फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Coronavirus Lockdown heart touching Jyoti Kumari Cycle Girl Story

पलायन के अंधेरे की ज्योति: साइकिल गर्ल की बदल गई जिंदगी

Tue, 23 Mar 2021 06:32 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 23 Mar 2021 06:32 AM IST
सार

  • साइकिल गर्ल के नाम से मशहूर हुई ज्योति देश-विदेश के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरी।
  • डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप के ट्वीट के बाद उसके घर मदद करने के लिए काफी लोग पहुंचे।
  • बिहार सरकार ने नशा मुक्ति अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाया। 

विज्ञापन
Coronavirus Lockdown heart touching Jyoti Kumari Cycle Girl Story
साइकिल गर्ल के नाम से महशूर ज्योति - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

लॉकडाउन में बीमार पिता को साइकिल से 1200 किमी दूर घर तक ले जाने वाली 17 वर्षीय ज्योति कुमारी देशभर में जाना-पहचाना नाम बन गई हैं। साइकिल गर्ल के नाम से मशहूर हुई इस बहादुर बेटी की खबरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वह देश-विदेश के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है।

विज्ञापन


ज्योति ने कभी नहीं सोचा था कि पिता मोहन पासवान (45) को गुरुग्राम से बिहार ले जाने का उसका संघर्ष उसकी जिंदगी चमका देगा। पिछले साल जब वह बिहार में दरभंगा स्थित अपने गांव सिरहुल्ली पहुंची तो परिवार एक कमरे के घर में जीवनयापन कर रहा था। अब जीवनस्तर सुधर गया है।
विज्ञापन

 
लॉकडाउन के सालभर बाद ज्योति ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप के ट्वीट के बाद उसके घर मदद करने के लिए काफी लोग पहुंचे। अब मेरा घर तीन मंजिला बन गया है। घर में रसोई है, नल, बड़ा टीवी भी लग गया है। मैंने इस बार बोर्ड परीक्षा भी दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ज्योति बताती है कि वह तीन बहनों और दो भाइयों में दूसरे नंबर की है। ज्योति की मां फूलो देवी सरकारी स्कूल में रसोइये के रूप में काम करती हैं। पिता मोहन पासवान पहले हरियाणा में ई-रिक्शा चलाते थे, दुर्घटना में पैर टूटने के बाद उन्होंने काम छोड़ दिया है। पासवान का कहना है कि आर्थिक तंगी में परिवार कर्ज में डूब गया था इसलिए ज्योति व अन्य बच्चों की पढ़ाई छुड़वा दी थी।

पिछले एक साल में विधायक और सामाजिक संगठनों से लेकर उपमुख्यमंत्री तक हमसे मिल चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बिटिया से फोन पर बात की। अब तक करीब आठ लाख रुपये की मदद मिल चुकी है। इससे हमने कर्जा चुकाया और घर भी बनवाया। पासवान के मुताबिक, उनके पैर का इलाज भी इन्हीं पैसों से हो रहा है। सभी बच्चों की शिक्षा फिर से शुरू हो गई है।

पड़ोसियों ने साइकिल का इंतजाम किया... ट्रक वालों ने खाना दिया तब आठ दिन बाद पहुंची घर
ज्योति ने कहा, पिता का एक्सीडेंट हो गया था। महामारी में धीरे-धीरे काम-धंधे बंद हो रहे थे। जमा-पूंजी खत्म होने लगी थी। फिर लॉकडाउन लग गया। हमारी बस्ती के सभी लोग घर लौटने लगे थे। लेकिन हम फंस गए। मालिक घर छोड़ने का दबाव डालने लगा। तभी मुझे लगा कि कोई कदम उठाना पड़ेगा। कुछ पड़ोसियों ने जैसे-तैसे साइकिल का इंतजाम करा दिया। हम दरभंगा के लिए निकल पड़े। मुझे बस यही खयाल था, कुछ भी हो, घर पहुंचना है। रास्ते में काफी दिक्कतें आईं, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। इस बीच, गांव वालों, ट्रक वालों ने खाना-पानी दिया। आखिरकार मैं आठ दिन में पिता को लेकर घर पहुंची।

प्रधानमंत्री ने की थी तारीफ
प्रधानमंत्री मोदी ने ज्योति को फोन कर खूब तारीफ की थी। वहीं, उसे प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। बिहार सरकार ने नशा मुक्ति अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाया है। 


घर के गेट पर ज्योति का नाम
पिता ने घर के गेट पर ज्योति का नाम लिखवाया है। पासवान ज्योति के सिर पर हाथ फेरते हुए कहते हैं, मैं बेटी की हिम्मत और हौंसले को सलाम करता हूं। आज जब लोग मुझे ज्योति का पापा कहकर बुलाते हैं, तो गर्व से सीना चौड़ा हो जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed