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कोरोना महामारी के बीच बदल रही हैं खानपान की आदतें, मधुमेह और मोटापे जैसी बीमारियां होंगी कम
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homemade food
- फोटो : udaipurblog
कोरोना दुनिया की अब तक की सबसे तेजी से फैलने वाली महामारी बन गई है, हालांकि इससे पहले भी दुनिया को डेढ़ दर्जन महामारियों से निपटना पड़ा है लेकिन किसी भी महामारी का संक्रमण इतना तेज नहीं था। कोरोना वायरस का संक्रमण काफी तेज है जिसकी वजह से महज तीन महीने में दुनिया के 200 से अधिक देश इस महामारी की चपेट में आए गए हैं।
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कोरोना के कारण पूरी दुनिया में दो लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई है, लेकिन इस महामारी के बीच एक अच्छी खबर है और वह यह है कि लोगों के खानपान में बदलाव हो रहा है जो कि उनकी सेहत के लिए एक बढ़िया संदेश है।
दुनिया में लोगों की खराब सेहत का सबसे बड़ा कारण उनका खानपान ही है। खराब खानपान के मामले में अमेरिका पहले पायदान पर है। महामारी विज्ञान के प्रोफेसर और हार्वर्ड टी.एच. चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ डॉक्टर वाल्टर विललेट के मुताबिक 40 फीसदी से अधिक व्यस्क अमेरिकी मोटापे के शिकार हैं जिसके कारण लोगों में हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं और लोगों की जान भी जा रही है, लेकिन कोरोना ने लोगों की जिंदगी सुधार दी है।
अब लोग घर पर बना खाना खाने लगे हैं और नाश्ते से लेकर डिनर तक घर पर ही कर रहे हैं। दुनियाभर के शोधकर्ता भी लॉकडाउन में लोगों के खानपान को लेकर शोध कर रहे हैं, हालांकि अभी तक कोई खास डाटा सामने नहीं आया है। अमेरिका जैसे देशों में लोग घर पर खूब खाना बना रहे हैं और इसके लिए वे यूट्यूब जैसी साइट्स पर वीडियो देख रहे हैं।
अमेरिकी फर्म हंटर के सर्वे के मुताबिक 50 फीसदी लोगों ने माना है कि वे लॉकडाउन में घर पर पहले के मुकाबले अधिक खाना पका रहे हैं, जबकि 38 फीसदी ने माना कि उन्होंने ऑनलाइन खाना मंगाना बहुत कम कर दिया है। इस सर्वे में 1,000 लोग शामिल थे और यह सर्वे अप्रैल में हुआ था।
घर का खाना खाने के फायदे
कोरोना के कारण अमेरिका ही नहीं, भारत समेत कई देशों में यह बदलाव देखा जा रहा है। सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स के ट्रैफिक इसके गवाह हैं। लोग हर रोज सोशल मीडिया पर अपनी नई-नई रेसिपी शेयर कर रहे हैं।
घर में खाना पकाने की आदत को एक बहुत बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इसका सकारात्मक असर लोगों की सेहत पर पड़ेगा। हृदय संबंधी बीमारी, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापे जैसी बीमारियों में कमी देखने को मिल सकती है।
कार्डियोलॉजिस्ट और टफ्ट्स फ्रीडमैन स्कूल ऑफ न्यूट्रिशन साइंस के डीन डॉक्टर दारीश मोजफेरियन कहते हैं कि अमेरिकी रेस्तरां से लोगों के शरीर में करीब 21 फीसदी कैलोरी जाती है। इसके अलावा रेस्तरां में अधिकांश खाना खराब पोषण वाला होता है, जबकि जब आप घर पर खाना पकाते हैं तो आप अपने सफाई और पोषक तत्वों को पूरा ध्यान रखते हैं।
साथ ही आप चीनी, नमक और मसाला भी अपनी सेहत के अनुसार इस्तेमाल करते हैं। कुल मिलाकर कहें तो कोरोना के दुनिया परेशान तो है लेकिन कुछ चीजें अच्छी भी रही हैं। जैसे- खाने-पीने की आदत बदल रही है, प्रकृति आबाद हो रही है, लोगों के दैनिक खर्च में कमी आई है, आदि।