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महाराष्ट्र: मासूम से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को मौत की सजा, कोर्ट ने क्यों बताया 'दुर्लभतम से दुर्लभ' मामला?
Fri, 16 Oct 2026 11:50 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नासिक।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नासिक।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 16 Oct 2026 11:50 PM IST
सार
महाराष्ट्र के नासिक में चार साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में अदालत ने एक दोषी को मौत की सजा सुनाई है। आरोपी ने बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर घर बुलाया था। आखिर इस मामले में ऐसा क्या हुआ कि अदालत ने इसे 'दुर्लभतम से दुर्लभ' अपराध माना? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
महाराष्ट्र के नासिक जिले की एक फास्ट-ट्रैक अदालत ने शुक्रवार को एक 24 वर्षीय मजदूर को मौत की सजा सुनाई। उस पर पिछले साल के अंत में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म करने और उसकी हत्या करने का आरोप था। अदालत ने इस जघन्य अपराध को 'दुर्लभतम से दुर्लभ' श्रेणी का बताया।
कोर्ट ने क्यों सुनाई मौत की सजा?
अतिरिक्त सत्र न्यायालय और फास्ट-ट्रैक विशेष अदालत (एफटीएससी) के जज केजी पालदेवार ने आरोपी विजय संजय खैरनार को मौत की सजा सुनाई। करीब एक साल पहले नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या की इस क्रूर घटना ने लोगों में भारी आक्रोश पैदा किया था। इसके बाद राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे।
उत्तर महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव शहर की निचली अदालत ने सजा सुनाते समय इस अपराध को 'दुर्लभतम से दुर्लभ' बताया। अदालत ने पीड़ित बच्ची के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी आदेश दिया।
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जेल में बंद आरोपी खैरनार और उसके वकील नीलेश राठी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये अदालत में मौजूद थे। बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने 30 सितंबर को फैसला सुनाया था। इसमें आरोपी को दोषी ठहराया गया था। शुक्रवार को अदालत ने उसकी सजा की घोषणा की।
इस मामले में वरिष्ठ वकील उज्ज्वल निकम विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) थे। उनकी सहायता वकीलों की एक टीम ने की। इस टीम में हर्षद तिवारी, स्नेहा शर्मा और एसके सोनावणे शामिल थे।
कैसे दिया वारदात को अंजाम?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 16 नवंबर 2025 को खैरनार ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने नासिक जिले के मालेगांव तालुका के एक गांव में बच्ची का गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। खैरनार वेल्डिंग और फर्नीचर का काम करता था। बच्ची अपने दोस्तों के साथ घर के पास खेल रही थी। इसी दौरान वह लापता हो गई। बाद में उसका शव आरोपी के घर के पास एक मोबाइल फोन टावर के नजदीक मिला।
खैरनार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की हत्या, दुष्कर्म, अपहरण और सबूत मिटाने से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। उस पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) की संबंधित धाराएं भी लगाई गईं। यह मामला मालेगांव तालुका थाने में दर्ज किया गया था। आरोपी को 17 नवंबर को गिरफ्तार किया गया।
इस जघन्य अपराध के बाद मालेगांव तालुका, नासिक जिले के आसपास के इलाकों और राज्य के कुछ अन्य हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।
किन सबूतों के आधार पर दोषी ठहराया गया?
अभियोजन पक्ष का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और 'आखिरी बार साथ देखे जाने' के सिद्धांत पर आधारित था। एक सरकारी वकील के अनुसार, गवाहों की गवाही, फॉरेंसिक रिपोर्ट और मेडिकल जांच का इस्तेमाल किया गया। इन सबूतों के जरिये यह साबित करने की कोशिश की गई कि बच्ची की मौत हत्या के कारण हुई थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत में यह साबित करने का प्रयास किया कि इस मामले में उचित संदेह की कोई गुंजाइश नहीं थी।
ये भी पढ़ें: आंध्र में बड़ा हादसा: डूबने से पांच महिलाओं की मौत, एक नवविवाहिता की शामिल, उजड़ गए हंसते खेलते परिवार
सरकारी वकील ने क्या दलील दी?
विशेष लोक अभियोजक निकम ने दलील दी कि यह मामला 'दुर्लभतम से दुर्लभ' श्रेणी में आता है। उन्होंने इस घटना को बिना किसी उकसावे के किया गया अपराध बताया। उन्होंने कहा कि यह एक सुनियोजित मानसिकता के साथ किया गया क्रूर और जघन्य अपराध था।
पीड़ित परिवार की वकील स्नेहा शर्मा-ठाकरे ने दलील दी कि आरोपी ने जानबूझकर बच्ची को निशाना बनाया था। उस समय बच्ची एक गली में पांच लड़कों के साथ खेल रही थी। ये लड़के उसके सहपाठी थे। शर्मा-ठाकरे के अनुसार, बच्चे आरोपी को 'दादा' कहकर बुलाते थे। आरोपी ने चॉकलेट का लालच देकर बच्ची को अपने घर के अंदर बुलाया। वहां उसने बच्ची के साथ यौन हमला किया।
हत्या के बाद आरोपी ने क्या किया?
वकील ने कहा कि यौन हमले के बाद आरोपी ने एक करदोड़ा (पतले धागे) से बच्ची का गला घोंट दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इसके बाद आरोपी ने खून के धब्बे धोकर साफ किए। फिर उसने नहाया। उसने बच्ची के शव को चादर में लपेटा। इसके बाद शव को अपने घर से 10 से 15 फीट दूर स्थित मोबाइल टावर परिसर में फेंक दिया।
किस गवाह की गवाही को अहम माना गया?
भारतीय साक्ष्य अधिनियम में संयोगवश किसी घटना को देखने वाले गवाह के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद निकम ने ऐसे ही एक गवाह की गवाही का समर्थन किया। इस गवाह ने आरोपी को कचरे जैसी कोई चीज फेंकते हुए देखा था। अदालत का विस्तृत और कारणों को बताने वाला आदेश अभी उपलब्ध नहीं था।
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कोर्ट ने क्यों सुनाई मौत की सजा?
अतिरिक्त सत्र न्यायालय और फास्ट-ट्रैक विशेष अदालत (एफटीएससी) के जज केजी पालदेवार ने आरोपी विजय संजय खैरनार को मौत की सजा सुनाई। करीब एक साल पहले नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या की इस क्रूर घटना ने लोगों में भारी आक्रोश पैदा किया था। इसके बाद राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे।
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उत्तर महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव शहर की निचली अदालत ने सजा सुनाते समय इस अपराध को 'दुर्लभतम से दुर्लभ' बताया। अदालत ने पीड़ित बच्ची के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी आदेश दिया।
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जेल में बंद आरोपी खैरनार और उसके वकील नीलेश राठी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये अदालत में मौजूद थे। बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने 30 सितंबर को फैसला सुनाया था। इसमें आरोपी को दोषी ठहराया गया था। शुक्रवार को अदालत ने उसकी सजा की घोषणा की।
इस मामले में वरिष्ठ वकील उज्ज्वल निकम विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) थे। उनकी सहायता वकीलों की एक टीम ने की। इस टीम में हर्षद तिवारी, स्नेहा शर्मा और एसके सोनावणे शामिल थे।
कैसे दिया वारदात को अंजाम?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 16 नवंबर 2025 को खैरनार ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने नासिक जिले के मालेगांव तालुका के एक गांव में बच्ची का गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। खैरनार वेल्डिंग और फर्नीचर का काम करता था। बच्ची अपने दोस्तों के साथ घर के पास खेल रही थी। इसी दौरान वह लापता हो गई। बाद में उसका शव आरोपी के घर के पास एक मोबाइल फोन टावर के नजदीक मिला।
खैरनार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की हत्या, दुष्कर्म, अपहरण और सबूत मिटाने से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। उस पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) की संबंधित धाराएं भी लगाई गईं। यह मामला मालेगांव तालुका थाने में दर्ज किया गया था। आरोपी को 17 नवंबर को गिरफ्तार किया गया।
इस जघन्य अपराध के बाद मालेगांव तालुका, नासिक जिले के आसपास के इलाकों और राज्य के कुछ अन्य हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।
किन सबूतों के आधार पर दोषी ठहराया गया?
अभियोजन पक्ष का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और 'आखिरी बार साथ देखे जाने' के सिद्धांत पर आधारित था। एक सरकारी वकील के अनुसार, गवाहों की गवाही, फॉरेंसिक रिपोर्ट और मेडिकल जांच का इस्तेमाल किया गया। इन सबूतों के जरिये यह साबित करने की कोशिश की गई कि बच्ची की मौत हत्या के कारण हुई थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत में यह साबित करने का प्रयास किया कि इस मामले में उचित संदेह की कोई गुंजाइश नहीं थी।
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सरकारी वकील ने क्या दलील दी?
विशेष लोक अभियोजक निकम ने दलील दी कि यह मामला 'दुर्लभतम से दुर्लभ' श्रेणी में आता है। उन्होंने इस घटना को बिना किसी उकसावे के किया गया अपराध बताया। उन्होंने कहा कि यह एक सुनियोजित मानसिकता के साथ किया गया क्रूर और जघन्य अपराध था।
पीड़ित परिवार की वकील स्नेहा शर्मा-ठाकरे ने दलील दी कि आरोपी ने जानबूझकर बच्ची को निशाना बनाया था। उस समय बच्ची एक गली में पांच लड़कों के साथ खेल रही थी। ये लड़के उसके सहपाठी थे। शर्मा-ठाकरे के अनुसार, बच्चे आरोपी को 'दादा' कहकर बुलाते थे। आरोपी ने चॉकलेट का लालच देकर बच्ची को अपने घर के अंदर बुलाया। वहां उसने बच्ची के साथ यौन हमला किया।
हत्या के बाद आरोपी ने क्या किया?
वकील ने कहा कि यौन हमले के बाद आरोपी ने एक करदोड़ा (पतले धागे) से बच्ची का गला घोंट दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इसके बाद आरोपी ने खून के धब्बे धोकर साफ किए। फिर उसने नहाया। उसने बच्ची के शव को चादर में लपेटा। इसके बाद शव को अपने घर से 10 से 15 फीट दूर स्थित मोबाइल टावर परिसर में फेंक दिया।
किस गवाह की गवाही को अहम माना गया?
भारतीय साक्ष्य अधिनियम में संयोगवश किसी घटना को देखने वाले गवाह के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद निकम ने ऐसे ही एक गवाह की गवाही का समर्थन किया। इस गवाह ने आरोपी को कचरे जैसी कोई चीज फेंकते हुए देखा था। अदालत का विस्तृत और कारणों को बताने वाला आदेश अभी उपलब्ध नहीं था।