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कोरोना वायरस: ITBP छावला कैंप में घर परिवार की तरह रहे 406 लोग, अब लौट रहे अपने घरों को

Mon, 17 Feb 2020 06:25 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 17 Feb 2020 06:25 PM IST
सार

  • आईटीबीपी के छावला कैंप में लगातार 18 दिनों से थे चीन के वुहान से लौटे 406 यात्री
  • कैंप में मालदीव के सात नागरिकों के साथ सात बच्चे और तीन महीने का शिशु भी शामिल
  • सरकार ने मुहैया कराई थीं टेलीविजन, इंडोर गेम्स और फ्री वाईफाई की सुविधा
  • ठंड से बचाने के लिए सभी को दिए गए थे इलेक्ट्रिक रूम हीटर

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coronavirus: Patients staying in itbp chhawla camp delhi has been discharged
ITBP Isolation centre - फोटो : AmarUjala

विस्तार

आईटीबीपी के छावला कैंप में लगातार 18 दिनों तक चीन के वुहान से आए 406 यात्रियों का विशेष ख्याल रखा गया, क्वारंटाइन चक्र सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद सोमवार से उनकी रवानगी शुरू हो गई है। कोरोना वायरस से उपजी गंभीर स्थिति में भारत सरकार ने यात्रियों को चीन के वुहान से लाकर क्वारंटाइन सेंटर्स में रखने का निर्णय लिया था। इसके लिए आईटीबीपी को जिम्मेवारी मिली जिसे बल ने पहले दिन से ही बहुत अच्छे से निभाया।

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यह जानते हुए कि यह परिस्थिति बहुत ही गंभीर थी और इन लोगों को वहां से लाकर एक सुरक्षित स्थान पर रखा जाना था, जो न सिर्फ इन्हें पृथक्करण करके रखता बल्कि दिए गए क्वारंटाइन पीरियड तक इनकी रोजाना स्वास्थ्य जांच, खानपान और उनकी हर प्रकार की सुविधाओं का ख्याल रखना भी एक बड़ी चुनौती थी।

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सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि कैसे कोरोना वायरस के बारे में फैलाई जा रही अफवाहों के बीच लोगों को समझाया जाए। वहीं सरकार ने दृढ़ निश्चय के साथ मात्र दो दिन में यानी 48 घंटों के भीतर कैंप में यात्रियों की सहूलियतों का सारा इंतजाम कर दिया। इसके लिए विशेष आईसोलेशन कैंप बनाया गया और 70 लोगों के स्टाफ को इस कैंप की निगरानी के लिए तैनाती किया गया।
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आईटीबीपी ने अपने छावला कैंप में इन 406 लोगों को न सिर्फ अपने घर परिवार के मेहमानों की तरह रखा बल्कि रोजाना इनकी स्वास्थ्य जांच से लेकर प्रत्येक प्रकार की सुविधा प्रदान करवाने का भरसक प्रयास किया, आइटीबीपी के डॉक्टरों ने इसके लिए दिन रात मेहनत की। साथ ही, यह एक नई परिस्थिति थी, जिससे निपटने के लिए मनोवैज्ञानिक तौर पर भी वे खुद को तैयार बनाए रखते रहे। 

 

अलग-अलग मौकों पर जब इन लोगों की तबीयत में मामूली सा भी कोई ऐसी चीज देखने को मिली, जो लक्षण आगे चलकर उन्हें और बीमार कर सकते थे उन्हें तत्काल अच्छी चिकित्सीय सुविधा भी प्रदान की गई। 

 

गौरतलब है कि आइटीबीपी के इस कैंप में मालदीव के सात नागरिकों के साथ सात बच्चे भी शामिल थे, जिनमें एक 3 महीने का शिशु भी था। बच्चों, वृद्धों और महिलाओं के साथ-साथ हर एक प्रकार के आयु वर्ग के लोगों को बहुत ही संजीदगी से आईटीबीपी ने अपने कैंप में रखा और इनकी सुख सुविधाओं का ख्याल रखा।

चार वक्त के भोजन के अलावा, दूध, फल, दवाइयां और यहां तक कि टेलीविजन और इंडोर गेम्स की सारी सुविधाएं और फ्री वाईफाई जैसी सुविधाएं भी इन सभी को प्रदान की गईं।

 

कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए सभी को रूम में इलेक्ट्रिक हीटर भी प्रदान करवाए गए। तीन से चार बार इलाके की सफाई भी करवाई जाती थी और प्रशिक्षित स्टाफ लगातार इलाके की निगरानी रखता था। हाइजीन और सैनिटेशन पर भी विशेष ध्यान दिया जाता था।

आईटीबीपी के लगभग 30 लोगों की डॉक्टर और मेडिक्स की टीम और साथ ही लगभग 30 से 40 अन्य प्रशासन से जुड़े हुए लोग निगरानी रख रहे थे और इन सब से इनका कुशल क्षेम पूछा जाता था। नियमित जांच के अलावा इस दौरान मेडिकल प्रोटोकॉल का और प्रोसीजर्स का विशेष तौर पर ख्याल रखा गया।

 

इन 18 दिनों में इन लोगों का आइटीबीपी के साथ एक भावनात्मक संबंध भी जुड़ गया था और इसे इन यात्रियों ने कई बार महसूस किया और इसके बारे में विस्तार से बात भी की। अब जबकि यह स्वस्थ घोषित होकर अपने-अपने घरों के लिए प्रस्थान करने वाले हैं, निश्चित रूप से यह अनुभव इन लोगों के लिए पूरे जीवन यादगार बना रहेगा और यह लोग आइटीबीपी के योगदान को कभी नहीं भूलेंगे।

 

इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में मनोवैज्ञानिक और चिकित्सीय तौर पर जो सहयोग आइटीबीपी ने किया है वह देश और दुनिया के लिए एक मिसाल है।

 

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