{"_id":"5b3ea9d44f1c1bc5248b4b51","slug":"crop-insurance-scheme-will-be-strengthened-by-satellite-pictures","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सैटेलाइट तस्वीरों से पुख्ता होगी फसल बीमा योजना, सरकार को मिलेगा फायदा ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
सैटेलाइट तस्वीरों से पुख्ता होगी फसल बीमा योजना, सरकार को मिलेगा फायदा
पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 06 Jul 2018 04:59 AM IST
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केंद्र सरकार देश के किसानों को मुहैया कराई जा रही फसल बीमा योजना को तकनीक से पुख्ता बनाने की तैयारी कर रही है। कृषि मंत्रालय ने सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों के माध्यम से हरियाणा में खेतों में फसल की हालत का पायलट प्रोजेक्ट भी किया है। इसमें मिली सफलता के आधार पर सरकार आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में वह फसल में हुए नुकसान और फायदे के साथ ही कितनी सरकारी खरीद की जाए, इसका भी पता लगा लेगी।
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देश में किसानी को तकनीक के जरिये लाभ पहुंचाने के मुद्दे पर केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार इस पर रूपरेखा तैयार कर रही है। हाल में कनाडा की एक कंपनी के साथ हुई चर्चा का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि संबंधित कंपनी ने प्रस्तुतीकरण दिया और हरियाणा में पायलट प्रोजेक्ट को अंजाम दिया गया। सीधे तौर पर सरकार को इसका फायदा कृषि पैदावार के आकलन, नुकसान और सरकारी खरीद व्यवस्था को बेहतर बनाने में दिखाई दे रहा है।
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तकनीक से होगी किसानों की मदद
शेखावत ने कहा कि इसके जरिये फसल बीमा की व्यवस्था को चाक-चौबंद करना आसान है। सैटेलाइट तस्वीर के जरिये यह पता लगाना बहुत ही आसान है कि अमुक राज्य के किस क्षेत्र में कृषि को प्राकृतिक आपदा या ज्यादा बारिश या अन्य कारणों से कितना नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि हर तीसरे दिन की सैटेलाइट तस्वीरों के पायलट प्रोजेक्ट से हमें यह स्पष्ट हो गया कि तकनीक का उपयोग कर कृषि को बड़े पैमाने पर लाभ पहुंचाया जा सकता है। साथ ही, सरकार विभिन्न स्तरों पर जानकारी हासिल कर किसानों की मदद कर सकती है।
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कृषि सुधार में मील का पत्थर
अन्य क्षेत्रों को भी मिलेगा इसका लाभ
शेखावत ने कहा कि सिर्फ कृषि ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को भी सैटेलाइट तस्वीरों से जानकारी हासिल कर बड़ा लाभ पहुंचाया जा सकता है। जैसे वन विभाग ने कितने पेड़ लगाए या खनन की गतिविधियों के बारे में भी इससे पुख्ता जानकारी हासिल की जा सकती है। जबकि, कृषि में तो स्पष्ट तौर पर यह आकलन किया जा सकता है कि किस राज्य में कितना उत्पादन हो सकता है।
कृषि सुधार में मील का पत्थर
राज्यमंत्री ने कहा कि यह एक ऐसा समाधान है जिसके जरिये नरेगा, ग्रामीण विकास, बाजारों की जानकारी केंद्र और राज्य सरकारों को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में हम आगे बढ़ रहे हैं और आने वाले दिनों में यह तकनीक कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विशेषज्ञों को इसके जरिए वह जानकारी मिल सकती है, जिसे जुटाने के लिए उन्हें नाकों चने चबाने पड़ते हैं। गौरतलब है कि कृषि मंत्रालय और नीति आयोग कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने पर भी काम कर रहे हैं। इसके जरिये देश की कृषि का पूरा डाटा रजिस्टर तैयार किए जाने की योजना है।
शेखावत ने कहा कि सिर्फ कृषि ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को भी सैटेलाइट तस्वीरों से जानकारी हासिल कर बड़ा लाभ पहुंचाया जा सकता है। जैसे वन विभाग ने कितने पेड़ लगाए या खनन की गतिविधियों के बारे में भी इससे पुख्ता जानकारी हासिल की जा सकती है। जबकि, कृषि में तो स्पष्ट तौर पर यह आकलन किया जा सकता है कि किस राज्य में कितना उत्पादन हो सकता है।
कृषि सुधार में मील का पत्थर
राज्यमंत्री ने कहा कि यह एक ऐसा समाधान है जिसके जरिये नरेगा, ग्रामीण विकास, बाजारों की जानकारी केंद्र और राज्य सरकारों को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में हम आगे बढ़ रहे हैं और आने वाले दिनों में यह तकनीक कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विशेषज्ञों को इसके जरिए वह जानकारी मिल सकती है, जिसे जुटाने के लिए उन्हें नाकों चने चबाने पड़ते हैं। गौरतलब है कि कृषि मंत्रालय और नीति आयोग कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने पर भी काम कर रहे हैं। इसके जरिये देश की कृषि का पूरा डाटा रजिस्टर तैयार किए जाने की योजना है।