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कोरोना वायरस के 'पापा' के सवाल पर घमासान, चीन और अमेरिका में बढ़ा वाक युद्ध

Wed, 01 Apr 2020 05:37 AM IST
योगेश साहू शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली।
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 01 Apr 2020 05:37 AM IST
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coronavirus : Speech war between china and america, who is corona virus father, question
कोरोना वायरस - फोटो : Amar Ujala

कोरोना वायरस का दुनिया के देश दंश झेल रहे हैं। सितंबर 2019 में चीन में कोरोना का पहला मामला सामने आया था, विशेषज्ञों का यही कहना है। इसके साथ दुनिया के तमाम देश जानना चाहते हैं कि कोरोना वायरस का पापा कौन है? इसको लेकर चीन और अमेरिका में बयानों का घमासान तेज हो गया है।

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अमेरिका ने चीन और डब्ल्यूएचओ पर कोरोना से जुड़ी जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है। भारत के भी विशेषज्ञों का मानना है कि जानकारी छिपाई गई।उधर चीन ने भी अमेरिका के आरोप पर सफाई देते हुए अपना जवाब दिया है।
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चीन ने कहा 1500 कोरोना संक्रमित ऐसे मामले, जिनमें लक्षण ही नहीं
कोरोना को लेकर चीन बढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच में दो सफाई दी है। भारत स्थित चीन दूतावास की प्रवक्ता जी रोंग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा लगाए जा रहे आरोप का खंडन किया है। चीन ने भी कहा है  कि उसके यहां 1551 कोरोना संक्रिमितों के ऐसे मामले रहे, जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं दिखाई दिए।

दरअसल अमेरिका समेत दुनिया के कई देश इस तरह की स्थिति को कोरोना मामले को छिपाना मान रहे हैं। क्योंकि कोरोना चुपचाप लोगों में फैल रहा है। इसका लक्षण कोरोना के चपेट में आ जाने के बाद मालूम पड़ रहा है। चीन ने यह भी माना कि इनमें से 205 वह लोग रहे जो दूसरे देशों के नागरिक रहे।

यूरोप, अमेरिका, इस्राइल सब त्रस्त

यूरोप के लगभग सभी देश, अमेरिका, इस्राइल समेत अन्य को कोरोना वायरस के जनक देश के बारे में जानकारी का इंतजार है। देशों का सबसे ज्यादा संदेह चीन पर ही है। चीन के वुहान प्रांत से इसके संक्रमित मिलने शुरू हुए थे और संक्रमण बढ़ने पर चीन ने इस प्रांत में लॉकडाउन कर दिया था। अब वुहान में स्थिति सामान्य हो रही है। सार्वजनिक वाहन चलने शुरू हुए हैं और ओद्योगिक कंपनियों ने कामकाज शुरू कर दिया है। जबकि दुनिया के देशों में लॉकडाउन का दौर चल रहा है।

क्या जैविक हथियार विकसित कर रहा था चीन?

जैविक या रासायनिक हथियार विकसित किया जाना कोई नई बात नहीं है। सामरिक विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के कई देशों के पास जैविक और रासायनिक हथियार हो सकते हैं। डीआरडीओ के एक पूर्व वैज्ञानिक का कहना है कि तमाम देशों ने जैविक और रासायनिक हथियारों के हमले से बचने के लिए बचाव का उपकरण भी तैयार किया है।

यह आशंका पूरी दुनिया में घर कर रही है कि कोरोना(कोविड-19) एक जैविक हथियार है। इसे विकसित किया जा रहा था और टेस्टिंग के दौरान हुई किसी त्रुटि के कारण इसे विकसित करने वाले प्रयोगशाला के वैज्ञानिक इससे संक्रमित हो गए। संक्रमित वैज्ञानिकों से यह बाहर प्रयोगशाला से बाहर आया और अब पूरी दुनिया में फैल गया है।

इसके सामानांतर एक थ्यौरी यह भी चल रही है चमगादड़ का मांस खाने वाले या पैंगोलिन से यह वायरस पैदा हुआ है। माना जा रहा है कि कोरोना संक्रमण से निजात पाने के बाद दुनिया के देश एक बार इसके जन्मदाता की खोज में अपनी ऊर्जा लगाएंगे।

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