कश्मीरी युवक की मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
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मजिस्ट्रेट ने डीएसपी यासिर कादरी के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। साथ ही शीर्ष अदालत ने कश्मीर रेंज के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही पर रोक लगा दी है। मालूम हो कि आदेश के बावजूद डीएसपी पर हत्या का मामला दर्ज करने के कारण अदालत ने सोमवार को कश्मीर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक समेत अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया था।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि पुलिस अधिकारियों को भी मानवता एवं प्यार व स्नेह के साथ काम को अंजाम देना चाहिए। जम्मू एवं कश्मीर सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की पीठ के समक्ष कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश सही नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा हुआ तो हर दिन इस तरह का मामला दर्ज करना होगा।
'शिकायत पूरी तरह से फर्जी है'
पीठ ने कहा आप एफआईआर दर्ज कीजिए और फिर जांच कीजिए। पीठ ने कहा कि आपके लिए यहीं सबसे अच्छा होगा। जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि शिकायत पूरी तरह से फर्जी है। उन्होंने कहा कि अगर हम डीएसपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करेंगे तो हमें डीएसपी को निलंबित करना होगा और गिरफ्तार करना होगा।
इस पर पीठ ने कहा कि ऐसा जरूरी तो नहीं है। तब अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह जरूरी होता है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि गिरफ्तारी पर शुक्रवार तक की रोक लगाई जाए। पीठ ने कहा कि दो अलग-अलग वारदात है। हमें नहीं पता कि इनमें से कौन सच है। मुख्य बात है कि एक युवक की मौत हुई है।
जवाब में अटॉनी जनरल ने कहा कि पहले ही एक एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। ऐसे में अलग से एफआईआर दर्ज करने की जरूरत क्या है। पहली एफआईआर में जांच के दौरान अगर पाया गया कि पुलिस अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार है तो उन्हें भी आरोपी बनाया जाएगा।
उन्होंने उदाहरण के तौर पर संदीप घड़ोली एनकाउंटर मामले का जिक्र किया जिसमें बाद में गुंडग़ांव पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जिसके बाद पीठ ने राज्य सरकार को इस पूरे प्रकरण की जांच कर शुक्रवार तक सीलबंद लिफाफ में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।