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President Polls: राष्ट्रपति चुनाव ने विपक्षी एकता की संभावनाओं पर लगाया ग्रहण, सभी दलों में पड़ी फूट
Sat, 23 Jul 2022 05:24 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 23 Jul 2022 05:24 AM IST
सार
राष्ट्रपति चुनाव में 17 सांसदों और 125 विधायकों ने अपनी पार्टी के रुख के इतर राजग उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन किया। 12 राज्यों के कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की।
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द्रौपदी मुर्मू
- फोटो : PTI
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विस्तार
राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी एकता ही नहीं चरमराई बल्कि विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का समर्थन करने वाले सभी दलों में फूट पड़ी। इस चुनाव ने भविष्य में विपक्षी एकता की संभावनाओं पर भी ग्रहण लगा दिया। उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा का समर्थन न करने का टीएमसी का फैसला बताता है कि भविष्य में विपक्षी दलों में एकता कायम होने के बदले इनमें तकरार बढ़ेगी।
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राष्ट्रपति चुनाव में 17 सांसदों और 125 विधायकों ने अपनी पार्टी के रुख के इतर राजग उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन किया। 12 राज्यों के कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। इसमें अकेले असम के करीब दो दर्जन विधायक और मध्य प्रदेश में एक दर्जन विधायकों ने यशवंत को वोट नहीं दिया। इस चुनाव में राजग के पास करीब 49 फीसदी तो विपक्ष के पास 51 फीसदी वोट थे।
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जबकि मुर्मू को करीब 64 फीसदी तो यशवंत को करीब 36 फीसदी ही मत मिले। दरअसल, गैर राजग बीजेडी, बसपा, वाईएसआर कांग्रेस, टीडीपी जैसे दलों ने राजग उम्मीदवार का पलड़ा भारी कर दिया। रही-सही कसर झामुमो, जदएस जैसे दलों ने पाला बदलकर पूरी कर दी। इसके बाद बड़ी संख्या में क्रॉस वोटिंग ने हार-जीत का अंतर बड़ा कर दिया।
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मुर्मू को मिला जीत का प्रमाणपत्र
निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को देश की 15वीं राष्ट्रपति के तौर पर निर्वाचित द्रौपदी मुर्मू को जीत का प्रमाणपत्र जारी कर दिया। आयोग ने ट्वीट किया, रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नतीजे सौंपने के बाद सीईओ राजीव कुमार और निर्वाचन आयुक्त अनूप चंद्र पांडेय के हस्ताक्षर वाला द्रौपदी मुर्मू का निर्वाचन पत्र जारी कर दिया गया है। यह प्रमाणपत्र अब केंद्रीय गृहसचिव के पास भेजा जाएगा जो इसे 25 जुलाई को राष्ट्रपति भवन के सेंट्रल हॉल में होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह में पढ़ेंगे।
नई राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण की ड्रेस रिहर्सल के चलते इस शनिवार राष्ट्रपति भवन में जवानों की अदला बदली नहीं होगी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल रविवार को समाप्त हो रहा है। सोमवार को अगली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शपथ लेंगी।
उपराष्ट्रपति चुनाव पर भी असर पड़ना तय
राष्ट्रपति चुनाव का असर उपराष्ट्रपति चुनाव पर भी पड़ना तय है। बृहस्पतिवार को टीएमसी ने इस चुनाव में भाग न लेने की घोषणा कर कांग्रेस को बड़ा झटका दे दिया। बीजेडी पहले ही राजग उम्मीदवार जगदीप धनखड़ का समर्थन कर रही है। वाईआरसीपी सहित विपक्ष के कुछ और दलों के साथ भाजपा की बातचीत जारी है। ऐसे में उपराष्ट्रपति चुनाव भी विपक्ष में बिखराव का गवाह बनेगा।
कहां कितनी क्रॉस वोटिंग
राष्ट्रपति चुनाव में असम के 25, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के 16-16, गुजरात और झारखंड के 10-10, मेघालय के 7, छत्तीसगढ़ और बिहार में 6-6, गोवा के 4, हिमाचल प्रदेश के 2 और हरियाणा-अरुणाचल प्रदेश के 1-1 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल में भी क्रॉस वोटिंग हुई।
विवादों का समाधान सिर्फ सुप्रीम कोर्ट करेगा
आपराधिक मामलों में जेलों में बंद सांसद व विधायकों को राष्ट्रपति चुनाव में शामिल होने से रोकने की मांग करते हुए दायर की गई याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ ने कहा कि इस संबंध में अनुच्छेद 71(1) के तहत स्पष्ट संवैधानिक व्यवस्था है, जिसके मुताबिक राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति चुनाव से जुड़े किसी भी मसले पर सुनवाई सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ही कर सकता है, लिहाजा याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
न्यायमूर्ति नरूला ने राष्ट्रपति पद के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करने में असफल रहने वाले एक 70 वर्षीय बढ़ई की रिट पिटिशन को खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रपति चुनाव के संबंध में इलेक्शन पिटिशन दायर की जानी थी, न कि रिट पिटिशन।