सैन्य बलों के लिए कोविड-19 के साथ-साथ आतंकवाद से निपटने की बढ़ने लगी चुनौती
- 15-25 मई तक बढ़ सकती हैं सीमापार से आतंकी घटनाएं
- नुकसान पहुंचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं आतंकी संगठन
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भारतीय सेना को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ दिल्ली के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में कोविड-19 के 24 संक्रमित पहुंच चुके हैं तो दूसरी तरफ पाकिस्तान से लगती नियंत्रण रेखा, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आतंकी घटनाओं का दबाव बढ़ गया है।
सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार अकेले अप्रैल महीने में दो से ढाई सौ आतंकियों के सीमा पार से घुसपैठ करने का अनुमान है। एजेंसियों के पास इनपुट है कि 15-25 मई तक सीमावर्ती क्षेत्र में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और सुरक्षा बलों के सहयोग से आतंकी घटनाओं में इजाफा हो सकता है।
आमतौर पर बर्फ पिघलते ही आतंकी घटनाओं में वृद्धि होने लगती है। कर्नल (रिटा.) रंधावा का कहना है कि हर साल अप्रैल महीना आते-आते सीमापार के आतंकी संगठन दहशतगर्दों को घुसपैठ कराने में लग जाते हैं।
बिग्रेडियर (रिटा.) एके चटर्जी का कहना है कि आतंकी हर बार तरह-तरह की रणनीति अपनाते हैं। कुल मिलाकर उनकी कोशिश सेना और सुरक्षा बलों का ध्यान बंटाकर घुसपैठ करना होता है, लेकिन घुसपैठ और आतंकी घटनाओं के लिए उड़ी से लेकर कृष्णा घाटी तक काफी दबाव रहता है।
हंदवाड़ा के घने जंगलों का लाभ उठाकर आतंकी घुसपैठ और आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं।
सेना का जारी है अभियान
डोडा, रामबन, किश्तवाड़ समेत तमाम क्षेत्रों में सेना अभियान चला रही है। सूत्र बताते हैं कि मिल रहे इनपुट के आधार पर क्षेत्र को आतंकी पनहगार बनने की संभावना से रोका जा रहा है।
युवाओं पर नजर रखी जा रही है। इसी तरह से उरी, राजौरी, पुंछ, गुरेज, मेंढर समेत अन्य क्षेत्र निगहबानी में हैं। सेना मुख्यालय सूत्रों का कहना है कि घुसपैठ होती है और आतंकियों के साथ सेना सख्ती से कार्रवाई करती है। इसमें किसी तरह की कोई ढील नहीं दी जा रही है।
बढ़ रही हैं आतंकी घटनाएं
2012,13 और 2015 तक तुलनात्मक रुप से काफी कम आतंकी घटनाएं हुई। इस दौरान आतंकी घटनाएं 100 से कम और क्रमश: (70,84 और 86) हुईं। क्रमश: 18, 53 और 43 सुरक्षा बल के जवानों की शहादत हुई।
आतंकी भी तुलना में अधिक मारे गए। लेकिन इसके बाद हर साल सौ से अधिक घटनाएं हुई और सुरक्षा बलों की शहादत भी बढ़ी। 2020 में अबतक 45 से अधिक आतंकी घटनाएं हो चुकी हैं।
03 मई तक 22 सुरक्षा बलों के जवानों की शहादत हो चुकी है। 74 आतंकी भी मारे गए हैं। रविवार को हंदवाड़ा में सेना को 13 घंटे तक आतंकियों से मुठभेड़ करनी पड़ी। सेना के आरआर जैसी प्रतिष्ठित विंग 21 राइफल्स के कमांडिंग आफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा, मेजर अनुज सूद समेत पांच जवानों की शहादत हुई।
दो आतंकी मारे गए और जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर भी शहीद हुए। सोमवार चार मई को सीआरपीएफ के तीन जवान आतंकियों से लोहा लेते शहीद हुए और मंगलवार को आतंकियों ने हैंड ग्रेनेड से हमला किया। इसमें दो स्थानीय नागरिक और सेना के एक जवान को चोट आई है।
सेना के उस पार है आतंकियों का जमावड़ा
सेना मुख्यालय सूत्रों का कहना है कि सीमापार की घुसपैठ बंद नहीं हुई है। आपरेशन बालाकोट और अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से कश्मीर घाटी में आतंकी घटनाओं में कुछ कमी जरूर आई, लेकिन यह सिलसिला रुका नहीं है।
बताते हैं कि इस दौरान घाटी के युवा आतंकी संगठनों के मायाजाल में कम आ फंसे, लेकिन आप यह नहीं कह सकते कि हिज्बुल मुजाहिद्दीन, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद की सेहत पर कोई असर पड़ा है।
कर्नल स्तर के अधिकारी का कहना है कि सीमा के उस पार अभी भी आतंकियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अनुमान के तौर 100 से अधिक आतंकी घुसपैठ करने की फिराक में हैं। आतंकी डाल-डाल चलते हैं तो सेना पात-पात पीछा करके उनके मुठभेड़ में मार गिराती है। लेकिन यह सिलसिला जबतक पाकिस्तान के सुरक्षाबलों की शह मिलती रहेगी, चलता रहेगा।
क्या आतंकियों से भी है कोविड-19 संक्रमण का खतरा?
सैन्य सूत्रों का कहना है कि सीमा पार के आतंकी जिस किसी भी तरह से नुकसान पहुंचा सकते हैं, पहुंचाएंगे। पिछले कई सालों से उनके निशाने पर हमेशा भारतीय सुरक्षा बल रहते हैं।
हालांकि सूत्र का कहना है कि इस तरह का अभी कोई मामला संज्ञान में नहीं आया है। बताते हैं सीमा पार से पकड़े गए कुछ संदेशों से इस तरह का अनुमान लगाया गया और सुरक्षा एजेंसियां इस पर लगातार ध्यान दे रही हैं।