Commander wife passed away, family seeking pension for his lone 8 year old daughter
crpf commander Bhalerao - फोटो : Amar Ujala

कोबरा ने नक्सलियों के घर में घुसकर ललकारा था

नक्सलियों का गढ़ रहे मिनपा में कैंप लगाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। वहां एक बड़ी मुठभेड़ हुई थी, जिसमें डीआरजी के 17 जवान शहीद हुए थे। तीन नक्सली भी मारे गए थे। नक्सली, हमले के बाद एके-47 जैसी 15 बदूंकें और जवानों के पास मौजूद वायरलैस उपकरण आदि लूट कर भाग गए थे। डीआरजी के करीब आठ हजार जवान नक्सलियों के इस गढ़ में कैंप लगाने का प्रयास कर चुके थे, लेकिन सफलता नहीं मिली। दस साल से वहां कैंप स्थापित करने की कोशिशें चल रही थी। सीआरपीएफ की कोबरा इकाई ने यहां कैंप लगाने के लिए कदम आगे बढ़ाए। कोबरा ने नक्सलियों के इस गढ़ में भीतर घुस कर उन्हें ललकारा। नितिन पी भालेराव की टीम भी उसी ओर बढ़ रही थी। कोबरा दस्ते में कुल छह टीमें बनाई गई थीं। डी 206 से तीन टीमें 10, 11 व 12 गठित की गई, जबकि कोबरा 206ए से 1, 2 व 3 टीम बनी थी। कोबरा डी की टीमों की कमान चीता गणेश वलुंज के हाथ में थी, जबकि कोबरा 206ए टीमों की कमान पंथेर रमेश यादव को सौंपी गई। टू आईसी दिनेश कुमार सिंह इस ऑपरेशन को ओवरऑल कमांड कर रहे थे। उनके साथ असिस्टेंट कमांडेंट नितिन भालेराव भी थे।

घायल हुए, मगर हथियार नहीं छोड़े

चूंकि उस वक्त रात थी, तो इन्हें बारूदी सुरंग का अंदाजा नहीं था। जिस जगह पर ये विस्फोट हुआ, वहां पहले से इस तरह की कोई संभावना नजर नहीं आई। विस्फोट के बाद दिनेश कुमार सिंह, नितिन भालेराव और सिपाही श्रीराम दूर जाकर गिरे। बारूदी सुरंग के विस्फोट में बुरी तरह से जख्मी होने के बावजूद उन्होंने अपने हथियार नहीं छोड़े। विस्फोट के तुरंत बाद नक्सलियों ने घात लगाकर हमला बोल दिया। इसका मतलब नक्सली केवल बारूदी सुरंग के विस्फोट तक सीमित नहीं थे, उन्होंने घायल जवानों पर हमला कर हथियार लूटने की योजना बना रखी थी। उसी के तहत नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। घायल होने के बाद भी इन तीनों ने उनकी फायरिंग का जवाब दिया। उन्हें अपने करीब नहीं आने दिया। कुछ ही देर में वहां दूसरी टीम भी पहुंच गई। उसके बाद नक्सलियों को वहां से खदेड़ दिया गया। इस हमले में नौ जवान घायल हो गए। नितिन भालेराव ने रायपुर के रामकृष्ण अस्पताल में दम तोड़ दिया था।

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