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4 राज्यों, एक UT ने बनाया रिकॉर्ड, अदालतों में खत्म हुए 10 साल से चल रहे केस
amarujala.com- Presented By: अनंत पालीवाल
Updated Mon, 11 Sep 2017 09:22 AM IST
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- फोटो : Google
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देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि एक केंद्र शासित प्रदेश समेत 4 राज्यों में मौजूद कोर्ट में 10 साल से पुराने सभी केस खत्म कर दिए गए हैं। जहां पूरे देश में एक दशक से पुराने कोर्ट में चल रहे पुराने केसों की संख्या 23 लाख के करीब है, वहां इस तरह का होना एक रिकॉर्ड के बराबर है।
जिन राज्यों में मौजूद न्यायलायों ने ऐसा किया है, उनमें हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, केरल और चंडीगढ़ शामिल हैं। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में न्यायलयों ने मामलें निपटाने में बहुत ज्यादा तेजी दिखाई।
यह राज्य भी कतार में शामिल
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इन चार राज्यों के अलावा दिल्ली, असम, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक भी 10 साल से पुराने लंबित मामलों को एक फीसदी तक कम कर लिया है। हालांकि इनमें वो केस शामिल नहीं है जो सुप्रीम कोर्ट या फिर हाईकोर्ट में चल रहे हैं।
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नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड की तरफ से जारी आंकड़ों के हिसाब से पूरे देश में इस वक्त 2.54 करोड़ मामले 17 हजार से अधिक न्यायलयों में 10 साल से अधिक समय से विचाराधीन है। जिन राज्यों में सबसे ज्यादा विचाराधीन केस लंबित हैं उनमें हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, केरल और दिल्ली हैं।
लंबित केसों को निपटाने के जज द्वारा की कार्यवाही और हाईकोर्ट व सरकार के जरिए उठाए गए कदमों से न्याय मिलने में लोगों को देर नहीं लग रही है।
लोक अदालतों के जरिए निपटें ज्यादातर मामलें
इन केसों को जल्दी से निपटाने में लोक अदालतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, क्योंकि कई केस इन अदालतों के जरिए ही खत्म किए हैं। अब जिला अदालतें इन लोक अदालत के माध्यम से लंबित केसों को निपटाने में लगे हैं, जहां सुलाहनामा या फिर बातचीत से केस को निपटा दिया जाता है। हालांकि ये प्रक्रिया केवल दीवानी अदालतों में अपनाई गई थी।
इन राज्यों की हालत सबसे खराब
जिन राज्यों की हालत सबसे ज्यादा खराब है उनमें गुजरात, बिहार, यूपी, ओडिशा और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। अकेले गुजरात में 10 साल से पुराने लंबित केसों की संख्या 20 फीसदी से अधिक है। वहीं ओडिशा में 17 फीसदी, बिहार में 16 फीसदी, यूपी में 13 फीसदी, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड में 12 फीसदी एवं जम्मू-कश्मीर में 11 फीसदी केस लंबित हैं।
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जिन राज्यों में मौजूद न्यायलायों ने ऐसा किया है, उनमें हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, केरल और चंडीगढ़ शामिल हैं। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में न्यायलयों ने मामलें निपटाने में बहुत ज्यादा तेजी दिखाई।
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यह राज्य भी कतार में शामिल
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इन चार राज्यों के अलावा दिल्ली, असम, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक भी 10 साल से पुराने लंबित मामलों को एक फीसदी तक कम कर लिया है। हालांकि इनमें वो केस शामिल नहीं है जो सुप्रीम कोर्ट या फिर हाईकोर्ट में चल रहे हैं।
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नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड की तरफ से जारी आंकड़ों के हिसाब से पूरे देश में इस वक्त 2.54 करोड़ मामले 17 हजार से अधिक न्यायलयों में 10 साल से अधिक समय से विचाराधीन है। जिन राज्यों में सबसे ज्यादा विचाराधीन केस लंबित हैं उनमें हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, केरल और दिल्ली हैं।
लंबित केसों को निपटाने के जज द्वारा की कार्यवाही और हाईकोर्ट व सरकार के जरिए उठाए गए कदमों से न्याय मिलने में लोगों को देर नहीं लग रही है।
लोक अदालतों के जरिए निपटें ज्यादातर मामलें
इन केसों को जल्दी से निपटाने में लोक अदालतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, क्योंकि कई केस इन अदालतों के जरिए ही खत्म किए हैं। अब जिला अदालतें इन लोक अदालत के माध्यम से लंबित केसों को निपटाने में लगे हैं, जहां सुलाहनामा या फिर बातचीत से केस को निपटा दिया जाता है। हालांकि ये प्रक्रिया केवल दीवानी अदालतों में अपनाई गई थी।
इन राज्यों की हालत सबसे खराब
जिन राज्यों की हालत सबसे ज्यादा खराब है उनमें गुजरात, बिहार, यूपी, ओडिशा और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। अकेले गुजरात में 10 साल से पुराने लंबित केसों की संख्या 20 फीसदी से अधिक है। वहीं ओडिशा में 17 फीसदी, बिहार में 16 फीसदी, यूपी में 13 फीसदी, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड में 12 फीसदी एवं जम्मू-कश्मीर में 11 फीसदी केस लंबित हैं।